HighLights
- विश्व क्षय रोग दिवस पर राष्ट्रपति का संदेश
- टीबी मुक्त भारत के लिए सभी से सहयोग की अपील
- लक्ष्य हासिल करने में गुजरात सबसे आगे
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों से भारत को क्षयरोग मुक्त बनाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की। इस दिशा में गुजरात सबसे आगे है, जिसने नीति आयोग के टीबी उन्मूलन लक्ष्य का 95% हासिल कर लिया है। वहीं, मेघालय सरकार ने अपने राज्य के 4500 क्षय रोगियों को गोद लेकर सौ दिन के सघन अभियान के तहत उन्हें सहायता प्रदान करने का कदम उठाया है, ताकि भारत को टीबी मुक्त बनाया जा सके।
विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इस दिन का उद्देश्य जनता को क्षय रोग के वैश्विक प्रभाव से अवगत कराना, इससे जुड़ी चुनौतियों को समझाना और इसके रोकथाम के प्रयासों को समर्थन देना है। उन्होंने कहा, “यह दिन हमें क्षय रोग की शीघ्र पहचान, उपचार और रोकथाम के महत्व की याद दिलाता है। मैं सभी नागरिकों से इस दिशा में मिलकर काम करने और भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करने की अपील करती हूं।”
विश्व क्षय रोग दिवस हर साल 24 मार्च को मनाया जाता है, जिस दिन 1882 में डॉ. रॉबर्ट कोच ने इस बीमारी का कारण बनने वाले जीवाणु की खोज की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत, भारत सरकार ने सितंबर 2022 में ‘निक्षय मित्र’ कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें निजी संगठनों और सिविल सोसाइटी को शामिल कर टीबी मरीजों को पोषण और उपचार में सहयोग दिया जा रहा है।
मेघालय ने इस पहल में एक कदम आगे बढ़ते हुए सभी टीबी मरीजों को गोद लेकर ‘यूनिवर्सल निक्षय मित्र’ बनने की घोषणा की है। इसी राज्य के ईस्ट खासी हिल्स जिले की 33 वर्षीय रिडालिन शुलाई, जो मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (एमडीआर-टीबी) से जूझ रही थीं, अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी हैं। बीमारी के कारण उनका बायां फेफड़ा बेकार हो गया था, लेकिन अब वे केवल दाएं फेफड़े के सहारे जीवन जी रही हैं, जो टीबी के खिलाफ जागरूकता और इलाज की सफलता का प्रमाण है।

