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राज्यसभा में सी सदानंदन मास्टर ने सुनाई 31 साल पुरानी राजनीतिक हमले की कहानी

तिरुवनंतपुरम\नई दिल्ली: राज्यसभा में सोमवार को बीजेपी के मनोनीत सांसद सी. सदानंदन मास्टर के भाषण के दौरान जमकर हंगामा हुआ। दरअसल, जब बीजेपी नेता राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलना शुरू किया तो उन्होंने अपने कृत्रिम पैर मेज पर रख दिए और 31 साल पहले जानलेवा हमले की कहानी सुनाई। सदानंदन मास्टर ने सीपीएम पर हमला करते हुए कहा कि जो लोग आज संसद में लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं, उन्होंने 31 साल पहले मुझ पर हमला किया था। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों की प्रतिबद्धता लोकतांत्रिक मूल्यों में नहीं है बल्कि राजनीतिक हिंसा में है।

सीपीएम सांसद ने पैर रखने पर जताई आपत्ति
सी. सदानंदन मास्टर राज्यसभा के मनोनीत सदस्य हैं। 1994 में उन्हें आरएसएस का समर्थन करने के लिए कथित तौर पर लेफ्ट समर्थकों ने सबक सिखाने के लिए उनके पैर काट दिए थे। इस मामले में आरोपियों को कोर्ट से सजा भी हुई है। राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर जब उन्होंने अपने कृत्रिम पैर मेज पर रखकर बोलना शुरू तो केरल के सीपीएम सांसद जॉन ब्रिट्टस ने तुरंत प्वाइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए सदन में कृत्रिम अंग दिखाने पर आपत्ति जताई। इस विरोध में कई और सांसद भी शामिल हो गए। तब आसन पर बैठे सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आश्वासन दिया कि वह सांसद से अपने कृत्रिम अंग नीचे रखने का निर्देश देंगे। सभापति ने कहा कि सदानंदन मास्टर यह बता रहे हैं कि उन्हें बैठकर बोलना क्यों पड़ रहा है।

हमलावरों ने लगाया था इंकलाब जिंदाबाद का नारा
सी. सदानंदन मास्टर ने 31 साल पुरानी घटना के बारे में बताया कि उनकी बहन की शादी होने वाली थी। वह अपने चाचा से मिलकर घर लौट रहे थे, तभी हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। उनके साथ मारपीट की गई और फिर जमीन पर गिराकर घुटनों के नीचे उनके दोनों पैर काट दिए थे। बीजेपी सांसद ने कहा कि पैर काटने के बाद हमलावरों ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इस हमले में उनके पैर ऐसे काटे गए थे, जिसे दोबारा जोड़ा नहीं जा सकता था। अपने भाषण में सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि राजनीतिक हिंसा किसी भी लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है। यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण में जिक्र किए गए अमृत काल, विकसित भारत और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना की।

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