Chaturmas 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी होती है. इस दिन भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और वे चार माह तक शयन करते हैं. देवशयनी एकादशी के दिन से चातुर्मास का प्रारंभ होता है. प्रश्न यह है कि देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास में भगवान विष्णु कहां सोते हैं? फिर उनकी नींद कब खुलती है? इसके संंबंध में एक रोचक कथा है.
4 महीने कहां सोते हैं भगवान विष्णु?
चातुर्मास के समय भगवान विष्णु अपने लोक को छोड़कर पाताल लोक में चले जाते हैं. वहां पर वे राजा बलि के यहां योग निद्रा में रहते हैं. दरअसल भगवान विष्णु ने वामन अवतार में जब 3 पग में राजा बलि से आकाश, धरती समेत सबकुछ ले लिया, तो उन्होंने प्रसन्न होकर बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और कहा कि कलियुग के अंत तक वहां पर निवास करना.
भगवान विष्णु की आज्ञा पाकर राजा बलि ने एक इच्छा प्रकट की. उन्होंने कहा कि पाताल लोक में वह हर दिन जब भी सोकर उठे तो आपके साक्षात् दर्शन हों और आप शत्रुओं से हमारी रक्षा करें. भगवान विष्णु ने उसे वरदान दे दिया और उनके साथ ही पाताल लोक चले गए.
उधर वैकुंठ लोक में माता लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की प्रतीक्षा कर रही थीं. काफी समय बीतने बाद भी जब श्रीहरि वैकुंठ लोक नहीं गए तो माता लक्ष्मी और सभी देवी-देवता चिंतित हो गए. तब नारद जी ने सारी बात बताई और भगवान विष्णु को पाताल से वापस लाने का उपाय बताया.
उनकी बात मानकर माता लक्ष्मी राजा बलि के पास पाताल लोक गईं. उन्होंने राजा बलि को अपना भाई बना लिया और उनसे भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ लोक भेजने का वचन लिया.
राजा बलि ने भगवान विष्णु को उनके वचन से मुक्त कर दिया ताकि वे वैकुंठ वापस जा सकें. तब भगवान विष्णु ने राजा बलि से कहा कि वे 4 माह तक पाताल में निवास करेंगे. इस तरह से हर साल चातुर्मास में भगवान विष्णु पाताल लोक में निवास करते हैं.
इस दिन योग निद्रा से बाहर आएंगे भगवान विष्णु
कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि यानि देवउठनी एकादशी के दिन चातुर्मास का समापन होता है. इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से बाहर आते हैं और सृष्टि के संचालन का कार्यभार संभालते हैं.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

