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    Home»लेख-आलेख»महात्मा गांधी और पंडित नेहरू आज की राजनीति में ‘विलेन’ क्यों?…
    लेख-आलेख

    महात्मा गांधी और पंडित नेहरू आज की राजनीति में ‘विलेन’ क्यों?…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 22, 2026
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    स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के योगदान को कम करके नहीं देखा जा सकता। पता नहीं आज के तथाकथित राजनेता उन्हें गालियां क्यों देने लगे हैं? आज की पीढ़ी तो इन दोनों महापुरुषों के नाम और काम को भूल चुकी थी, देश के तथाकथित नेताओं ने उन्हें पुन: जिंदा कर दिया, परन्तु जिंदा उन्हें ‘विलेन’ के रूप में किया गया है, जिस पर मुझे ऐतराज है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आजादी हासिल करने की कई समांतर लहरें चल रही थीं। परन्तु आजादी की जंग में शांति, अहिंसा, असहयोग और सत्याग्रह का शस्त्र उठा महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल लड़ रहे थे। किसे कम या अधिक कहें? आजादी की सभी लहरों का एक ही उद्देश्य था, ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’।

    आजादी की किस लहर का योगदान कम था? अंग्रेज यूं ही नहीं गया भारत को छोड़कर। उसने हिंदुस्तान को धर्म के नाम पर 2 टुकड़़ों में बांट कर यहां से सदा के लिए चले जाने की ठान ली, जिसमें वह सफल रहा और हमने रूआंसे मुंह भारत को एक ‘स्वतंत्र मुल्क’ मान कर सिर झुका लिया। आज के तथाकथित नेता जो महात्मा गांधी को देश की सारी समस्याओं का मूल कारण मानते हैं, उन्हें पता ही नहीं कि महात्मा गांधी ने मोहम्मद अली जिन्ना के आवास पर जाकर उन्हें रोका कि पाकिस्तान की मांग छोड़ दो, यदि तुम देश का प्रधानमंत्री ही बनना चाहते हो तो इंडियन नैशनल कांग्रेस तुम्हें हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री बनाने को तैयार है। परन्तु मोहम्मद अली जिन्ना टस से मस न हुए और देश बंट गया।

    महात्मा गांधी या पंडित जवाहर लाल नेहरू देश-विभाजन के कहां दोषी हुए? इतिहास जैसा है उसे वैसा ही रहने दिया जाए। नेता जी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, शहीद-ए-आजम भगत सिंह, स. ऊधम सिंह, पंडित नेहरू, स. पटेल और महात्मा गांधी सभी आजादी के परवाने थे। आजादी की फिलॉसफी गढ़ी लाल, पाल, बाल और गोपाल कृष्ण गोखले ने। आज के राजनेता आजादी का श्रेय किसी एक आजादी के परवाने को न दें। जिसने भी कुछ किया, अच्छा किया।

    79 साल के बाद अपने पूर्वजों को कोसना, उन्हें देश की सारी समस्याओं के लिए दोषी ठहराना, अनुचित है। हमें अपने पूर्व नेताओं के प्रति नफरत नहीं, बल्कि आदर का भाव जागृत करना चाहिए। यूं ही देश में गढ़े मुर्दे मत उखाड़ो। नेहरू नए भारत के निर्माता हैं। गांधी इस देश के नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे। उनका ‘चरखा’ तो प्राचीन संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। महात्मा गांधी ने एक ही लंगोटी में जिंदगी काट दी। यहां तक कि ‘इंगलैंड गोलमेज कांफ्रैंस’ में भी एक लंगोटी और एक धोती में गए। महात्मा गांधी को ‘महात्मा’, ‘बापू’, ‘राष्ट्रपिता’ के अलंकार यूं ही नहीं मिले। महात्मा गांधी ने कलह हिंसा, अन्याय, अत्याचार तथा शोषण के निवारण के लिए अहिंसा का सहारा लिया। सत्याग्रह द्वारा दूसरे व्यक्ति के हृदय में सत्य के प्रति सम्मान जगा कर उसे देशहित में लाना ही उनका प्रमुख उद्देश्य था। 

    सत्याग्रही झूठी प्रतिष्ठा के चक्र में अपने सत्य मार्ग को त्यागता नहीं। उपवास, असहयोग, सविनय अवज्ञा द्वारा सत्याग्रह को पवित्र बनाया जा सकता है। चरखे के पीछे की भावना थी कि हम सादा खाएं, सादा पहनें और अहं को छोड़ समाज में शांति से विचरण करें। अपने जीते जी उन्होंने कष्ट, आलोचना निंदा का हंसते-हंसते सामना किया, किसी के प्रति भी घृणा का भाव नहीं। महात्मा गांधी की ‘आत्म विजय’ की भावना से मनुष्य मन, इंद्रियों, शरीर, बुद्धि पर नियंत्रण कर सकता है। घृणा और भय को त्यागने से ही सत्य के दर्शन हो सकते हैं। महात्मा गांधी ईश्वरभक्त थे। वह सभी धर्मों का सत्कार करते थे। ‘धर्म परिवर्तन’ को गांधी जी अनुचित समझते थे। मानव सेवा ही परम धर्म है। राजनीति धर्म की दासी है, स्वामिनी नहीं। धर्म राजनीति को पवित्र बनाता है। राम, सीता, राम चरित मानस, महात्मा गांधी के आदर्श थे। पहले विश्व युद्ध में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों से सहयोग किया, परन्तु युद्ध समाप्ति पर अंग्रेजों ने ‘रोलेट एक्ट’ जैसा भारत विरोधी एक्ट पास कर स्थानीय लोगों पर जुल्म ढहाने शुरू कर दिए। इसीलिए महात्मा गांधी ने दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों का विरोध किया। 

    महात्मा गांधी अथाह सागर की भांति बड़े विस्तृत तथा अहम थे। गांधी ‘महात्मा’ इसलिए थे कि वह दूसरों के लिए जिए, दूसरों के हाथों मरे भी। वह भारत के सच्चे प्रतिनिधि थे। ‘बिड़ला हाऊस’ में लखपतियों के बीच रहकर भी गांधी जी की सोच सदा गरीबों के हित में रही। उन्होंने हमेशा रेलवे के तीसरे दर्जे में यात्रा की। राष्ट्र की गति, स्थिति, कृति और मति में उनका विलक्षण योगदान है। गांधी हमेशा मानवता की रक्षा में खड़े रहे। आज का नेता पंडित नेहरू पर भी तरह-तरह के आरोप लगा रहा है। उनके लार्ड माऊंटबेटन की पत्नी के साथ आंतरिक रिश्ते थे। कश्मीर समस्या नेहरू की देन है। उनकी कश्मीर घाटी के नेता शेख अब्दुल्ला से मित्रता थी। इत्यादि-इत्यादि। परन्तु उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि पंडित नेहरू आधुनिक भारत के नव-निर्माण में विश्वास रखते थे। औद्योगिक क्षेत्र में भारत को दुनिया के नक्शे पर देखना चाहते थे। नेहरू एक फिलॉसफी थे। अपने ऐसे नेताओं को कोसने, उन्हें गाली देने से देश का हित नहीं होगा। आज का नेता गांधी और जवाहर से आगे निकल कर बताए, अपने को गांधी और नेहरू बनाए।-मा. मोहन लाल

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