छत्तीसगढ़ में हर्बल गुलाल से बढ़ेगी आजीविका, महिलाएं होली के लिए तैयार कर रहीं प्राकृतिक रंग
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं अपनी आजीविका को सशक्त बनाने के लिए होली पर हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने इन महिलाओं के लिए बाजार उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। स्वयं सहायता समूह (SHG) की ये महिलाएं राष्ट्रीय आजीविका मिशन (National Livelihood Mission) के तहत इको-फ्रेंडली हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं, जिसमें प्राकृतिक रूप से चुकंदर और पलाश के फूलों का उपयोग किया जा रहा है।
बलरामपुर जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रणवीर साय ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि जनपद मनौरा की गंगा महिला एसएचजी की सदस्य हर्बल गुलाल बनाकर अपनी आजीविका बढ़ाने में जुटी हैं। अब तक एक क्विंटल से अधिक गुलाल तैयार किया जा चुका है और निर्माण जारी है।
#WATCH | Balrampur, Chhattisgarh | Women of Ganga Mahila SHG (Self-Help Group) under the National Livelihood Mission prepare eco-friendly herbal gulal using ingredients like beetroot and palash flowers for Holi in the Balrampur district of Chhattisgarh. pic.twitter.com/FDczuHzHNX
— ANI (@ANI) March 9, 2025
प्रशासन देगा बाजार और स्टॉल की सुविधा
होली के अवसर पर महिलाओं के हर्बल गुलाल को बढ़ावा देने के लिए बाजार और सरकारी कार्यालयों में स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां वे अपने उत्पाद बेच सकेंगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।
प्राकृतिक गुलाल सेहत के लिए सुरक्षित
सीईओ रणवीर साय ने बताया कि हर्बल गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों से बनाया गया है, जो केमिकल युक्त रंगों की तुलना में त्वचा के लिए सुरक्षित है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अधिक से अधिक हर्बल गुलाल का उपयोग करें और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का सहयोग करें।
इस साल होली का त्योहार 14 मार्च को मनाया जाएगा, जबकि 13 मार्च को होलिका दहन होगा। बाजारों में तरह-तरह के रंग, गुलाल और पिचकारियां उपलब्ध हैं, लेकिन प्रशासन लोगों से सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होली मनाने की अपील कर रहा है।

