पक्ष का राग- भारत की विदेश नीति ‘सरेंडर’ यानी आत्मसमर्पण! तीन विपक्षी नेताओं का राग- भारत की विदेश नीति ‘सही! सत्ता प्रवक्ता का राग- इनके लिए सब कुछ ‘बेजान’! अर्थव्यवस्था बेजान! ये बेजान… वह बेजान… सब बेजान! ‘प्रलय’ आ चुका है, फिर भी बचे हैं, तो ये ‘बेजान राग’ गाने वाले बचे हैं। फिर एक दिन विपक्ष का राग- ट्रंप से बातचीत में ‘मस्क’ और ‘मस्का’! जवाब में सत्ता पक्ष का राग- ट्रंप से बातचीत में ‘न मस्क… न मस्का’! फिर एक दिन विपक्षी नेता जी का ‘तू तड़ाक’- ट्रंप कहेगा कि कूदो, तो वह कूद जाएगा… ट्रंप कहेगा घुटने टेको, तो घुटने टेकेगा… क्योंकि उसके बारे में उनके पास बहुत कुछ है! एक चर्चक का कटाक्ष- इस भाषण से उनको कितने वोट मिल पाएंगे?
फिर विपक्ष के एक दल का अपने ‘आंख के तारे’ को राज्यसभा के नेता पद से हटाना। फिर एक नेता का ‘गब्बर डायलाग’ कि ‘(जो सत्ता से) डर गया, वो मर गया’! ये तो समोसे पिज्जा पर बोलते हैं, लेकिन सत्ता के खिलाफ बोलने से डरते हैं, ‘कंप्रोमाइज्ड’ हैं। हटाए गए नेता का जवाब- मैं दरिया हूं… वक्त आने पर सैलाब बनूंगा..! सभी को इंतजार है कि नेताजी अब बने सैलाब, लेकिन अब तक सिर्फ तालाब, कोई सैलाब नहीं।
इधर ये वाग्युद्ध जारी, उधर ‘अमेरिका-इजराइल बरक्स ईरान’ का ‘बम-बम’ जारी और ‘धारणा युद्ध’ जारी। ईरान का दावा कि अमेरिका के जेट हमने गिराए, एक ‘ब्लैक हाक गिरा दिया’… अमेरिकी जवाब कि हमने अपने पायलट छुड़ाए..! इस पर कुछ हिंदी चैनल ‘लहालोट’ होकर बोले कि देखा! अमेरिका अपने पायलटों को उठा भी ले गया, ईरान कुछ न कर सका… और अंकल सैम ‘बम बम’ कि अमेरिका की सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सेना। साथ ही अंकल सैम के बेलगाम और आपत्तिजनक बोल की शृंखला।
एक एंकर- एकदम सड़क छाप भाषा। अंकल सैम ‘नार्सीसिस्ट’। एक चर्चक ने कहा कि अंकल सैम ने तो अमेरिका की इज्जत का फलूदा बना दिया। फिर एक दिन अंकल सैम की चौबीस घंटे की चेतावनी कि या तो होर्मुज खोल दो, नहीं तो एक पूरी सभ्यता ‘नेस्तनाबूद’ हो जाएगी। मैं चाहता नहीं, लेकिन ये होगा। इस पर ईरान का जवाब आया कि हमारे इस्लामी लड़ाके तैयार… ‘मानव शृंखला’ बनाई..!
फिर एक खबर कि वार्ता जारी… फिर खबर कि कोई बातचीत नहीं…! फिर एक ‘ब्रेकिंग खबर’ कि युद्धविराम तो पाकिस्तान ने कराया, लेकिन दो-दो प्रस्ताव… एक अमेरिका का, दूसरा ईरान का। दोनों में फर्क… ईरानी प्रारूप में लेबनान शामिल… अमेरिकी प्रस्ताव में लेबनान बाहर। और खबर कि इजराइल ने लेबनान पर बम मारकर एक बड़ी इमारत उड़ाई, यानी युद्ध विराम के चिथड़े।
आहत दुनिया को थोड़ी राहत, फिर राहत भी आहत! ईरान का एलान कि होर्मुज से निकलने वाले प्रत्येक तेलवाहक जहाज से बीस लाख डालर फीस वसूली जाएगी। और इस पर ‘अंकल सैम’ की नई धमकी कि हमारी अंगुली अभी ‘ट्रिगर’ पर ही है..! फिर पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारी, जिसमें इजराइल नहीं रहने वाला। और इजराइल बिना कैसा युद्धविराम? युद्धविराम को लेकर अमेरिका पर एक चैनल की चोट- ‘बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले’। एक एंकर की लाइन- अंकल सैम का आत्मसमर्पण! कहां तो ‘पाषाण युग’ में भेज रहे थे, खुद कहां पहुंच गए। एक अमेरिकी प्रवक्ता- अंकल सैम ने इतिहास रचा… अमेरिका जीता… ईरान ने युद्धविराम की भीख मांगी। इसके बरक्स ईरानी प्रवक्ता- ईरान के आगे अमेरिका ने आत्मसमर्पण किया।
युद्धविराम के बाद विपक्ष का फिर से ‘पाक राग’ शुरू, कि देखो पाकिस्तान चौधरी बन गया। भारत कहां? विश्वगुरु कहां? छप्पन इंच का सीना कहां? भारत की विदेश नीति ‘समर्पण समर्पण’। पाकिस्तान चौधरी बना, तो वाह-वाह! भारत विश्वगुरु न बना तो हाय-हाय! पाकिस्तान ‘डाकिया डाक लाया’ तो वाह-वाह, भारत डाकिया न बना तो हाय-हाय! मगर अफसोस कि युद्धविराम शुरू होने से पहले ही खत्म! इजराइल लेबनान पर बम बरसाता रहा… युद्धविराम हिलता रहा।
एक दिन विपक्ष के प्रवक्ता का असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर तीन-तीन पासपोर्ट रखने का आरोप, उधर आरोपों का खंडन कि ये ‘पासपोर्ट नकली’ और आरोपकर्ता पर तुरंत एफआइआर… और मुख्यमंत्री के जवाब में बेलगाम जुबान का इस्तेमाल। फिर एक सुबह असम पुलिस और दिल्ली पुलिस की प्रवक्ता के घर धमक, लेकिन प्रवक्ता हैदराबाद… और अग्रिम जमानत की अर्जी।
फिर एक दिन ‘मालदा कांड’ पर सुप्रीम कोर्ट की बंगाल सरकार को कड़ी फटकार। चर्चा पर चर्चा कि मालदा ‘सोची-समझी साजिश’… कि इनकी साजिश कि उनकी साजिश..! बंगाल चुनाव में ‘डर’ का ‘कारोबार’ जारी..! बहरहाल, गुरुवार को असम, केरल और पुदुचेरी में रिकार्ड मतदान।

