नारायणपुर: सोलर परियोजना में घोटाला, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
नक्सल प्रभावित ग्राम पंचायत छोटेडोंगर में विकास कार्यों के नाम पर बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। सरकार द्वारा आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए भेजी गई वित्तीय सहायता का सही उपयोग न होकर, कथित रूप से भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से गबन कर लिया गया।
सोलर लाइट और पंप लगाने के नाम पर घोटाला
ग्रामीणों का आरोप है कि 15वें वित्त आयोग से मिली राशि से सोलर लाइट और सोलर पंप लगाने के नाम पर लाखों रुपये जारी किए गए, लेकिन काम तय मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरी परियोजना में फर्जी दस्तावेजों के जरिए भुगतान किया गया।
RTI से खुलासा: फर्जी TS बना घोटाले का आधार
आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि क्रेडा विभाग नारायणपुर का टेक्निकल सेक्शन (TS) फर्जी निकला। दस्तावेजों में तारीख नहीं थी, और विभाग की सील लगी होने के बावजूद उनकी सत्यता संदेहास्पद थी। इसी आधार पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया।

संदेहास्पद भुगतान और ठेकेदारों की भूमिका
टीएस के अनुसार, गांव में 1000 लीटर का वाटर टैंक और 900 वॉट का सोलर पंप लगाया जाना था, जिसकी अनुमानित लागत ₹5,80,484 बताई गई। हालांकि, जब इस टीएस की पुष्टि क्रेडा विभाग से की गई, तो अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह उनके कार्यालय से जारी नहीं हुआ। इसके बावजूद मई 2024 में माजीसा इंटरप्राइजेज नामक फर्म के नाम पर लाखों रुपये के बिल पास किए गए।

पंचायत सचिव ने ठेकेदार पर डाला दोष, प्रशासन मौन
जब पंचायत सचिव विनोद गावड़े से सवाल किया गया, तो उन्होंने सारा दोष ठेकेदार पर डालते हुए कहा कि उन्हें लगा कि टीएस असली था, इसलिए भुगतान कर दिया। वहीं, वर्तमान पंचायत सचिव पवन कुलदीप ने इसे पिछले कार्यकाल का मामला बताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया। जनपद पंचायत नारायणपुर के सीईओ एल.एन. पटेल ने कहा कि अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन अगर शिकायत आती है, तो जांच होगी।
घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं!
सूत्रों के अनुसार, यह गड़बड़ी केवल छोटेडोंगर तक सीमित नहीं है। जिले की कई अन्य पंचायतों में भी 15वें वित्त आयोग की राशि का इसी तरह से दुरुपयोग किया गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पहले भी कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को इस घोटाले की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की मांग: उच्च स्तरीय जांच हो!
स्थानीय ग्रामीणों ने इस घोटाले की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी राशि विकास कार्यों में लगनी चाहिए, न कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़नी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि छोटेडोंगर को न्याय मिलेगा या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा? क्या प्रशासन दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर इस गड़बड़ी पर पर्दा डालने की कोशिश की जाएगी? गांव के लोग अब भी न्याय और असली विकास की आस लगाए बैठे हैं।

