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    Home»संपादकीय»क्या ट्रंप टैरिफ लागू है…
    संपादकीय

    क्या ट्रंप टैरिफ लागू है…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 23, 2026
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    अमरीका की सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ को खारिज कर दिया था। उसे गैर-कानूनी करार दिया गया और संवैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण माना गया। शीर्ष अदालत ने 6-3 के बहुमत के साथ व्याख्या की कि टैरिफ लगाने का विशेषाधिकार राष्ट्रपति को नहीं है। सिर्फ अमरीकी कांग्रेस (संसद) ही टैरिफ पर कोई निर्णय ले सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस आईईईपीए कानून के तहत देशों पर टैरिफ लगाए हैं, वे अवैध हैं। ये आपातकालीन आर्थिक शक्तियां ‘युद्धकालीन’ ही हैं अथवा कोई आपदा का दौर हो। तब भी राष्ट्रपति सिर्फ आयात को नियंत्रित कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राष्ट्रपति टं्रप के अधिकारों के दुरुपयोग को बेनकाब करता है, क्योंकि टैरिफ की घुड़कियां दिखा कर ट्रंप विभिन्न देशों को धमकाते रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने सर्वोच्च अदालत के इस आदेश के बावजूद हार नहीं मानी। वह एक अलग किस्म के अहंकारी और एकाधिकारवादी राष्ट्राध्यक्ष हैं, लिहाजा उन्होंने पहले 10 फीसदी और फिर पलट कर 15 फीसदी टैरिफ सभी देशों पर थोपने का ऐलान किया। ट्रंप ने अदालती आदेश को ‘शर्मनाक’, ‘अलोकतांत्रिक’, ‘निराशाजनक’ करार दिया। यहां तक कह दिया कि जज संविधान के प्रति वफादार नहीं हैं। क्या राष्ट्रपति अदालत और न्यायाधीशों पर ऐसी टिप्पणी कर सकते हैं? राष्ट्रपति ट्रंप के 358 फैसलों में से 149 फैसलों पर पूर्ण अथवा आंशिक रोक अदालत लगा चुकी है। बहरहाल अब 24 फरवरी से सभी देशों पर 15 फीसदी टैरिफ लागू होगा और वह 150 दिन (24 जुलाई) तक ही जारी रह सकता है। उसके बाद संसद की स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। ट्रंप ने जिस ‘टे्रड एक्ट’ की धारा 122 के तहत नए 15 फीसदी टैरिफ लगाए हैं, उनकी अधिकतम सीमा ही 15 फीसदी है। ट्रंप उससे ज्यादा टैरिफ लगा ही नहीं सकते। अमरीकी राष्ट्रपति के इस नए आदेश और ऐलान के बाद भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय का इतना ही बयान सामने आया है कि तमाम बिंदुओं का अध्ययन किया जा रहा है। सवाल है कि अब नई परिस्थितियों में भारत क्या करेगा? उसके सामने विकल्प क्या हैं? भारत पर 3.3 फीसदी अमरीकी टैरिफ पहले से है। फिर 50 फीसदी तक टैरिफ ले जाया गया।

    जब भारत-अमरीका व्यापार समझौते पर शुरुआती सहमति बन गई, तो राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ घटा कर 18 फीसदी कर दिया। अब भी वह कह रहे हैं कि भारत टैरिफ देगा और अमरीका पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। यह कैसा द्विपक्षीय व्यापार समझौता है? अभी दोनों देशों के बीच समझौते के प्रारूप, मसविदे पर सहमति ही बनी है, अंतिम समझौता नहीं हुआ है, क्योंकि किसी भी दस्तावेज पर अधिकृत हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। इन परिस्थितियों में भारत व्यापार समझौते पर अमरीका के साथ दोबारा बातचीत करेगा अथवा अमरीकी आदेशों का ही पालन करेगा, यह बेहद महत्वपूर्ण सवाल है। यदि अमरीका समझौते की नई शर्तों पर सहमत नहीं होता है, तो क्या समझौता ही खटाई में पड़ सकता है? विशेषज्ञ अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार का आकलन है कि ट्रंप ने 15 फीसदी बेस लाइन टैरिफ से भारत के वस्त्र उद्योग को वियतमान और बांग्लादेश जैसे देशों के समान ला खड़ा किया है। भारत को बहुत नुकसान होना तय है, लिहाजा भारत को यूरोपीय संघ सरीखे नए व्यापारिक साझेदार तलाशने और तय करने होंगे।ट्रंप हमेशा अनिश्चित बने रहेंगे, क्योंकि उनकी फितरत ही ऐसी है, लिहाजा अमरीका पर न्यूनतम निर्भरता रखनी होगी। आश्चर्य है कि सुप्रीम कोर्ट ने इतना बड़ा, महत्वपूर्ण फैसला तो सुना दिया, लेकिन इस बारे में कोई निर्देश नहीं है कि ट्रंप ने 135 अरब डॉलर का जो टैरिफ देशों से वसूला है, उसकी वापसी कैसे होगी? उसे रिफंड किया जाएगा अथवा नहीं? जानकार मान रहे हैं कि अमरीकी आयातक ही आवेदनों की बौछार कर देंगे, तो शायद कोई व्यवस्था बनाई जा सकती है।

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