गुजरात के नगर निकाय चुनाव में बीजेपी काफी प्रदर्शन काफी अच्छा रहा, जबकि कांग्रेस और अन्य दल काफी पीछे रह गए हैं. बीजेपी ने विपक्ष का सफाया कर दिया और महानगर पालिका की सभी15 सीटों पर जीत दर्ज की है. बीजेपी के खेमें इस समय खुशी की लहर है. नगर निगम से लेकर नगर पालिका और जिला पंचायत में बीजेपी का प्रदर्शन जबरदस्त रहा, लेकिन बीजेपी की लहर में भी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की नौकरी छोड़कर राजनीति में आये मनोज निनामा को हार का सामना करना पड़ा है.
इससे बीजेपी को थोड़ा झटका लगा है कियोंकि निनामा से उसे काफी उम्मीदें थीं. पूर्व IPS अधिकारी मनोज नीनामा अरावली जिले की ओध सीट से बीजेपी की टिकट से उम्मीदवार थे, लेकिन मोदी लहर के बावजूद इस सीट से वो करीब 2700 वोटों से हार गए. निनामा ने 42 सालों तक पुलिस में अपनी सेवा दी है.
निनामा सियासी इम्तिहान में हुए फेल
निनामा ने अपने आधिकारिक रिटायरमेंट से ठीक तीन महीने पहले ही स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया था और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे, लेकिन वो अरावली जिले की ओध सीट से हार गए. इस तरह वो अपने पहले ही सियासी इम्तिहान में वो फेल हो गए. निनामा की हार से बीजेपी को झटका लगा है. पार्टी को उम्मीद थी कि उनका प्रशासनिक अनुभव और आदिवासी पहचान उत्तरी गुजरात बेल्ट में बेहतर प्रदर्शन करेगा. गौर हो कि गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2026 में सभी 15 नगर निगम सीटों पर बीजेपी ने कब्जा कर विपक्ष को धूल चटा दी है.
बीजेपी की चुनावों में बल्ले-बल्ले
इसके साथ ही बीजेपी ने 34 में से 33 जिला पंचायतों पर भी जीत दर्ज की है. वहीं, जिला पंचायतों के चुनावों में बीजेपी के हाथ से केवल नर्मदा जिला हाथ से निकला है. यहां आम आदमी पार्टी (AAP) ने 22 में से 15 सीटों पर कब्जा किया है. गुजरात में 26 अप्रैल को हुए निकाय चुनावों में AAP ने 350 से अधिक सीटें हासिल की हैं. पार्टी ने वर्ष 2021 के स्थानीय निकाय चुनाव में 69 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
AAP के गुजरात प्रभारी गोपाल राय ने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ सीधे चुनाव लड़ा, वहां पार्टी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं पर दबाव डाला गया और कई मामलों में उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए, इसके बावजूद उम्मीदवारों ने मजबूती से चुनाव लड़ा.

