महाशिवरात्रि 2026 पर महाकाल में 44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शन…

उज्जैन- विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि का उत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर उज्जैन नगरी भी शिवमय हो जात है. 6 फरवरी से ही महाकालेश्वर में शिव नवरात्रि के साथ महादेव के विवाह का उत्सव शुरू हो चुका है, जोकि 16 फरवरी 2026 तक चलेगा.
शिव नवरात्रि का महत्व
12 ज्योतिर्लिंग में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि से 9 दिन पहले शिव नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है. इसके पीछे मान्यता है कि, जिस तरह देवी शक्ति की उपासना लिए नवरात्रि मनाई जाती है, उसी महाकालेश्वर में शिव नवरात्रि मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि, शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने शिव नवरात्रि के दौरान कठिन तप और साधना की थी.
महाशिवरात्रि पर महाकाल का 44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शन
रविवार 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. इस मौके पर महाकालेश्वर में भक्तों की भारी भीड़ रहती है. मंदिर प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है कि, इस बार महाकाल के पट लगातार 44 घंटे दर्शन के लिए खुले रहेंगे. इस दौरान देश-विदेश से आए श्रद्धालु महाकाल के दर्शन कर सकेंगे. महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी सुबह 06 बजकर महाकालेश्वर में दर्शन की शुरुआत होगी, जो 16 फरवरी की सुबह तक जारी रहेगा. इस दौरान बिना किसी ब्रेक के मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा.
दोपहर की भस्म आरती
16 फरवरी को दोपहर 12 बजे भस्म आरती होगी और शिव नवरात्रि का समापन हो जाएगा. बता दें कि, महाकालेश्वर में दोपहर की भस्मारती (Noon Bhasma Aarti) वर्ष में केवल एक बार ही होती है. भस्म आरती से पहले महाकाल को फलों, फूलों और सप्तधान्य से बना भव्य सेहरा बांधा जाता है.
महाशिवरात्रि ऐसा पर्व है, जिसमें दिन-रात चारो प्रहर महादेव की पूजा होती है. धार्मिक मान्यतानुसार यह पर्व शिव-पार्वती के विवाह के दिन के रूप में मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि, इस दिन व्रत, पूजा और शिव नाम का जाप करने से मनोकामनाएं पूरी होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.



