Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ गाने पर डांस करते नजर आए IPS असित यादव ,डीआईजी पद पर पदोन्नति… 
    • बंगाल में CM पर फैसला कराने खुद जाएंगे अमित शाह, असम की जिम्मेदारी जेपी नड्डा को…
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार जांजगीर-चांपा में तेजी से आगे बढ़ रहा मेडिकल कॉलेज प्रोजेक्ट
    • संवाद से समाधान: कमराखोल में मुख्यमंत्री ने दूर की बिजली बिल की चिंता
    • माओवादियों का गढ़ रहे तर्रेम बना स्वास्थ्य मॉडलः राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल
    • एक चौपाल ऐसा भी जहाँ खुशियों और तालियों की रही गूंज,लखपति दीदियों के हौसले की उड़ान देख गदगद हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
    • सुशासन तिहार: चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान
    • सुशासन तिहार: सरोधी की चौपाल में दिखी बदलाव की कहानी
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, May 5
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»लेख-आलेख»पंजाब के लिए भाजपा कैसे कर रही हरियाणा से अपनी रणनीति का पुनर्निर्माण
    लेख-आलेख

    पंजाब के लिए भाजपा कैसे कर रही हरियाणा से अपनी रणनीति का पुनर्निर्माण

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 1, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है लेकिन राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आना शुरू हो गया है। विरोध प्रदर्शनों, कानून व्यवस्था पर बहसों और केंद्र-राज्य की खींचतान के बीच, भारतीय जनता पार्टी एक दूरदर्शी पार्टी के धैर्य के साथ चुपचाप अपनी पंजाब रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रही है। इस पुनर्समायोजन के केंद्र में एक तेजी से उभरता हुआ और सावधानीपूर्वक स्थापित व्यक्तित्व है- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी। एक सामान्य पर्यवेक्षक के लिए, पंजाब में सैनी की लगातार उपस्थिति सामान्य या प्रतीकात्मक प्रतीत हो सकती है। हालांकि, भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों के लिए, यह पार्टी के पंजाब संबंधी दृष्टिकोण को नया रूप देने का एक सुनियोजित प्रयास है।

    पंजाब में भाजपा की वर्तमान हाशिए की स्थिति अक्सर उसके जटिल चुनावी सफर को छिपा देती है। 2007 और 2012 में, पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की सहयोगी के रूप में सत्ता में मजबूती से स्थापित थी, महत्वपूर्ण विभागों पर उसका नियंत्रण था और अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, पठानकोट और होशियारपुर जैसे शहरी, हिंदू बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में उसका दबदबा था। शिअद का ग्रामीण सिख बहुल क्षेत्रों में दबदबा था। भाजपा ने सिख राजनीतिक नेतृत्व को चुनौती दिए बिना उसका समर्थन किया। 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन का टूटना महंगा साबित हुआ। पंजाब लोक कांग्रेस और शिअद (संयुक्त) के साथ एन.डी.ए. गठबंधन में 73 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए भाजपा को केवल 2 सीटें मिलीं। फिर भी, इस निराशाजनक परिणाम ने एक महत्वपूर्ण तथ्य को छिपा दिया, जिस पर पार्टी के रणनीतिकार लगातार जोर देते हैं। भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 6.6 प्रतिशत हो गया, जो उसके पिछले अकेले चुनाव प्रदर्शन से 1.2 प्रतिशत अंक अधिक है।

    2024 के लोकसभा चुनावों में यह रुझान और भी स्पष्ट हो गया। हालांकि भाजपा एक भी संसदीय सीट जीतने में असफल रही (2019 में 2 सीटों की तुलना में) लेकिन उसका वोट शेयर 9.63 प्रतिशत से बढ़कर 18.56 प्रतिशत हो गया, जो 5 वर्षों में लगभग 9 प्रतिशत अंकों की वृद्धि है। पार्टी तीन लोकसभा क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रही और 23 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही। केवल 2 विधायकों वाली पार्टी के लिए ये आंकड़े महत्वहीनता का संकेत नहीं हैं। ये भाजपा की उस समस्या को दर्शाते हैं, जिसे वह ‘असंभावित वोट’ मानती है-ऐसे वोट जिनमें सीटों में परिवर्तित होने की संगठनात्मक क्षमता नहीं है। इस अंतर को पाटने के लिए, निरंतर और सांस्कृतिक रूप से अनुकूलित जनसंपर्क के माध्यम से, नायब सिंह सैनी की भूमिका सामने आती है।

