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    Home»धर्म आस्था»7 ​सितंबर को अजा ​एकादशी, विष्णु पूजा में सुनें राजा हरिश्चंद्र की कथा, मुहूर्त, पारण
    धर्म आस्था

    7 ​सितंबर को अजा ​एकादशी, विष्णु पूजा में सुनें राजा हरिश्चंद्र की कथा, मुहूर्त, पारण

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inSeptember 6, 2026
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    Aja Ekadashi 2026 Katha: इस साल 7 सितंबर को अजा एकदशी का व्रत है. भाद्रपद मा​ह के कृष्ण पक्ष की एकादशी ति​थि को यह व्रत रखा जाता है. इस बार भाद्रपद कृष्ण एकादशी ति​थि 6 सितंबर को शाम 07:29 बजे से लेकर 7 सितंबर को शाम 5:03 बजे तक है. अजा ​एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग शाम में 06:14 पी एम से बन रहा है, जो पारण वाले दिन 8 सितंबर को सुबह 06:02 ए एम तक रहेगा. अजा ​एकादशी की पूजा आप सुबह में अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 06:02 ए एम से 07:36 ए एम या शुभ-उत्तम मुहूर्त 09:10 ए एम से 10:45 ए एम के बीच कर सकते हैं. व्रत का पारण 8 सितंबर को सुबह 06:02 ए एम से कर सकते हैं. पारण सुबह 8 बजकर 33 मिनट से पहले कर लें. पूजा के समय अजा ​एकादशी व्रत की कथा जरूर सुनें, आपके सारे कष्ट मिट जाएंगे.

    लेकिन राजा हरिश्चंद्र हमेशा सत्य के मार्ग पर चलते रहे. जब वे एकांत में होते, तो अपनी पत्नी और पुत्र के दुखों के बारे में सोचते. उनसे मुक्ति का मार्ग सोचते रह​ते थे. वे वह उपाय जानना चाहते थे, जिससे उनके कष्ट दूर हो जाएं और उनका उद्धार हो जाए.

    राजा हरिश्चंद्र ने काफी समय तक ऐसे ही समय व्यतीत किया. एक दिन वह उदास और चिंतित बैठे थे, तभी वहां गौतम ऋषि आए. राजा हरिश्चंद्र ने उनको प्रणाम किया. फिर अपने दुखों से मुक्ति का मार्ग पूछा.

    गौतम ऋषि ने कहा कि हे राजन! तुम बहुत ही भाग्यशाली हो. ठीक आज से 7 दिन बाद भाद्रपद कृष्ण एकादशी है. उस दिन तुम विधि विधान से व्रत रखो और भगवान विष्णु की पूजा करो. हरि कृपा से ही तुम्हारा कल्याण होगा , सभी दुख दूर होंगे. यह उपाय बताने के बाद गौतम ऋषि वहां से चले गए.

    जिस दिन अजा एकादशी का व्रत था, उस दिन राजा हरिश्चंद्र ने ​विधि विधान से व्रत रखा. गौतम ऋषि की बताई विधि के अनुसार ही भगवान विष्णु की पूजा की, रात के समय जागरण किया. फिर अगली सुबह पारण करके व्रत को पूरा किया.

    राजा हरिश्चंद्र पर भगवान विष्णु की कृपा हुई. उनके सारे पाप और कष्ट नष्ट हो गए. स्वर्ग से फूलों की वर्षा होने लगी. उनका मरा हुआ पुत्र दोबारा जीवित हो गया, उनकी पत्नी रानी के समान हो गई थीं. अजा एकादशी व्रत के प्रभाव से ही राजा हरिश्चंद्र को खोया हुआ राजपाट और परिवार वापस मिल गया. मृत्यु के बाद राजा हरिश्चंद्र को स्वर्ग की प्राप्ति हुई.

    जो व्यक्ति विधि विधान से अजा एकादशी का व्रत करता है, राजा हरिश्चंद्र की तरह ही उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाता है.

    अजा ​एकादशी व्रत कथा

    एक बार युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण जी से भाद्रपद कृष्ण एकादशी व्रत की विधि अैर महत्व के बारे में बताने का निवेदन किया. इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण एकादशी अजा एकादशी नाम से प्रसिद्ध है. इसकी कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है.

    एक समय धरती पर च​क्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र का शासन था. किसी वजह से उनका राजपाट चला गया. ऐसी स्थिति बन गई कि पत्नी, बेटे और स्वयं को भी बेचना पड़ गया. राजा हरिश्चंद्र को एक चांडाल ने खरीदा. वे उसके यहां काम करते थे. राजा हरिश्चंद्र उसके सभी आदेश का पालन करते थे. मृतकों के वस्त्र लेते थे.

    (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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