चीनी की कीमतों में तेजी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की मंजूरी दे दी है। इस फैसले का असर शेयर बाजार में शुगर कंपनियों के शेयरों पर दिखा और शुक्रवार को शुरुआती ट्रेडिंग में कई शेयरों में तेज गिरावट आ गई। चीनी की खुदरा कीमतें करीब 70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई हैं।
सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर डालमिया भारत शुगर (Dalmia Bharat Sugar) का शेयर सबसे ज्यादा टूटा। यह 5.47 फीसदी गिरकर 480.30 रुपये पर आ गया। द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज (Dwarikesh Sugar Industries) में 4.32 फीसदी की गिरावट देखने को मिली, जिससे शेयर 52.99 रुपये पर आ गया। वहीं, बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Chini Mills) का शेयर 4.15 फीसदी गिरकर 735.25 रुपये पर और त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज (Triveni Engineering & Industries) का शेयर 3.82 फीसदी की गिरावट के साथ 288.60 रुपये पर ट्रेड करता दिखा।
इन शुगर शेयरों में भी आई गिरावट
अन्य चीनी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। उत्तम शुगर मिल्स का शेयर 3.07 फीसदी गिरकर 325.90 रुपये रह गया। EID Parry के शेयर में 2.22 फीसदी की गिरावट रही और यह 792.30 रुपये पर ट्रेड करता दिखा। धामपुर शुगर मिल्स का शेयर भी 1.99 फीसदी गिरकर 185.99 रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह अवध शुगर एंड एनर्जी का शेयर 1.53 फीसदी गिरकर 802.20 रुपये पर, बजाज हिंदुस्तान शुगर 1.41 फीसदी गिरकर 23 रुपये पर और श्री रेणुका शुगर्स का शेयर 1.03 फीसदी गिरकर 25.86 रुपये रह गया।
सरकार ने क्यों लिया ड्यूटी फ्री चीनी आयात का फैसला?
सरकार का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों को काबू में करना है। भारत आमतौर पर चीनी के आयात पर 100 फीसदी शुल्क लगाता है, लेकिन इस बार 10 लाख मीट्रिक टन चीनी को बिना शुल्क आयात करने की अनुमति दी गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। उत्पादन में कमी और सप्लाई पर दबाव के चलते पिछले दो महीनों में चीनी के दाम करीब 40 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। करीब एक दशक बाद भारत ने चीनी के बड़े पैमाने पर आयात का रास्ता खोला है। सरकार की कोशिश है कि बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आए और कीमतों पर तेजी पर ब्रेक लगे।
सरकार ने लगाई है स्टॉक लिमिट
चीनी की कीमतों को काबू करने के लिए सरकार ने इस सप्ताह एक और कदम उठाया था। बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा सख्त कर दी गई है। जिन डीलरों की मासिक खपत 10 मीट्रिक टन से ज्यादा है, उन्हें अब अधिकतम 15 दिनों की खपत के बराबर ही स्टॉक रखने की अनुमति होगी। यह नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा।
चीनी कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है असर
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, सरकार द्वारा ड्यूटी फ्री चीनी आयात को अनुमति देने से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है। अगर सप्लाई बढ़ती है तो कीमतों पर दबाव आना तय माना जा रहा है। इसका सीधा असर चीनी कंपनियों की बिक्री कीमत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने शुगर शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी। हालांकि, वैश्विक बाजार में तस्वीर कुछ अलग रही। भारत के अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा सक्रिय होने की खबर के बाद लंदन में व्हाइट शुगर फ्यूचर्स और न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स में करीब 4 फीसदी तक तेजी देखने को मिली। भारत का आयात बढ़ने की संभावना ने ग्लोबल मार्केट में मांग बढ़ने की उम्मीद पैदा कर दी।

