एक ही दिन 3 अप्रैल को 2 अमरीकी युद्धक विमानों को गिराए जाने से ईरान के साथ लगभग 5 सप्ताह से चल रहे संघर्ष में अमरीका के लिए गहरे तनाव का समय था। एक लापता अमरीकी पायलट की तलाश में एक जोखिम भरा अभियान शुरू हो गया था, माना जा रहा था कि वह ईरानी क्षेत्र में कहीं गिरा था। उसी दिन एक अलग घटना में, कुवैत के ऊपर एक अमरीकी ए-10 वॉर्थोग हमलावर विमान भी ईरानी हमले में क्षतिग्रस्त हो गया। अमरीकी अधिकारियों के अनुसार, पायलट सुरक्षित रूप से इजैक्ट करने में कामयाब रहा और बाद में उसे बचा लिया गया।
ये दो घटनाएं संघर्ष शुरू होने के बाद से अमरीकी हवाई अभियानों के लिए सबसे बड़े झटकों में से एक हैं। लापता एफ-15ई चालक दल के सदस्य का पता लगाने का प्रयास 24 घंटे चलता रहा। खोज और बचाव अभियान के लिए तैनात 2 अमरीकी ब्लैकहॉक हैलीकॉप्टर भी ईरानी गोलाबारी की चपेट में आ गए लेकिन वे ईरानी हवाई क्षेत्र से निकलने में कामयाब रहे। इन घटनाओं से कुछ ही दिन पहले, ट्रम्प ने कहा था, ‘‘हमारे विमान सचमुच तेहरान के ऊपर से उड़ रहे हैं। वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।’’
अमरीकी फाइटर जैट एफ-15 को गिराए जाने की स्थिति इस युद्ध की दिशा बदल सकती है। हालांकि पहले एक पायलट को अमरीका की सेना ने ईरान के अंदरूनी इलाके से बचा लिया था लेकिन दूसरे को भी अमरीका रात भर ढूंढता रहा और फिर ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हमें वह मिल गया है। उसे कुछ चोटें आई हैं, पर वह बच गया है।’ यह वाशिंगटन को हमले जारी रखने के लिए और साहस दे सकता है क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही जमीनी आक्रमण की बात कर रहे हैं। हालांकि ईरान ने अभी भी स्वीकार नहीं किया है कि अमरीका का दूसरा पायलट भी मिल गया है। यह समझना दिलचस्प है कि ईरान उन अमरीकी लड़ाकू विमानों को कैसे मार गिरा रहा है जिन्हें ‘अजेय’ माना जाता है। 19 मार्च को, एक अमरीकी एफ-35 पर ईरान ने हमला किया था और पायलट के घायल होने के कारण उसे उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। पिछले महीने 3 एफ-15 भी गिराए गए थे लेकिन 3 अप्रैल को, मध्य ईरान के ऊपर एक एफ-15ई गिर गया, जो दुश्मन की गोलीबारी से नष्ट होने वाला पहला मानवयुक्त अमरीकी लड़ाकू विमान था।
एफ-15ई की कीमत 10 करोड़ (100 मिलियन) डॉलर है, यह राडार के लिए वास्तव में अदृश्य है। इसका आकार और कोटिंग राडार तरंगों को लगभग पूरी तरह से सोख लेती है कि स्क्रीन पर यह एक पक्षी से भी छोटा दिखाई देता है। अमरीका ने इसे बनाने में 2 दशक और 400 अरब डॉलर खर्च किए हैं। लेकिन ‘स्टील्थ’ तकनीक आपको केवल राडार से छिपाती है, यह गर्मी (हीट) को नहीं छिपा सकती और इन विमानों के इंजन अत्यधिक हीट पैदा करते हैं। इसलिए थर्मल कैमरे पर यह विमान आसमान में चमकता हुआ दिखाई देता है, अत: ईरान ने पैसिव इंफ्रा सैंसर (मूल रूप से हीट-सीकिंग कैमरे) का उपयोग किया, जो बिना कोई सिग्नल छोड़े आसमान को स्कैन करते हैं।
इसका अर्थ है पायलट को कोई चेतावनी नहीं मिलना। विमान का राडार वार्निंग सिस्टम खामोश रहना। विमान की निगरानी करने वाले लोगों के लिए वह शून्य चेतावनी देता है। एफ-35 में वास्तव में अपना खुद का 360 डिग्री इंफ्रारैड कैमरा ्रहृ/्र्रक्त-३७ है जो विशेष रूप से आने वाली मिसाइलों का पता लगाने के लिए बनाया गया है। तो ऐसा प्रतीत होता है कि अमरीकी विमान ईरानी मिसाइल को देख नहीं सका या उसके पास प्रतिक्रिया करने का समय नहीं था। महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान का हीट-ट्रैकिंग सिस्टम सबसे सस्ता है, जबकि एफ-15ई सबसे महंगे विमानों में से एक है। यह उस समय हो रहा है, जब ट्रम्प ने दावा किया था-‘हमने ईरान की सेना को तबाह कर दिया है और अमरीका ईरान के हवाई क्षेत्र पर हावी था।’
हालांकि ईरान के स्थानीय गवर्नर पायलट को पकडऩे के लिए नकद ईनाम का वादा कर रहे थे, स्थानीय स्तर पर हो रही लामबंदी भी ईरान की ग्रामीण और जनजातीय आबादी के गहरे देशभक्ति भाव का संकेत है, जिसने अपने देश की रक्षा को मजबूत परंपरा बना कर रखा हुआ है। एक बात जो स्पष्ट रूप से सामने आई है, वह है ईरान की लड़ाकू भावना, उसके खुद के बनाए मिसाइल और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था, जो लगातार नए नेतृत्व को आगे लाती है। इस का आगे का रास्ता चाहे जो भी हो लेकिन अमरीकी जैट के युद्ध में गिरने के बाद एक बात साफ हो गई है कि ऑप्रेशन सिंदूर में तैनात राफेल ही नहीं, बल्कि अमरीकी फाइटर जैट एफ-16 को भी गिराया जा सकता है। भारतीय वायु सेना के खिलाफ ट्रम्प के अपमानजनक बयान भारत को अपने बनाए विमानों को बेचने का एक प्रयास थे, जो पूरी तरह से गलत साबित होते हैं और गहरे हमले वाले मिशनों में राफेल की उपयोगिता उतनी ही प्रभावी है, अगर उससे बेहतर नहीं।

