Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • राजधानी रायपुर के पंडरी थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद में हिंसा से मचा हड़कंप,जीजा ने साली पर चलाई गोली…
    • पद्मश्री फूलबासन यादव के अपहरण की बड़ी साजिश…
    • चुनाव : मुफ्त बांट से पिसती है अर्थव्यवस्था
    • एनएच-44 अर्रू तिराहे के पास अनियंत्रित होकर बिजली की खंभे से टकराई SWIFT कार, जिंदा जल गए कार में सवार दो पैसेंजर…
    • असम से आई बड़ी खबर, हिमंता ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा…
    • 19 जोड़े दाम्पत्य सूत्र में बंधे,मुख्यमंत्री कन्या विवाह में शामिल हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव…
    • बंगाल और तमिलनाडु : वैचारिक जनादेश भी
    • ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में रोका ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम, शांति-समझौते के करीब दोनों देश
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Wednesday, May 6
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»छत्तीसगढ़»अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियां विकास में बाधक. डॉ. दिनेश मिश्र
    छत्तीसगढ़

    अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियां विकास में बाधक. डॉ. दिनेश मिश्र

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 6, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Oplus_19005440
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    # जादू, टोने का अस्तित्व नहीं, अंधविश्वास में न फंसे डॉ दिनेश मिश्र

    भय, असुरक्षा की भावना अंधविश्वास के कारक डॉ दिनेश मिश्र

    अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियां स्वस्थ समाज के विकास में बाधक हैं ,सामाजिक कुरीतियां एवं अंधविश्वास मिटाने के लिए जागरूकता ज़रूरी है. जिसके लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा.

    समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता आवश्यक है यह केवल बौद्धिक चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के भविष्य, उसके स्वास्थ्य, उसकी आर्थिक स्थिरता और उसकी मानवीय गरिमा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
    डॉ. मिश्र ने विमतारा सभागृह में सामाजिक कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा पिछले 30 वर्षों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अंधविश्वास, विशेष रूप से टोनही प्रथा (डायन प्रथा) के खिलाफ काम करते हुए मैंने एक गहरी सच्चाई को बार-बार महसूस किया है अज्ञानता,गरीबी और जागरूकता की कमी से अंधविश्वास बनता और बढ़ता हैं ,और अफवाहें इनको मजबूत करते हैं। जहां संसाधनों की कमी होती है, वहां असुरक्षा बढ़ती है, और जहां असुरक्षा होती है, वहां भय पैदा होता है। यही भय अंधविश्वास का आधार बनता है।यह जानना जरूरी है कि गांवों में वैज्ञानिक सोच क्यों जरूरी है, आज भी जब किसी गांव में कोई बच्चा बीमार पड़ता है, तो कई परिवार सबसे पहले अस्पताल की ओर नहीं जाते, बल्कि बैगा-गुनिया या ओझा के पास जाते हैं। यह केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास प्रणाली का हिस्सा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। लेकिन इसका परिणाम अक्सर दुखद होता है ,इलाज में देरी, बीमारी का बढ़ना, और कई बार जान तक चली जाना।

