सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बीते रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं, जो 20 जून से NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की बात उठा रहे हैं।
अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक की सेहत पर जताई चिंता
इस बीच, CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई है। अभिजीत ने पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 5 किलो तक कम हो गया है और उनकी तबीयत लगातार कमजोर होती जा रही है। धर्मेंद्र प्रधान को हटाने से पहले प्रधानमंत्री और कितना इंतजार करेंगे? धर्मेंद्र प्रधान, पीएम मोदी के लिए इतने जरुरी क्यों हैं कि 20 छात्रों की मौत के बावजूद वे उन्हें हटाने से इनकार कर रहे हैं?
NEET-UG पर पहले कब हुआ था विवाद?
साल 2024 की NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। उस समय झारखंड और बिहार के छात्रों ने दावा किया कि पेपर लीक हुआ था। सीबीआई जांच में यह पाया गया कि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले हल किए गए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए थे, हालांकि परीक्षा को रद्द नहीं किया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, जहां अदालत ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया। उस साल 1563 छात्रों को दिए गए ग्रेस मार्क्स को लेकर भी विवाद हुआ। बाद में इन छात्रों के लिए री-टेस्ट आयोजित किया गया, जिसमें केवल 813 छात्र ही शामिल हुए। री-NEET में टॉपर को 680 अंक मिले, जबकि मूल परीक्षा में उसे 720 अंक प्राप्त हुए थे।
NEET-UG में सीटों को लेकर मारामारी क्यों?
NEET-UG परीक्षा को लेकर हमेशा सवाल खड़ा हुआ है कि नीट की सीटों को लेकर इतनी मारामारी क्यों है? दरअसल, सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस में भारी अंतर भी माना जाता है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई की सालाना फीस लगभग 20 हजार से 60 हजार रुपये तक होती है, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में यही फीस 15 से 45 लाख रुपये प्रति वर्ष तक पहुंच जाती है। यही एक बड़ी वजह है जिसकी वजह से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए इतनी मारामारी देखी जाती है।

