हाईलाइट्स
- सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के चलते नक्सल संगठन में हुआ बड़ा बदलाव।
- एकमात्र बटालियन को छोटे समूहों में विभाजित किया गया, कंपनी और प्लाटून स्तर पर भी बदलाव।
- स्थिति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बलों ने 10 से अधिक अग्रिम चौकियों की स्थापना की।
नक्सल संगठन में बड़े बदलाव, सुरक्षा बलों का दबदबा बढ़ा
जगदलपुर: सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सल संगठन में बड़े फेरबदल हुए हैं। बस्तर में सक्रिय देश की इकलौती नक्सल बटालियन को छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर दिया गया है। अब नक्सली गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपना रहे हैं, जबकि पहले वे गर्मियों में बड़े हमले करते थे।
बस्तर में मार्च से जून के बीच की अवधि को नक्सली “टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी)” कहते हैं। इसी दौरान जंगल की बढ़ी हुई दृश्यता का फायदा उठाकर वे बड़े हमले करते थे। 2010 में ताड़मेटला हमले में 76 जवान, 2017 में बुरकापाल हमले में 32 जवान, और 2021 में टेकुलगुड़ेम मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हुए थे। लेकिन इस बार स्थिति बदली हुई है।
सुरक्षा बलों की सख्ती और नक्सलियों का आत्मसमर्पण
राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के चलते कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिससे उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। शांति स्थापित होने से विकास कार्यों में भी तेजी आएगी।
14 महीने में 304 नक्सली ढेर, 34 नई चौकियां स्थापित
पिछले 14 महीनों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाते हुए 304 नक्सलियों को मार गिराया और 34 नई अग्रिम चौकियां स्थापित की हैं। इससे नक्सली यह मानने लगे हैं कि अब टीसीओसी का लाभ सुरक्षा बल भी उठा सकते हैं और उनके संगठन को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नक्सलियों के गढ़ पर सुरक्षा बलों का कब्जा
पिछले एक साल में सुरक्षा बलों ने सुकमा और बीजापुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सलियों के सबसे मजबूत ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। जहां कभी नक्सलियों का दबदबा था, वहां अब टेकुलगुड़ेम, पूवर्ती, तर्रेम, गुंडेम, कोंडापल्ली, जिड़पल्ली और वाटेवागु समेत 10 से अधिक नई सुरक्षा चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं।
छोटे समूहों में बंटकर नक्सली रच रहे हमले की साजिश
अब नक्सली अपनी रणनीति बदलकर स्मॉल एक्शन ग्रुप्स में बंटकर हमले करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार हैं और टीसीओसी के दौरान नक्सल विरोधी अभियानों को और आक्रामक किया जाएगा।
“गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपना सकते हैं नक्सली” – पूर्व डीजीपी आर.के. विज
छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक आर.के. विज का मानना है कि सुरक्षा बलों की स्थिति अब जंगलों में मजबूत हो गई है। अभियानों में नक्सलियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है, इसलिए वे अब गुरिल्ला युद्ध की रणनीति के तहत छोटे समूहों में हमले की योजना बना सकते हैं। गुरिल्ला युद्ध में छोटा समूह भी बड़ा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है, इसलिए सतर्कता बनाए रखना जरूरी होगा।