    नायब सिंह सैनी क्यों महत्वपूर्ण : भाजपा के लिए सैनी सिर्फ एक कैंपेनर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संपत्ति हैं। हरियाणा विधानसभा चुनावों के बाद उनका उदय हुआ, जिससे पार्टी के अंदर उनकी स्थिति मजबूत हुई है। हालांकि, पंजाब में उनकी प्रासंगिकता पहचान और छवि के मेल में है, जिसे भाजपा महत्वपूर्ण मानती है। वह सैनी समुदाय से हैं, जिसे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ.बी.सी.) में वर्गीकृत किया गया है। भाजपा एक व्यापक सामाजिक एकजुटता रणनीति के हिस्से के रूप में गैर-जाट ओ.बी.सी. समूहों को सक्रिय रूप से लुभा रही है। पंजाब में, हिंदू ओ.बी.सी. मतदाता एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, विशेषकर कुछ खास इलाकों में, जिससे यह पहुंच राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। भाजपा रणनीतिकारों द्वारा सैनी की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि को भी समान रूप से उजागर किया गया है। उनकी मां सिख समुदाय से हैं, साथ ही पंजाबी सांस्कृतिक प्रतीकों को लगातार अपनाने पर भी जोर दिया गया है। पंजाब में पगड़ी पहनना, गुरुद्वारों का दौरा, पंजाबी बोलियों में सहजता, और सिख धार्मिक स्थलों के साथ स्पष्ट जुड़ाव को सिख और पंजाबी ङ्क्षहदू दोनों समुदायों के बीच पुल के रूप में पेश किया जा रहा है। 

    पंजाब में सैनी की गतिविधियां बेतरतीब नहीं रहीं। उनकी पहुंच हरियाणा से सटे सीमावर्ती और अर्ध-सीमावर्ती जिलों, जिनमें जीरकपुर, डेरा बस्सी, संगरूर और सुनाम शामिल हैं और दोआबा तथा पुआध क्षेत्रों के कुछ हिस्सों तक केंद्रित रही है। इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय ओ.बी.सी. आबादी है और पड़ोसी हरियाणा के साथ लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। पारंपरिक पोशाक में उनकी उपस्थिति, गुरुद्वारा कार्यक्रमों में भागीदारी और सिख धार्मिक समारोहों में उपस्थिति को सम्मान के संकेत के रूप में पेश किया जाता है। सांझा इतिहास और रिश्तेदारी के संदर्भ अक्सर पंजाब को ‘बड़ा भाई’ बताते हुए, राजनीतिक कड़वाहट को कम करने के लिए सावधानी से चुने जाते हैं। एस.वाई.एल. नहर या चंडीगढ़ की स्थिति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी, सैनी का लहजा टकराव वाला नहीं, बल्कि सुलह वाला रहा है। 

    राजनीतिक संदेश के रूप में शासन : भाजपा की पंजाब रणनीति हरियाणा में सैनी के शासन को दिखाने पर भी बहुत अधिक निर्भर करती है। हरियाणा सरकार का 1984 के सिख दंगों के पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने का फैसला, सिख गुरुओं की याद में लैजिस्लेटिव कार्यक्रम और लाडो लक्ष्मी योजना जैसी कल्याण योजना, जिसमें महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपए देने का वादा किया गया है, इन्हें ठोस प्रशासनिक नतीजों के तौर पर पेश किया जा रहा है। पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने 2022 में महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपए देने का वादा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है। भाजपा ‘कांग्रेस से आयात’ की दिशा से आगे बढ़ रही : आंतरिक रूप से, सैनी की प्रमुखता एक बदलाव का संकेत भी देती है। पिछले कुछ वर्षों में, भाजपा की पंजाब इकाई में उन नेताओं का दबदबा रहा है, जो कांग्रेस या सहयोगी दलों से आए थे-जैसे कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील कुमार जाखड़। इसके विपरीत, सैनी पंजाब में बिना किसी पूर्वाग्रह या गुटबाजी के भाजपा के स्वदेशी नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके उदय से पार्टी को आयातित नेताओं पर निर्भरता की बजाय एक स्वाभाविक नेतृत्व की छवि प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

    बहुत कम लोगों को उम्मीद है कि 2027 में भाजपा पंजाब में बहुमत हासिल कर पाएगी। ग्रामीण मालवा में संगठनात्मक कमियां अभी भी बनी हुई हैं और सिखों का राजनीतिक संशय भी कायम है। फिर भी, चुनाव समीकरणों को नया रूप देने का भी जरिया हैं। अगर भाजपा ओ.बी.सी. समर्थन को मजबूत कर पाती है, शहरी हिंदू वोट बैंक को बरकरार रख पाती है और दोआबा और सीमावर्ती इलाकों में विरोध को कम कर पाती है, तो वह एक महत्वपूर्ण तीसरी शक्ति के रूप में उभर सकती है। मामूली बढ़त भी पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है और गठबंधन के समीकरण को बदल सकती है। पंजाब में शॉर्टकट को शायद ही कभी बढ़ावा दिया गया है। भाजपा धैर्य की रणनीति अपना रही है, जहां सांस्कृतिक जुड़ाव महत्वाकांक्षा  से पहले आता है और शासन की दिखावट बयानबाजी से पहले। इस ढांचे में, सैनी पार्टी के सबसे प्रमुख और सोच-समझकर इस्तेमाल किए गए हथियार के रूप में उभरे हैं।-मोनिका मलिक

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    स्मार्ट, संवहनीय, बेजोड़: टेक्निकल टेक्सटाइल इस तरह बुन रहे हैं फुटवियर में भारत का भविष्य-श्री गिरिराज सिंह

    May 4, 2026

    क्या हैं मिडल क्लास की आर्थिक तंगी के खास कारण

    May 4, 2026

    छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटियों से महकेगा नारी शक्ति का स्वावलंबन

    May 3, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.