Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • बरगद की छांव में सजी मुख्यमंत्री की चौपाल : सक्ती जिले के ग्राम ठठारी में ग्रामीणों से किया सीधा संवाद
    • धमतरी; आंगनबाड़ी भवन की छत पर मिला युवक का शव, संदिग्ध मौत से गांव में सनसनी…
    • आम की छांव में मुख्यमंत्री की चौपाल: खाट पर बैठे, ग्रामीणों की सुनी बात, मौके पर दिए समाधान
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ऐतिहासिक चतुर्भुज विष्णु मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना
    • सुशासन तिहार से किसान निर्मल राम को मिली आर्थिक मजबूती, बना किसान क्रेडिट कार्ड
    • जब बंदूक छूटी, तो हाथों में आया सुनहरा भविष्य : सुकमा में आत्मसमर्पित युवाओं की जिंदगी लिख रही विकास की नई कहानी
    • दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने शिक्षा प्रणाली में धांधली के खिलाफ किया एक बड़ा विरोध प्रदर्शन…
    • ‘डायन मंदिर’ का रहस्य, जहां अंधेरा होने के बाद घूमती हैं चौसठ योगिनियां, जाने से कतराते हैं लोग
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, June 6
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»राष्ट्रीय»तुम किस तरह के बेटे हो…अपने ही पिता से लड़ रहे हो?, पिता के खिलाफ कोर्ट पहुंचा बेटे को SC ने लगाई फटकार
    राष्ट्रीय

    तुम किस तरह के बेटे हो…अपने ही पिता से लड़ रहे हो?, पिता के खिलाफ कोर्ट पहुंचा बेटे को SC ने लगाई फटकार

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 6, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    राजस्थान, सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत एक पिता की संपत्ति से बेटे को बेदखल करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें पिता के पक्ष में बेदखली का आदेश दिया गया था।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए बेटे को कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तुम किस तरह के बेटे हो? अपने ही पिता से लड़ रहे हो? यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जाओ और अपने पिता की देखभाल करो। उनके जीवन का जितना भी समय बचा है, उन्हें शांति से जीने दो। जब याचिकाकर्ता के वकील वरुण भाटी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का भी इस विवादित संपत्ति पर अधिकार है, तो जस्टिस नाथ ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि नहीं, अगला केस। वकील ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के ऊपर अपनी पत्नी और बेटे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है, लेकिन अदालत ने इस मामले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया।

    क्या है पूरा विवाद?

    यह मामला राजस्थान के बिलाड़ा स्थित एक आवासीय संपत्ति से जुड़ा है। पिता ने भरण-पोषण न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि उनका बेटा उन्हें परेशान करता है। पिता ने अपने ही घर में शांति से रहने के लिए सुरक्षा की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने फरवरी 2024 में पिता की अर्जी को स्वीकार करते हुए बेटे को घर खाली करने का आदेश दिया था। बाद में राजस्थान हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच और फिर डिवीजन बेंच ने भी इस आदेश पर मुहर लगा दी थी।

    पैतृक संपत्ति पर मेरा भी हक

    सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में बेटे ने दावा किया कि यह घर एक पैतृक और अविभाजित पारिवारिक संपत्ति है, जिसे मूल रूप से 1986 में उसकी दादी के नाम पर खरीदा गया था। उसका तर्क था कि दादी के निधन के बाद यह संपत्ति कई कानूनी उत्तराधिकारियों को मिल गई, इसलिए इसे केवल उसके पिता की निजी संपत्ति नहीं माना जा सकता। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सालों से वहां रह रहा है और संपत्ति में उसका भी हक है। घर खाली करने के आदेश से उसके परिवार से उनका एकमात्र निवास छिन गया है। वरिष्ठ नागरिक अधिनियम का इस्तेमाल संपत्ति के मालिकाना हक और विरासत जैसे जटिल पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए दीवानी अदालत के विकल्प के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना कोई तर्क

    याचिका में इस बेदखली के कारण याचिकाकर्ता की पत्नी और बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता जताई गई थी। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या संपत्ति के मालिकाना हक का विधिवत फैसला हुए बिना किसी सह-मालिक को इस तरह की संक्षिप्त कार्यवाही के जरिए घर से निकाला जा सकता है? हालांकि, सुप्रीम कोर्ट को राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई ठोस आधार नजर नहीं आया। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए वरिष्ठ नागरिक पिता के पक्ष में दिए गए बेदखली के आदेश को अंतिम रूप से सही ठहराया।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    गुजरात सरकार ने अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर मलिक को बनाया नया डीजीपी

    June 6, 2026

    E-85: बढ़ती महंगाई के बीच बड़ी खबर, पेट्रोल 20 रुपए सस्ता

    June 6, 2026

    अंडमान के पास मिला प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दी जानकारी

    June 6, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.