हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता अंजनी ने भगवान हनुमान को ‘सुंदर’ नाम दिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि हनुमानजी उनके द्वारा की गई भगवान शिव की कृपा और तपस्या का सबसे सुंदर फल थे। यही कारण है कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ के पांचवें कांड का नाम ‘सुंदर कांड’ रखा गया है। यह कांड हनुमानजी को ही समर्पित है जिसमें 68 खंड है। ज्योतिषों की माने सुंदर कांड को पढ़ने के लिए सप्ताह के दो दिन-मंगलवार और शनिवार शुभ माना गया है। पर क्या आप सुंदर कांड पढ़ने के नियम और इसके लाभ जानते है? चलिए आपको बताते है।
सुंदर कांड को पढ़ने के नियम (Sunderkand Path Rules)
- नारंगी, लाल या केसरिया रंग का वस्त्र धारण करें।
- साफ लाल कपड़े पर हनुमानजी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह कर के बैठे।
- फूल, सिंदूर, केले और मिठाई चढ़ाएं।
- सुंदर कांड पढ़ने से पहले संकल्प लें। हाथ में पानी लें और मन में पढ़ने का कारण बताएं।
- हनुमानजी मंत्रों का जाप करें और फिर सुंदर कांड का पाठ शुरू करें।
- अगर हो सके तो एक ही बार में पाठ पूरा करें।
- हनुमानजी की आरती के साथ खत्म करें।
- पाठ पढ़ने के बाद किताब को खुला न छोड़े।
सुंदर कांड पढ़ने के क्या होते है लाभ (Sunderkand Path Benefits)
- माना जाता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से बाधाएं दूर होती हैं और आंतरिक शक्ति आती है।
- हनुमान जी, जिन्हें संकट मोचन (कष्टों को दूर करने वाला) भी कहा जाता है, भक्तों को शांति और सुरक्षा का आशीर्वाद देते हैं।
- ये श्लोक निस्वार्थ सेवा, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की प्रेरणा देते हैं।
- ऐसा कहा जाता है कि रोजाना सुंदरकांड सुनने से मन शुद्ध होता है और जीवन में ईश्वरीय कृपा आती है।
सुंदरकांड से मिलता है धार्मिक लाभ
हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूूर्ण करने वाली मानी गई है। बजरंगबली बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं। शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय सुंदरकांड का पाठ करना है। सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शुभ अवसरों पर सुंदरकांड का पाठ ही क्यों?
ज्योतिषों का मानना है कि अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरूआत से पहले सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा कष्ट हो, कोई काम नहीं बन पा रहा है, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं, कई ज्योतिषी या संत भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकांड करने की सलाह देते हैं।
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

