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    Home»राष्ट्रीय»देश के किसानों को बड़ी राहत, केंद्र सरकार ने कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की बढ़ोतरी
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    देश के किसानों को बड़ी राहत, केंद्र सरकार ने कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की बढ़ोतरी

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 25, 2026
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    केंद्र सरकार ने देश के लाखों किसानों को बड़ी राहत (Cabinet Decision)देते हुए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में शानदार बढ़ोतरी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की अहम बैठक में 2026-27 के मार्केटिंग सीजन के लिए कच्चे जूट के एमएसपी (MSP) को मंजूरी दी गई। सरकार के इस कदम से न केवल किसानों की आय में इजाफा होगा, बल्कि देश में जूट उत्पादन को भी एक नई दिशा मिलेगी। ताजा फैसले के मुताबिक, सत्र 2026-27 सीजन के लिए कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। यह पिछले सीजन (2025-26) के मुकाबले 275 रुपये अधिक है। यह बढ़ोतरी कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर की गई है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का मुनाफा मिल सके।

    भारत में ‘गोल्डन फाइबर’ की खेती

    भारत में जूट को ‘गोल्डन फाइबर’ यानि सुनहरा रेशा कहा जाता है। पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, ओडिशा और मेघालय जैसे राज्यों में जूट की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस नई कीमत का सबसे ज्यादा और सीधा फायदा इन्हीं राज्यों के किसानों को मिलेगा। सरकार लगातार पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग को बढ़ावा दे रही है, जिसमें जूट की भूमिका सबसे अहम है। ऐसे में एमएसपी बढ़ने से किसान जूट की खेती की ओर और अधिक आकर्षित होंगे।

    पूरी दुनिया अब इको-फ्रेंडली विकल्पों की ओर लौट रही

    गौरतलब है कि प्लास्टिक के बढ़ते खतरों के बीच पूरी दुनिया अब इको-फ्रेंडली विकल्पों की ओर लौट रही है। भारतीय जूट उद्योग के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है। सरकार यह भली-भांति जानती है कि कच्चे माल (जूट) की निरंतर आपूर्ति तभी संभव है, जब किसानों को उनकी फसल का उचित और लाभदायक दाम मिले। यह नया एमएसपी उसी रणनीति का एक मजबूत हिस्सा है।

    अब बढ़ती महंगाई और खेती की लागत से निपटने में मदद मिलेगी

    जूट किसान संघों और कृषि विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। पश्चिम बंगाल और असम के किसानों का कहना है कि 275 रुपये प्रति क्विंटल की इस वृद्धि से उन्हें बढ़ती महंगाई और खेती की लागत से निपटने में बहुत मदद मिलेगी। हालांकि, कुछ किसान संगठनों ने सरकारी खरीद केंद्रों (Procurement Centers) की संख्या बढ़ाने की भी मांग की है ताकि उन्हें अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी न हो।

    किसानों से सीधे नए एमएसपी पर खरीद शुरू होने का रास्ता खुला

    कैबिनेट की इस मंजूरी के बाद अब जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (JCI) सक्रिय हो जाएगा। भारतीय जूट निगम, केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी के रूप में काम करता है। अब जेसीआई राज्य सरकारों की एजेंसियों के साथ मिलकर ब्लॉक स्तर पर खरीद की रूपरेखा तैयार करेगा, ताकि जैसे ही नई फसल बाजार में आए, किसानों से सीधे नए एमएसपी पर खरीद शुरू की जा सके।

    ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’ अभियान को बल मिलेगा

    इस निर्णय का एक बड़ा पहलू ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’ अभियान से भी जुड़ा है। सरकार ने पहले ही खाद्यान्न और चीनी की पैकेजिंग के लिए जूट के बोरों का इस्तेमाल अनिवार्य किया हुआ है। एमएसपी बढ़ने से जूट की पैदावार बढ़ेगी, जिससे पैकेजिंग उद्योग को सस्ते और सुलभ जूट बैग्स मिल सकेंगे। यह सिंथेटिक और प्लास्टिक थैलियों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।

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