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SIR , पश्चिम बंगाल में कम हो जाएंगे 10 लाख मतदाता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चार लाख से ज़्यादा मतदाताओं के दस्तावेजों को ‘अपात्र’ बताने से अंतिम सूची में 10 लाख से ज़्यादा नाम के कम होने की संभावना है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सूत्रों ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने 444970 मतदाताओं द्वारा जमा किये गये दस्तावेजों को ‘अपात्र’ के तौर पर चिह्नित किया है। आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी आयोग को भेज दी गयी हैं। इसके अलावा 466323 मतदाताओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेज जिला मजिस्ट्रेट के पास सत्यापन के लिए लंबित हैं। इससे पहले पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत हुई सुनवाई में लगभग सात लाख मतदाता शामिल नहीं हुए थे। जिन लोगों के दस्तावेज ‘अपात्र’ घोषित किए गए हैं, उन्हें मिलाकर 10 लाख से ज़्यादा मतदाता अंतिम सूची से हटाये जा सकते हैं।

आयोग ने पहले करीब 58 लाख मतदाताओं की पहचान की थी, जिनका देहांत हो चुका है, मौजूद नहीं हैं, या लापता हैं, जिसकी वजह से उन्हें मसौदा सूची से बाहर कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान और 10 लाख मतदाताओं की पहचान की गयी। इनमें से करीब सात लाख मतदाता सुनवायी में शामिल नहीं हुए, जबकि बाकी मामले अयोग्य पाये गये दस्तावेजों से जुड़े हैं। आयोग ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद कहा है कि पश्चिम बंगाल के लिए अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि अभी काफी काम बाकी है। दस्तावेज सत्यापन की समय सीमा 21 फरवरी है, और अगर तब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो अंतिम सूची के प्रकाशन में देरी हो सकती है। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि यदि लंबित मामलों का निपटारा समय पर पूरा नहीं हुआ, तो आयोग विस्तार की मांग कर सकता है। सुनवाई के दौरान मतदाताओं ने कई दस्तावेज जमा किए, जिनकी पर्यवेक्षक जांच कर रहे हैं। आयोग के सूत्रों के मुताबिक पर्यवेक्षक ने करीब 30 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों को दोबारा सत्यापन के लिए मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) को वापस भेज दिया है। करीब 20 लाख मतदाताओं के दस्तावेज अभी भी लंबित पड़े हैं, जिन पर अभी तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है। आयोग ने पहले एसआईआर प्रक्रिया के लिए मंजूर किये जाने वाले 13 दस्तावेजों की एक सूची प्रकाशित की थी और कहा था कि सूची के बाहर के दस्तावेज मंजूर नहीं किए जाएंगे, इसे बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी मंज़ूरी दी। सूत्रों ने हालांकि कहा कि कुछ मामलों में भ्रम हुआ, जहां सूची में शामिल नहीं किए गए दस्तावेज जमा किए गए और अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें मंज़ूर कर लिया। सूत्रों ने बताया कि संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। अधिकारियों के साथ आगे बातचीत के बाद इन मामलों के सुलझने की उम्मीद है।

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