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    Home»धर्म आस्था»सनातन परपरा में 108 दानें ही क्यों होते हैं जप माला में?जानें इस संख्या का महत्व
    धर्म आस्था

    सनातन परपरा में 108 दानें ही क्यों होते हैं जप माला में?जानें इस संख्या का महत्व

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJanuary 11, 2026
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    सनातन परंपरा में 108 की संख्या को अत्यंत ही पवित्र और महवपूर्ण माना गया है। यही कारण है कि भगवान के लिए जप करने वाली माला हो या फिर उनकी महिमा का गुणगान करने वाले नाम, उसके लिए 108 संख्या को पुण्यदायी माना गया है। हिंदू धर्म में किसी भी मान्यता या परंपरा के पीछे कोई न कोई ठोस कारण अवश्य होता है। वृंदावन के अखंड दया धाम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद जी महाराज के अनुसार 108 की संख्या की तो इसमें 0 निर्गुण निराकार ब्रह्म का प्रतीक है तो वहीं 1 परमपिता परमेश्वर के एक होने का प्रतीक है, फिर चाहे वह त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में दिखाई देता हो। वहीं 8 अंक में पूरी प्रकृति यानि पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, तेज, मन, बुद्धि और अहंकार समाहित है। 

    108 की संख्या का शिव से संबंध 

    हिंदू मान्यता के अनुसार 108 की संख्या कोई साधारण संख्या नहीं हैं। देवों के देव महादेव से इस पावन संख्या का विशेष रूप से जुड़ाव है। हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव का रूप अत्यंत ही कल्याणकारी माना गया है, इसलिए उनके गुणों का गान करने के लिए उनके 108 नाम पूजा के दौरान विशेष रूप से लिए जाते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार यह नाम सबसे पहले ब्रह्मा जी ने लिए थे जब भगवान शिव ने सृष्टि रचना से पहले बाल रूप में अवतार लिया था। मान्यता है कि जब शिव जी का बाल रूप में प्रकट हुए तो उन्होंने रुदन करना प्रारंभ कर दिया।

    तब ब्रह्मा जी ने उन्हें कई नाम से बुलाकर शांत कराना चा​हा। वे जब उनका एक नाम लेते तो वे चुप हो जाते। मान्यता है इसी क्रम में ब्रह्मा जी ने उन्हें 108 नाम से संबोधित किया और वही नाम उनकी महिमा का गुणगान करने वाले 108 नाम बन गये। कुछ लोग इसे भगवान शिव के तांडव नृत्य की 108 प्रकार की मुद्राओं से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि महादेव का मनका कहे जाने वाले रुद्राक्ष की माला में भी कुल 108 दानें होते हैं। 

    सूर्य से जुड़ा है 108 का अंक

    हिंदू धर्म में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य से भी 108 अंक का जुड़ाव है। हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्रमा की जहां 16 कलाएं होती हैं, वहीं सूर्य देवता की कुल 2,16,000 कलाएं होती हैं। चूंकि सूर्य देवता छह महीने उत्तरायण और छह महीने दक्षिणायन रहत हैं, इसलिए उनकी एक समय की कला 108000 हुई। इसमें से यदि अंतिम के तीन शून्य हटा दिये जाएं तो कुल संख्या 108 ही होती है। हिंदू मान्यता में किसी भी माला में 108 की संख्या को सूर्य की एक—एक कलाओं का प्रतीक भी माना जाता है। 

    ज्योतिष में 108 अंक के मायने 

    ज्योतिष में 108 अंक को ग्रह, नक्षत्र और 12 राशियों से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिष के अनुसार यदि 12 राशियों और 09 ग्रहों को गुणा करें तो 109 की पवित्र संख्या ही आती है। इसी तरह यदि 27 नक्षत्र और उनके चार चरण को गुणा करें तो भी 108 अंक ही आता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. )

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