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    Home»धर्म आस्था»धनतेरस से लेकर भाईदूज तक कब, कहां और कितने दीये जलाएं? जानें पूरी विधि एवं नियम
    धर्म आस्था

    धनतेरस से लेकर भाईदूज तक कब, कहां और कितने दीये जलाएं? जानें पूरी विधि एवं नियम

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inOctober 17, 2025
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    हिंदू धर्म में दीपों से जुड़े महापर्व दीपावली का बहुत ज्यादा महत्व है. सुख, संपदा और धन-धान्य को बढ़ाने वाले इस पावन पर्व का इंतजार लोगों को पूरे साल बना रहता है. इन पांच दिनों में आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के देवता भगवान कुबेर, धन की देवी मां लक्ष्मी, शुभ और लाभ के देवता भगवान गणेश, शक्ति का दिव्य स्वरूप मां काली, संकटमोचक हनुमान, गोवर्धन भगवान आदि देवताओं की पूजा में दीये जलाने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. आइए जानते हैं कि किस दिन, किस देवता के लिए कौन सा और कितने दीये जलाने पर सुख-सौभाग्य का वरदान मिलता है.

    दिन 1 – धनतेरस

    • धनतेरस पर कहां जलाएं दीया: घर का मुख्य द्वार – दोनों तरफ कम से कम एक-एक दीया; घर की चौखट, व मुख्य पूजा-कक्ष में विशेष रूप से घृत का दीया.
    • धनतेरस पर क्यों जलाएं दीया: धन की रक्षा व वृद्धि के लिए; व्यापारिक प्रतिष्ठानों/दुकानों पर भी दीप जलाना परंपरा है – व्यापारी वर्ग के लिए यह नई लेखा-जोखा/संपत्ति की शुभारंभ की निशानी है.
    • धनतेरस पर किस चीज का जलाएं दीया: मां लक्ष्मी के लिए शुद्ध घृत सर्वाधिक शुभ माना जाता है. यदि घृत न हो तो शुद्ध देसी तेल या तिल के तेल का विकल्प चुना जा सकता है.
    • धनतेरस पर कितने दीये जलाना चाहिए: प्रवेश द्वार पर कम से कम 2×2 – या कुल 6-10 छोटे दीये पारंपरिक रूप से उपयुक्त हैं लेकिन व्यवसायिक स्थल पर अधिक हो सकते हैं.

    दिन 2 – नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली

    • छोटी दिवाली पर कहां जलाएं दीया: घर की छत, आंगन, घर के अन्दर-बाहर छोटी छोटी कतारों में दीप जलाएं. बाथरूम के पास छोटे दीप जलाएं. (निरंजन/शुद्धिकरण) – रात में घर की परिक्रमा करते हुए भी दीप जलाते हैं.
    • छोटी दिवाली पर क्यों जलाएं दीया: नकारात्मकता/अशुद्धता का नाश करने और शुद्धिकरण के लिए दीपदान करें. यह मानसिक पवित्रता का भी प्रतीक है.
    • छोटी दिवाली पर पर किस चीज का जलाएं दीया: तिल का तेल या सरसों का तेल पारंपरिक रूप से उपयोग होता है – क्योंकि तिल और सरसों उर्जावान व ऊष्मीय होते हैं और ‘शुद्धिकरण’ प्रतीक करते हैं.
    • छोटी दिवाली पर कितने दीये जलाना चाहिए: घर के चारों कोनों में और छत पर कतारों में जलाएं. प्रत्येक कमरे के द्वार पर 1-2 दीप, कुल मिलाकर 12-24 छोटी लौएँ प्रचलित हैं. (इसे आप अपने परिवार अथवा आकार के अनुसार बढ़ा/घटा सकते हैं.)

