Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • कच्चे घर से पक्के आशियाने तक : पीएम जनमन आवास योजना ने सरिता बैगा के जीवन में भरी खुशियों की नई रोशनी
    • चिंतन शिविर 3.0 से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री
    • “बंगाल की जनता अपना फैसला दे चुकी है”, संजय झा ने साधा ममता बनर्जी पर निशाना
    • सफलता की कहानी-गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बना PHC चेरपाल
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 112 करोड़ से अधिक के कार्यों का करेंगे लोकार्पण-भूमिपूजन
    • डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: राष्ट्र प्रथम का अमर संदेश
    • जामुन खाकर न करें गुठली को फेंकने की गलती, इन 5 बीमारियों में मददगार
    • भारत की सबसे अनोखी ट्रेन, 145 साल से लगातार ढो रही है नमक
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Monday, July 6
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»संपादकीय»टॉलस्टॉय के बूढ़े दौड़ रहे हैं!…
    संपादकीय

    टॉलस्टॉय के बूढ़े दौड़ रहे हैं!…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJuly 5, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    टॉलस्टॉय की कहानी में एक बूढ़ा जमीन के अति लालच में दौड़ता रहा और अंत में गिरकर मर गया। महाराष्ट्र में शिंदे-फडणवीस टॉलस्टॉय के बूढ़े की तरह दौड़ पड़े हैं। वे भी गिरेंगे!’

    देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे जैसे राजनेताओं को नशामुक्ति केंद्र में भर्ती करना भारतीय लोकतंत्र और संविधान की जरूरत है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी ऐसे ही इलाज की जरूरत है, पर दिल्ली के ये दोनों नेता इलाज की सीमा पार कर चुके हैं। विधायक, सांसद खरीदने, पार्टी तोड़ने और फिर पत्रकार परिषद में रावण की तरह विकट हंसी हंसने का नशा इन्हें लग गया है। विधायक तोड़ो और पत्रकार परिषद में विकट-विकृत रूप से हंसते हुए दाढ़ी पर हाथ फेरो। ये बीमारी है। महाराष्ट्र में शिंदे की हालत टॉलस्टॉय की कहानी के उस लालची बूढ़े जैसी हो गई है। ये कहानी बकासुर जैसी है। एक छोटे गांव में रहने वाला बूढ़ा किसान ‘टांगा’ चलाकर गुजारा करता था। हमेशा असंतुष्ट रहता था। उसका मालिक उसे जितना भी देता था, उसे वह कम ही लगता था। जो है वो पर्याप्त नहीं, इस भावना से वह रातभर करवटें बदलता था। दूसरों की संपत्ति, जमीन-जायदाद देखकर मन ही मन जलता था। एक दिन उसे पता चला कि पास के गांव में बहुत सस्ती जमीन मिलती है। उसने अपना गांव छोड़ा और दूसरे गांव चला गया। उस गांव के मुखिया से मिला। उनकी शर्त अजीब थी। उन्होंने कहा, ‘‘एक दिन में तू जितनी जमीन नाप आएगा, उतनी तेरी। बस सुबह सूरज उगते ही चलना शुरू कर देना और सूरज डूबते ही यहीं लौट आना। जहां से चलना शुरू करेगा, वहीं वापस आना होगा। जितनी जमीन नापेगा उतनी तेरी।’’ लालची बूढ़ा खुश हो गया। वो मन में बोला, ‘‘एक दिन में इतनी जमीन हथिया लूंगा कि यहां का सबसे बड़ा जमींदार बन जाऊंगा।’’ अगले दिन सुबह सूरज निकलते ही वो चल पड़ा। लगा कि चलते रहने से नुकसान होगा, तो दौड़ने लगा। दौड़ने की रफ्तार मतलब ‘लालच’ बढ़ता गया। वो चारों तरफ पागलों की तरह दौड़ने लगा। और चाहिए, और चाहिए बोलते हुए वह दूर-दूर तक दौड़ता गया। दोपहर को उसने खाना भी नहीं खाया। खाना खाने के समय दौड़कर ज्यादा जमीन हासिल कर लूंगा, ऐसा उसे लगा। सूरज ढल गया। उसे लगा कि बहुत जमीन मिल गई। अब वापस लौटना होगा, पर अंधेरा बढ़ा, वो डर गया। वापसी में दौड़ने लगा। दिल की धड़कन बढ़ गई। पसीने की धाराएं बहने लगीं। पैर लड़खड़ाने लगे। फिर भी दौड़ा। आखिरी पल में किसी तरह गांव की सीमा पर आकर गिर पड़ा, पर वो मर चुका था।
    किसी को उसका पता मालूम नहीं था। गांव वालों ने उसे वहीं दफना दिया। उसके शरीर जितनी ही जमीन उसे मिली। छह फुट लंबी और दो फुट चौड़ी। टॉलस्टॉय का संदेश साफ है। सत्ता, संपत्ति, जमीन, विकास निधि, राजनीतिक करियर के लिए इंसान कितना भी दौड़े, धोखा करे। अंत में वो गिर पड़ता है। उसे बस छह फुट जमीन चाहिए।
    अति लालच इंसान को नष्ट कर देता है। एकनाथ शिंदे आजकल टॉलस्टॉय के बूढ़े की तरह दौड़ रहे हैं। शिंदे गिरेंगे तो मोदी, शाह, फडणवीस छह फुट जमीन भी नहीं देंगे।
    पवार ने सब दिया
    मोदी और शाह को देश के सारे राजनीतिक दल तोड़ने हैं। वो भी टॉलस्टॉय की कहानी के दौड़ते बूढ़े बन गए हैं। शिवसेना के छह सांसद तोड़े, अब विधायक सचिन अहिर चले गए। सचिन अहिर राष्ट्रवादी कांग्रेस से शिवसेना में आए (तोड़ दिए) तो किसी संत-सज्जन का काम आगे बढ़ाने के लिए नहीं। अहिर को पवार ने सब कुछ दिया। मान-सम्मान, सत्ता, सुरक्षा। फिर भी वो टूटे तो शिवसेना में खुशी का माहौल था। अहिर टूटे तब दिल्ली में संसद का अधिवेशन चल रहा था। अहिर टूटे और शिवसेना में आए, ये मैंने श्री पवार को बताया तो उनके चेहरे की बेचैनी मैंने महसूस की। ‘‘मैंने उसे क्या कुछ नहीं दिया था? सब कुछ दिया,’’ ऐसा वे बोले। बाद में कई दिन तक सार्वजनिक कार्यक्रमों में पवार सचिन अहिर की तरफ देखते तक नहीं थे। उनकी नजर में ये विश्वासघात था। वही विश्वासघात अहिर ने आदित्य ठाकरे के साथ किया। फडणवीस-शिंदे की राजनीति विश्वासघाती, बेईमान पैदा करने की है। इसलिए