Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • आत्मसमर्पित 95 नक्सलियों को 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि
    • अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों तक पहुँची ‘सुशासन एक्सप्रेस’
    • मुस्कुराता बस्तर कार्यशाला में बच्चों की कला ने बिखेरे रंग
    • हाथीदांत तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई,वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए
    • मछली बीज उत्पादन से किसान रयतु राम ने लिखी सफलता की नई कहानी
    • जीआई टैग: वैश्विक ब्रांडों में पारंपरिक संपदा की वृद्धि
    • Jammu में 7 संदिग्ध, सुरक्षाबलों ने शुरू किया Search Operation
    • ASI ने फंदा लगाकर की आत्महत्या, महकमे में हड़कंप
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Tuesday, August 4
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»धर्म आस्था»मृत्यु के बाद ही क्यों पढ़ते है गरुड़ पुराण? चलिए जानते है सच्चाई
    धर्म आस्था

    मृत्यु के बाद ही क्यों पढ़ते है गरुड़ पुराण? चलिए जानते है सच्चाई

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inApril 13, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    गरुड़ पुराण को लेकर लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं, जिनमें सबसे आम यह है कि इसका पाठ केवल मृत्यु के बाद ही किया जाता है। अक्सर किसी व्यक्ति के निधन के बाद 13 दिनों तक घर में इसका पाठ होता है, जिससे इसे केवल मृत्यु से जुड़ा ग्रंथ मान लिया जाता है। लेकिन क्या सच में गरुड़ पुराण को जीवित रहते पढ़ना वर्जित है? दरअसल, इस ग्रंथ में सिर्फ मृत्यु और परलोक ही नहीं, बल्कि जीवन, कर्म और धर्म से जुड़े गहरे रहस्य भी बताए गए हैं। यही वजह है कि इसकी वास्तविक महत्ता को समझना बेहद जरूरी हो जाता है।

    मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण पढ़ने की परंपरा
    जब किसी व्यक्ति का निधन होता है, तो उसके बाद 13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे मृत आत्मा को शांति मिलती है और उसे सही मार्ग प्राप्त होता है। इसमें आत्मा की यात्रा, कर्मों का फल और जीवन-मृत्यु के रहस्य का विस्तार से वर्णन मिलता है, जो परिवार के लोगों को भी जीवन का वास्तविक अर्थ समझाता है।

    क्या जीवित रहते इसे पढ़ना गलत है?
    यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि गरुड़ पुराण को जीवित रहते नहीं पढ़ना चाहिए। सच तो यह है कि इस ग्रंथ में जीवन को बेहतर बनाने की अनेक शिक्षाएं दी गई हैं। इसे पढ़ने से व्यक्ति सही और गलत के बीच अंतर समझ पाता है और अपने कर्मों को सुधार सकता है।

    गरुड़ पुराण की शिक्षाएं क्यों हैं खास?
    गरुड़ पुराण केवल मृत्यु का ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाता है। इसमें धर्म, नीति, कर्म और आत्मा से जुड़ी गहरी बातें बताई गई हैं। अगर कोई व्यक्ति इसकी शिक्षाओं को अपनाता है, तो वह न केवल सुखद जीवन जी सकता है, बल्कि अपने भविष्य को भी बेहतर बना सकता है।

    पढ़ने का सही तरीका
    यदि आप सामान्य दिनों में गरुड़ पुराण पढ़ना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, शांत और साफ स्थान पर बैठें, और पूरे श्रद्धा भाव से इसका पाठ करें। शुद्ध मन और एकाग्रता के साथ पढ़ने से इसका प्रभाव अधिक होता है।

    अस्वीकरण : इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    बुध का कर्क राशि में प्रवेश! 3 राशियों पर आएगा संकट

    August 4, 2026

    सावन अमावस्या पर लगेगा दुर्लभ सूर्य ग्रहण, फिर कैसे होगा स्नान, दान और तर्पण?

    August 4, 2026

    मंगला गौरी व्रत में क्या चढ़ाएं? जानें पूजा सामग्री, नियम और शुभ मंत्र

    August 3, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.