Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • आसंगी चेक डैम में नहाने के दौरान डूबे 2 बच्चे…दर्दनाक मौत
    • दल्लीराजहरा थाना क्षेत्र में एक बड़ा सड़क हादसा टला स्टेयरिंग फेल होने से बस रेलवे ट्रैक पर गिरी…
    • बारहवीं कक्षा की हिंदी विषय की पुनः परीक्षा शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सफलतापूर्वक आयोजित 
    • भात खा गई बकरी, दो भाइयों में जमकर हुई मारपीट, एक की मौत… 6 घायल
    • पत्थर गिरने/भूस्खलन का खतरा, J&K में वाहन चालकों के लिए अहम खबर… 
    • खाई में गिरी ट्रैक्टर-ट्रॉली, 3 श्रद्धालुओं की मौत, 15 घायल
    • भाभी कमल कौर की मां ने कर दिए बड़े खुलासे, अमृतपाल मेहरों गिरफ्तार
    • किसी बात को लेकर बहस, पत्थर से पति का सिर कुचला, फिर पूरी रात शव के पास बैठी रही
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Friday, April 10
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»संपादकीय»दो हफ्ते का युद्धविराम और आगे…
    संपादकीय

    दो हफ्ते का युद्धविराम और आगे…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inApril 9, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    कयामत की रात, बिना कयामत के ही, गुजर गई और एक सभ्यता भी खत्म होने से बच गई। ईरान की 5-6 हजार साल पुरानी सभ्यता को खत्म भी नहीं किया जा सकता था, बेशक अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप कुछ भी बयान दें। सिकंदर और मंगोल शासक भी ईरान की सभ्यता को खत्म नहीं कर पाए। बहरहाल सभ्यता खत्म करने की ‘डेडलाइन’ से पहले ही, 8 अप्रैल की भोर में, युद्धविराम की घोषणा कर दी गई। युद्धविराम फिलहाल दो सप्ताह तक रहेगा। यह घोषणा करने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने फोन पर इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बातचीत की। अंतत: नेतन्याहू को ट्रंप का फैसला स्वीकार करना पड़ा। ईरान युद्ध के 40वें दिन युद्धविराम हो सका है। अब अमरीका-ईरान के प्रतिनिधि 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में बातचीत करेंगे और बृहद् शांति-समझौते की जमीन तैयार करेंगे। अब वैश्विक सवाल और जिज्ञासा है कि क्या युद्ध का यह दौर स्थायी रूप से खत्म होगा? क्या अमरीका अपनी सेना को वापस बुला लेगा? क्या इजरायल ईरान का अस्तित्व मिटाने के अपने पुराने लक्ष्य और मंसूबे को हासिल करने के लिए युद्ध की फिर शुरुआत करेगा? बेशक राष्ट्रपति टं्रप इस अस्थायी युद्धविराम को ही ‘मुकम्मल जीत’ मान रहे हैं, विश्व शांति का सबसे बड़ा दिन कह रहे हैं और इसे मध्य-पूर्व के ‘स्वर्ण-युग’ का दिन भी करार दे रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि 39 दिन के युद्ध में वह पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

    ईरान में कट्टरपंथी हुकूमत बदलने, परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने, बैलिस्टिक मिसाइल के उत्पादन पर अंकुश लगाने, होर्मुज स्टे्रट को खुलवाने, ईरानी सेना को नेस्तनाबूद करने, ईरान में बगावत और सत्ता-परिवर्तन कराने, तेल पर कब्जा करने के जो अमरीकी, घोषित मंसूबे थे, राष्ट्रपति ट्रंप उनमें नाकाम रहे हैं। सभ्यता-विध्वंस की डेडलाइन से पहले ही उन्हें ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव स्वीकार करना पड़ा, क्योंकि प्रस्ताव व्यावहारिक लगा। अब दो हफ्तों तक हमले नहीं किए जाएंगे। दोनों देश दीर्घकालीन शांति-समझौते पर बातचीत करेंगे। दरअसल इस युद्ध में, युद्धविराम तक, न तो अमरीका जीता और न ही ईरान पराजित हुआ है। सिर्फ बर्बादी, विध्वंस और मिट्टी-मलबे की जीत हुई है। युद्ध के 39 दिनों में ईरान वाकई ‘कब्रिस्तान’ बना दिया गया, लेकिन उसका योद्धा वाला चरित्र, मनोबल और अस्तित्व आज भी जिंदा है। ईरान परमाणु कार्यक्रम जारी रखेगा, यूरेनियम का संवद्र्धन भी करता रहेगा, लेकिन बम नहीं बनाएगा, यह आश्वासन संवाद के दौरान ईरान दे सकता है। चीन ने ‘वास्तविक मध्यस्थ’ की भूमिका निभाई और ईरान के सख्त, अडिय़ल रवैये को नरम कराया और युद्धविराम के लिए तैयार किया। ईरान युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने की अमरीकी गारंटी चाहता था। इस्लामाबाद इसलिए चुना गया, क्योंकि वह ईरान को भी पास पड़ता है और पाकिस्तान अमरीका का ही ‘उपनिवेश-सा’ है।

    पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्र की भूमिका ‘डाकिए’ या ‘संदेशवाहक’ की रही। अमरीकी उपराष्ट्रपति वेंस संवाद के लिए इस्लामाबाद जाएंगे, तो कोई चाय-पानी पिलाने वाला भी चाहिए। बहरहाल अमरीका युद्धविराम के लिए अचानक तैयार हो गया, इसकी अंदरूनी स्टोरी एफबीआई की रपट भी हो सकती है। एफबीआई ने रपट दी थी कि अब विश्व में अमरीकियों के लिए हालात खतरनाक हो सकते हैं। उनकी हत्याएं भी की जा सकती हैं, लिहाजा युद्ध को आगे न बढ़ाया जाए। जमीनी युद्ध की तो शुरुआत तक न की जाए। संभवत: इस रपट ने राष्ट्रपति ट्रंप को ‘सद्बुद्धि’ दी और वह युद्धविराम के लिए सहमत हो गए। बहरहाल यह युद्धविराम ही अंतिम, निर्णायक स्थिति नहीं है, क्योंकि कई मुद्दे अनसुलझे लगते हैं। मसलन-होर्मुज पर ईरान ने अपने और ओमान के कब्जे की बात कही है और वे जहाजों से 20 लाख डॉलर प्रति जहाज का ‘टोल’ भी वसूलेंगे। अमरीका अब भी होर्मुज पर अपनी उपस्थिति की पैरवी कर रहा है, जो ईरान को स्वीकार्य नहीं है। बहरहाल युद्धविराम पर विश्व की प्राथमिक प्रतिक्रियाएं सुखद हैं। कच्चे तेल की कीमत 9 फीसदी लुढक़ कर 92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। एशिया और यूरोप के बाजार तेजी के साथ खुले हैं।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    ‘कहीं पिता, कहीं पति तो कहीं संतान की हत्या’ मारे जा रहे अपने!

    April 10, 2026

    ’नकली दवाओं का फैलता कारोबार!…

    April 7, 2026

    2 अमरीकी युद्धक विमानों को ईरान ने अपनी ‘सस्ती’ तकनीक से मार गिराए

    April 6, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.