    इसी तरह, जब कृषि या और कोई परिवारिक, निजी समस्या आती है, तो वैज्ञानिक कारणों—जैसे मिट्टी की उर्वरता, जलवायु परिवर्तन या बीज की गुणवत्ता, स्वयं की लापरवाही,की बजाय किसी व्यक्ति पर” जादू टोना” करने का आरोप लगाया जाता है। यह आरोप अक्सर महिलाओं पर लगता है, जिन्हें डायन घोषित कर दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होता है।
    हमारा संविधान, विशेष रूप से अनुच्छेद 51A(h), हर नागरिक को यह कर्तव्य देता है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करे। लेकिन केवल कानून बना देने से सोच नहीं बदलती। सोच बदलने के लिए संवाद, विश्वास और निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। इसलिए ग्रामीण अंचल में वैज्ञानिक सोच की आवश्यकता होती है.
    डॉ दिनेश मिश्र ने कहा
    पिछले वर्षों में काम करते हुए हमने कुछ महत्वपूर्ण बातें सीखी हैं, जो इस दिशा में काम करने वाले हर व्यक्ति और संगठन के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
    पहली बात कई बार भय तथ्यों से ज्यादा शक्तिशाली साबित होता है। जब कोई व्यक्ति डरा होता है, तो वह तर्क नहीं सुनता, वह समाधान खोजता है। इसलिए अगर हम सीधे यह कह दें कि “आप जो मानते हैं वह गलत है”, तो हम संवाद का रास्ता बंद कर देते हैं। इसके बजाय हमें पहले सुनना चाहिए, समझना चाहिए, और फिर धीरे-धीरे वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ओर ले जाना चाहिए।
    दूसरी बात,बताने से ज्यादा प्रभावी है करके दिखाना। जब हम “चमत्कारों” के पीछे के विज्ञान को सरल प्रयोगों के माध्यम से दिखाते हैं, तो लोग खुद निष्कर्ष निकालते हैं। जब एक ग्रामीण यह देखता है कि जो उसे चमत्कार लगता था, वह दरअसल एक साधारण वैज्ञानिक प्रक्रिया है, तो उसकी सोच में परिवर्तन आता है। यह परिवर्तन थोपे गए ज्ञान से नहीं, बल्कि अनुभव से आता है।
    तीसरी बात विज्ञान को जीवन और आजीविका से जोड़ना जरूरी है। अगर वैज्ञानिक सोच केवल किताबों तक सीमित रहे, तो उसका प्रभाव आसीमित रहेगा। लेकिन जब हम इसे खेती, स्वास्थ्य, वन प्रबंधन और आजीविका से जोड़ते हैं, तो इसका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, अगर एक परिवार ओझा के इलाज पर हजारों रुपये खर्च करता है, तो वही पैसा अगर स्वास्थ्य, शिक्षा या आजीविका में निवेश हो, तो उनका जीवन बेहतर हो सकता है।
    सामाजिक संगठन पहले से ही समुदायों के साथ गहराई से जुड़े हुए होते हैं। जो वनाधिकार, महिला सशक्तिकरण, आजीविका और स्थानीय शासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना कोई अलग या अतिरिक्त कार्य नहीं है, बल्कि यह आपके हर प्रयास की नींव को मजबूत करने का माध्यम है। वे इस दिशा में तीन महत्वपूर्ण और व्यावहारिक कदम उठा सकते हैं।हर प्रशिक्षण और बैठक में तर्कशीलता को शामिल करें। चाहे वह वनाधिकार कानून पर प्रशिक्षण हो, स्वयं सहायता समूह की बैठक हो या वनोपज प्रबंधन का सत्र—हर जगह “ऐसा क्यों होता है” जैसे सवालों को शामिल करें। केवल 10-15 मिनट का एक छोटा सत्र भी लोगों की सोच को प्रभावित कर सकता है।
    दूसरा स्थानीय स्तर पर विज्ञान संचारकों का निर्माण करें। गांव के युवा, आशा कार्यकर्ता, दाई या शिक्षक—ये सभी वैज्ञानिक सोच के वाहक बन सकते हैं। उन्हें सरल प्रयोगों और उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा सकता है, ताकि वे अपने समुदाय में वैज्ञानिक जानकारी को सहज और प्रभावी तरीके से साझा कर सकें।
    तीसरा अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया दें। जब किसी महिला को डायन घोषित किया जाता है या किसी व्यक्ति पर टोना-टोटका का आरोप लगाया जाता है और उसे प्रताड़ित किया जाता है, तो यह केवल एक सामान्य सामाजिक घटना नहीं होती, बल्कि यह पूरे, कानून व्यवस्था, शांति,विकास कार्य को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में कानूनी और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से तुरंत हस्तक्षेप करना आवश्यक है। इससे न केवल पीड़ित को न्याय मिलता है, बल्कि संगठन की विश्वसनीयता भी बढ़ती है।
    . डॉ दिनेश मिश्र ने कहा
    आने वाले वर्षों में हमारे सामने नई चुनौतियाँ होंगी। जलवायु परिवर्तन, नई बीमारियाँ, और डिजिटल माध्यमों से फैलने वाली अफवाहें—ये सभी सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों को प्रभावित करेंगी। अगर हम अभी से वैज्ञानिक सोच को मजबूत नहीं करते, तो हर नई समस्या के साथ नए अंधविश्वास जन्म लेंगे।
    डॉ मिश्र ने कहा जब आम लोग डर और भ्रम से मुक्त होकर तर्क और प्रमाण के आधार पर निर्णय लेने लगें। जब वे तथाकथित अदृश्य शक्तियों से डरने के बजाय दिखाई देने वाले तथ्यों पर सवाल उठाने लगें, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव है।
    इसलिए आवश्यक है कि “सोच बदलो, अंधविश्वासह टाओ” को केवल एक नारा न रहने दें, बल्कि इसे हर कार्यकर्ता और हर कार्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
    हमारे कार्यक्षेत्र अलग हो सकते हैं, हमारे तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारा उद्देश्य एक ही है—हमारे समाज के हर व्यक्ति को सम्मान, न्याय, वैज्ञानिक सोच और आत्मनिर्भरता दिलाना। हम मिलकर एक नई यात्रा शुरू करना चाहिए जहां एक हाथ में कानून हो और दूसरे हाथ में विज्ञान। जहां परंपरा और प्रगति के बीच संतुलन हो। जहां विश्वास तो हो, पर अंधविश्वास न हो, वह तर्क और ज्ञान पर आधारित हो। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अलावा दिल्ली,महाराष्ट्र, उड़ीसा मध्यप्रदेश के भी सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    पद्मश्री फूलबासन यादव के अपहरण की बड़ी साजिश…

    May 6, 2026

    19 जोड़े दाम्पत्य सूत्र में बंधे,मुख्यमंत्री कन्या विवाह में शामिल हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव…

    May 6, 2026

    इनोवेशन महाकुंभ 1.0 बस्तर को इनोवेशन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

    May 6, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.