राज्य में विश्वासघात की फसल वो काट रहे हैं। रश्मी पुराणिक ने सोशल मीडिया पर इस विश्वासघात पर अपनी राय व्यक्त की है। वो सब पर लागू होती है। वो कहती हैं, ‘‘सचिन अहिर मुंबई राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष थे। २०१९ विधानसभा चुनाव से पहले अचानक सुबह उठकर वो शिवसेना में आ गए। तब राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ता तड़पकर बोले, सोते हुए, बेखबर इंसान के सिर पर पत्थर मारकर वो चले गए। आज वही पत्थर सुबह-सुबह बेखबर शिवसेना के सिर पर मारकर अहिर शिंदे गुट में चले गए। अहिर ने अपना रिकॉर्ड कायम रखा।’’ इसमें सचिन अहिर की गलती नहीं है। अहिर जैसे लोगों की वजह से राजनीति अटकती है और शिवसेना जैसे दल थमते हैं, ऐसा जिनको लगता है तो ये उनकी बड़ी भूल है। शिवसेना का संगठन आज भी मजबूत है और वो आयाराम-गयाराम जैसे लोगों के कारण नहीं, बल्कि आम जनता और शिवसैनिकों के समर्थन के कारण आज भी मजबूत है। सचिन अहिर की हार वर्ली विधानसभा में शिवसेना के सुनील शिंदे से हुई थी, तभी अहिर के राजनीतिक करियर पर पूर्णविराम लग गया था। पर शिवसेना ने अहिर को जीवनदान दिया, विधायक बनाया। वो अहिर आगे ठाकरे और शिवसेना के खिलाफ खड़े होंगे।
    व्यक्तिगत द्वेष
    एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र की राजनीति पूर्णत: बर्बाद करने निकले हैं। महाराष्ट्र कभी ऐसा नहीं था। एकनाथ शिंदे व्यक्तिगत द्वेष से ग्रस्त हैं और इस द्वेष में आग लगाने का काम निधि का पैसा शिंदे-फडणवीस खुद अपने खेत से पैदा करते हैं। बेईमानी को ये खुला बढ़ावा है। सचिन अहिर ३० जून को सुबह ११.३० बजे तक शिवसेना की बेंच पर बैठे थे। वहां से उठे और शिंदे गुट की तरफ से उपसभापति पद का पर्चा भरने निकले तब राज्य के मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्री इस बेईमान बारात में शामिल हो गए। छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की विरासत बताने वाले प्रगतिशील महाराष्ट्र को ये लोग क्या संदेश दे रहे हैं? महाराष्ट्र अब स्वाभिमानियों का नहीं रहा, बेईमान लोगों का हो गया है और सरकार इन बेईमानों के साथ मजबूती से खड़ी है।
    शिवसेना किसकी?
    एकनाथ शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना पर डाका डाल दिया। अमित शाह उस डाके के असली सूत्रधार हैं। शिंदे की विश्वासघात की राजनीति पैसों पर और अमित शाह के समर्थन पर चल रही है। इस अनैतिक कार्य पर वो हिंदुत्व का मुलम्मा चढ़ा रहे हैं। शिंदे पहले अपना दल बनाएं और फिर हिंदुत्व, स्वाभिमान की बात करें। शिवसेना का ६०वां स्थापना दिन शिंदे गुट ने मनाया। ये दिवालियापन है। उससे पहले अमित शाह ने कोल्हापुर के एक कार्यक्रम में शिंदे को एकमात्र शिवसेनाप्रमुख घोषित कर दिया और महाराष्ट्र, मराठी माणुस का मजाक उड़ाया। सच यह है कि शिंदे का एक गुट है और वो साढ़े तीन साल का है। दिल्ली के भाजपा नेताओं की ये नाजायज औलाद है। ये नाजायज औलाद महाराष्ट्र के स्वाभिमान के संस्कारों की जड़ उखाड़ रही है। अमित शाह को प्रधानमंत्री बनना है और एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना है। उनका रास्ता अनैतिक और भ्रष्ट है। वो दौड़ रहे हैं, दौड़ते रहेंगे।
    टॉलस्टॉय की कहानी में एक बूढ़ा था। भारत की राजनीति में बूढ़े बढ़ गए हैं। अभी दिल्ली में दो और महाराष्ट्र में भी दो हैं। उन्हें दौड़ते रहना चाहिए।
    जल्दी गिरने के लिए।
    टॉलस्टॉय की कहानी के बूढ़े की तरह ये सब गिरेंगे। वो दिन दूर नहीं।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    ये पाकिस्तान के पैरोकार 117 चेहरे…

    July 3, 2026

    चंदा-चढ़ावा कांड ‘बेनतीजा’

    July 1, 2026

     ईरान से समझौता संभव नहीं…

    June 30, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.