Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 112 करोड़ से अधिक के कार्यों का करेंगे लोकार्पण-भूमिपूजन
    • डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: राष्ट्र प्रथम का अमर संदेश
    • ‘तेजस कार्यशाला’ का सफल आयोजन-स्टार्टअप इंडिया से युवाओं को मिली नई दिशा, स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
    • बारिश के साथ दिखने लगा ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान का असर
    • हाई-प्रोफाइल शादी:टेलर स्विफ्ट की शादी में ‘TT’ गिफ्ट बॉक्स के अंदर निकली ऐसी लग्जरी चीजें, हर तरफ हो रही चर्चा…
    • वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता-नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल
    • 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा
    • हिंदू धर्म उदार, ईसाई नहीं है अमेरिकी महिला…थलपति विजय सरकार को मद्रास हाईकोर्ट की बड़ी नसीहत
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Monday, July 6
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»धर्म आस्था»आमलकी एकादशी में क्यों की जाती है आंवले के वृक्ष की पूजा
    धर्म आस्था

    आमलकी एकादशी में क्यों की जाती है आंवले के वृक्ष की पूजा

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 18, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

     फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आने वाली आमलकी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है. यह दिन भगवान विष्णु की उपासना और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर देता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने पर जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है.

    क्या है आमलकी एकादशी का शुभ मुहूर्त?

    पुजारी परमस्वरूप शर्मा के अनुसार, वर्ष 2026 में एकादशी तिथि 27 फरवरी को सुबह 12:33 बजे से प्रारंभ होगी और उसी दिन रात 10:32 बजे तक रहेगी. व्रत का पारण 28 फरवरी की सुबह 6:47 बजे से 9:06 बजे के बीच किया जाएगा. इस बार आमलकी एकादशी पर चार विशेष शुभ योग बन रहे हैं—सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग. ऐसे शुभ संयोग में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है.

    आमलकी एकादशी का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत करता है, उसे पापों से मुक्ति और विष्णु लोक की प्राप्ति होती है. इस दिन पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं. संतान की इच्छा रखने वाले, धन में वृद्धि चाहने वाले तथा मानसिक शांति की कामना करने वालों के लिए यह व्रत विशेष रूप से फलदायी माना गया है.

    आंवला पूजा का विशेष महत्व

    आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा का खास महत्व है. मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है. इस दिन वृक्ष को जल अर्पित कर, दीप जलाकर और परिक्रमा कर पूजा की जाती है. श्रद्धा भाव से किया गया यह व्रत सकारात्मक ऊर्जा देता है, पापों का क्षय करता है और अधूरे कार्यों की सिद्धि में सहायक होता है. इसलिए भक्त पारण के शुभ समय का ध्यान रखते हुए विधिपूर्वक व्रत संपन्न करते हैं.

    (अस्वीकरण;यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    गुरु पूर्णिमा पर क्या करें, क्या न करें? गुरु को क्या दें उपहार

    July 3, 2026

    हनुमान मंदिर जाने के 5 चमत्कारिक लाभ! दूर होगी हर बाधा

    June 30, 2026

    गोवा की प्राचीन घने जंगलों में छिपा तांबड़ी सुरला महादेव मंदिर: शिव धरोहर का अद्भुत रहस्य

    June 28, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.