हवाई। फ्रांस में जी7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच होने वाली बैठक से पहले अमेरिका ने भारत को बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पेंटागन ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस-पैसिफिक कमांड कर दिया है।
इस कमांड की जिम्मेदारी हिंद महासागर से लेककर प्रशांत महासागर तक की है और इसी के अंतर्गत अमेरिका का सातवां बेड़ा आता है। इसी बेड़े ने 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान की मदद करने की कोशिश की थी।
हैरी एस. ट्रूमैन ने की थी स्थापना
मूल रूप से 1 जनवरी, 1947 को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा स्थापित यह कमांड 70 से अधिक वर्षों तक USPACOM के नाम से काम करती रही और यह अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी यूनिफाइड कॉम्बैटेंट कमांड रही है।
विभाग ने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने में इसकी अहम भूमिका से लेकर कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और कई मानवीय अभियानों के दौरान संयुक्त बलों के बीच तालमेल बिठाने तक USPACOM नाम के साथ दशकों की सैन्य विरासत और लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय साझेदारियां जुड़ी हुई हैं।
यूएस-पैसिफिक कमांड का कितना है दायरा?
यूएस-पैसिफिक कमांड का दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट के समुद्री इलाकों से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है। यूएस पैसिफिक कमांड का नेतृत्व एडमिरल सैमुअल पापारो कर रहे हैं।
वहीं, USINDOPACOM के इंस्पेक्टर जनरल कमांडर की मदद और उन्हें सलाह देते हैं। वे निरीक्षण और जांच के दौरान निष्पक्ष और तटस्थ रहकर तथ्यों का पता लगाते हैं और कमांड की ‘आंख, कान, आवाज और जमीर’ के तौर पर काम करते हैं। साथ ही, वे USPACOM के कर्मचारियों की मदद करके कमांड की तैयारी, युद्ध-क्षमता और मिशन की क्षमताओं को बेहतर बनाने में भी योगदान देते हैं।
क्यों उठ रहे सवाल?
अमेरिका ने भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान को मिलाकर QUAD बनाया है और इंडो-पैसिफिक को मिलाकर ही इसका आधार है। ऐसे में अमेरिकी सेना की ओर से इंडो शब्द हटा देना कई सवाल खड़े करता है। इसका एक मतलब तो यह निकलता है कि अब अमेरिका का मुख्य फोकस प्रशांत महासागर पर होगा न कि हिंद महासागर पर। यानी अब वो सिर्फ प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में सुरक्षा पर फोकस करेगा।