    दिन 3 – लक्ष्मी-पूजा / मुख्य दिवाली

    • दिवाली पर कहां जलाएं दीया: पूजा के कक्ष और लक्ष्मी की मूर्ति/चित्र के सामने प्रमुख रूप से घी का दीया, मेन डोर पर विस्तृत दीपयोजना या​नि (दीपों की पंक्तियां), चौखट और भीतर कक्षों में जलाएं. घर की ओर जाने वाले रास्ते पर तथा रसोई के पास भी दीप जलाकर रखें.
    • दिवाली पर क्यों जलाएं दीया: मां लक्ष्मी का स्वागत और धन-समृद्धि की प्राप्ति के लिए. साथ ही साथ प्रकाश से आध्यात्मिक आकर्षण व सकारात्मक ऊर्जा की स्थापना के लिए दीप जलाएं.
    • दिवाली पर पर किस चीज का जलाएं दीया: घृत सर्वोत्तम. यदि उपलब्ध न हो तो शुद्ध देसी तेल/तिल का तेल. घृत की लौ को शुभ, शुद्ध व अधिक तेजस्वी माना गया है – इसलिए मुख्य पूजा में घी का दीया जलाएं.
    • दिवाली पर कितने दीये जलाना चाहिए: पारंपरिक रूप से 11, 21 या 51 दीयों का प्रयोग देखा जाता है. वर्तमान समय में घर के प्रवेश पर दीयों की लंबी पंक्ति और पूजा स्थान पर कम से कम 11 घृत-दीप उपयुक्त माने जाते हैं. (ध्यान रहे: दीयों की संख्या क्षेत्रीय परंपरा व पूजा की विधि पर निर्भर है.)

    दिन 4 – गोवर्धन पूजा

    • गोवर्धन पूजा पर कहां जलाएं दीया: घर के आंगन में, आंगन के दक्षिण-पश्चिम कोने में (यदि गोवर्धन या अन्नकूट तैयार हो तो उसी के पास), बाहर के चबूतरे या द्वार के पास.
    • गोवर्धन पूजा पर क्यों जलाएं दीया: प्रकृति-पूजा, अन्न-समृद्धि और कृष्ण-लीला का स्मरण करने के लिए तथा अन्नकूट के पास दीप जरूर जलाएं.
    • गोवर्धन पूजा पर किस चीज का जलाएं दीया: अन्नकूट के अवसर पर घृत और शुद्ध वनस्पति तथा तेल दोनों का दीया उत्तम माना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार घी के दीये की लौ शुद्धता दर्शाती है.
    • गोवर्धन पूजा पर कितने दीये जलाना चाहिए: गोवर्धन/अन्नकूट की पूजा में 7-11 दीप प्रचलित हैं; क्षेत्रीय रीति अनुसार अधिक भी रखे जा सकते हैं.

    दिन 5 – भाई दूज / यम द्वितीया

    भाई दूज पर कहां जलाएं दीया: भाई-बहन के सम्मुख पूजा-स्थल पर दीप जलाएं. इसी प्रकार घर के मुख्य द्वार पर कुछ दीप तथा यम देवता के लिए कुछ दीप दक्षिण दिशा में भी रखे जाते हैं.

    • भाई दूज पर क्यों जलाएं दीया: पारिवारिक स्नेह और लंबी आयु की कामना को पूरा करने के लिए त था पितृऋण एवं यम देवता के आशीर्वाद के लिए इस दिन दीया जलाना चाहिए.
    • भाई दूज पर किस चीज का जलाएं दीया: भाई दूज पर सामन्य रूप से दीये में घृत/तेल दोनों का प्रयोग होता है. यदि आप यम देवता के लिए दीप जला रहे हैं तो तिल का तेल भी उपयोग कर सकते हैं.
    • भाई दूज पर कितने दीये जलाना चाहिए: इस दिन 2-5 दीप सामान्य रूप से जलाएं जाते हैं. यदि आप यम-दीपदान कर रहे हों तो प्रतीकात्मक 2-7 दीप भी रख सकते हैं.

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. )

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