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    Home»छत्तीसगढ़»मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कबीर मठ आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय सद्गुरु कबीर संत सम्मेलन में हुए शामिल
    छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कबीर मठ आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय सद्गुरु कबीर संत सम्मेलन में हुए शामिल

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMarch 1, 2026
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    तो विकास और संस्कार दोनों साथ-साथ आगे बढ़ते हैं। संत कबीर की वाणी समाज को जोड़ती है, सरकार का संकल्प जनजीवन संवारता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम नादिया स्थित कबीर मठ आश्रम में आयोजित अखिल भारतीय सद्गुरु कबीर संत सम्मेलन फाल्गुन महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर आश्रम में विकास कार्य के लिए 11 लाख रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने मठ आश्रम परिसर में स्थायी डोम निर्माण और प्रतिवर्ष आयोजन के लिए बजट में राशि का प्रावधान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम नादिया में मिनी स्टेडियम के निर्माण की घोषणा की, साथ ही राजनांदगांव शहर में कबीर साहेब के नाम भव्य प्रवेश द्वार निर्माण की भी घोषणा की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 202 साल पहले पूज्य सद्गुरु सेवा साहब जी ने नादिया जैसे गांव में कबीर मठ की स्थापना की। हलबा समाज के संत स्वरूप मंतू ठाकुर जी ने आश्रम की सेवा के लिए अपनी समस्त संपत्ति अर्पित कर दी। श्री साय ने कहा कि हलबा समाज का गौरवशाली और समृद्ध इतिहास रहा है। हलबा समाज से गेंदसिंह जी जैसे महानायक हुए हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में सद्गुरु कबीर के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्रदेश में सद्गुरु संत कबीर का बड़ा प्रभाव है। उन्होंने अपने बचपन से ही कबीर पंथ से जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कुनकुरी में कबीरपंथ का बड़ा आश्रम है। बचपन से ही पंथ के रीति-रिवाजों से मैं भलीभांति परिचित रहा।छत्तीसगढ़ का जिला कबीरधाम सद्गुरु के नाम पर है। यहां के लोकजीवन में कबीर की वाणी का प्रभाव है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कबीर दास जी के दोहों में जीवन का संदेश है। उन्होंने ‘निंदक नियरे राखिए’ जैसे कबीर संत के दोहों को दोहराया। श्री साय ने कहा कि संत कबीर कहते थे कि हमारे भीतर अपनी कमियों को सुनने का साहस होना चाहिए, ताकि हम खुद को बेहतर बना सकें। उनके दोहों में आदर्श जीवन और मानव समाज के हित के संदेश हैं, इसलिए हमें कबीरदास जी के बताए मार्ग पर चलना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है, जहां की 80 प्रतिशत आबादी कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। हमने सुव्यवस्थित धान खरीदी की। धान बेचने के 48 घंटे के भीतर किसानों के खाते में राशि पहुंचे, यह सुनिश्चित किया। शनिवार को हमने 25 लाख 28 हजार से अधिक किसानों के खातों में कृषक उन्नति योजना के माध्यम से 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरित की। महतारी वंदन योजना अंतर्गत प्रदेश की 69 लाख से अधिक माताओं-बहनों के खातों में 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मोदी की गारंटी में हमने वादा किया था कि सरकार बनते ही प्राथमिकता के आधार पर 18 लाख आवास प्रदान करेंगे। हमने शपथ लेने के 24 घंटे के भीतर ही पहली कैबिनेट बुलाकर 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दे दी। आज 8 लाख से ज्यादा मकान बन चुके हैं, जिनका गृह प्रवेश भी हो चुका है। इतना ही नहीं, बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त हो रहा है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15,000 प्रधानमंत्री आवासों की अलग से स्वीकृति हुई है। पीवीजीटी समुदाय के लोगों के लिए अलग से 32,000 पीएम आवासों की स्वीकृति हुई है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि जैसे-जैसे नक्सलवाद समाप्त हो रहा है, बस्तर के पिछड़े क्षेत्रों में विकास हो रहा है। जिन गांवों में कभी सर्वे नहीं होता था, आज वहां की 7,000 से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दो साल में 32,000 से ज्यादा नौकरियों की प्रक्रिया शुरू की। 5,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती निकाली जा रही है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु श्रीराम ने 14 साल में सबसे ज्यादा समय छत्तीसगढ़ में बिताया। 500 साल के संघर्ष के बाद अयोध्या धाम में हमारे भांचा राम विराजमान हुए तो हमने छत्तीसगढ़ से श्रीराम लला दर्शन योजना की शुरुआत की, जिसके तहत अब तक 42,000 से अधिक लोगों को अयोध्या धाम और काशी विश्वनाथ धाम का दर्शन कराया जा चुका है। हमने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की भी पुनः शुरुआत की है, जिसमें 5,000 से ज्यादा लोगों को देश के 19 चिन्हांकित तीर्थस्थलों का दर्शन कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार के सख्त खिलाफ है। डीएमएफ, कोयला और पीएससी घोटाले के दोषी जेल के भीतर हैं। आज राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शी व्यवस्था है, इसलिए गरीब का बेटा भी बड़ा अधिकारी बन रहा है।

    स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यदि पूरे भारतवर्ष में देवभूमि, संस्कारभूमि और समर्पण की परंपरा की बात की जाए, तो छत्तीसगढ़ का स्थान अत्यंत विशिष्ट और सम्मानजनक है। यहां की मिट्टी में सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना रची-बसी है, जो प्रदेशवासियों के जीवन और व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग सरल, संवेदनशील और संस्कारों से परिपूर्ण हैं, यही इस प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी समान महत्व दे रही है, जो छत्तीसगढ़ की पहचान को और मजबूत बनाता है।

    उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का संत-महात्माओं के प्रति गहरा सम्मान और आस्था है। ऐसा कोई दिन शायद ही गुजरता हो, जब मुख्यमंत्री निवास में किसी संत, महात्मा या आध्यात्मिक व्यक्तित्व का आगमन न होता हो। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, मार्गदर्शन और मूल्यों के संरक्षण का एक सशक्त माध्यम भी है।

    सांसद श्री संतोष पांडेय ने छत्तीसगढ़ की धरती को रत्नगर्भा बताते हुए कहा कि हमारी धरती को समय-समय पर संतों का मार्गदर्शन मिलता रहा है। संतों की वाणी में जीवन का आदर्श और दर्शन मिलता है।

    इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं महापौर श्री मधुसूदन यादव ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद श्री प्रदीप गांधी,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री दिनेश गांधी, जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष श्री भरत वर्मा,श्रम मंडल के अध्यक्ष श्री योगेश दत्त मिश्रा, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, डोंगरगांव जनपद पंचायत के अध्यक्ष श्रीमती रंजीता ग्राम पंचायत नदिया के सरपंच श्रीमती वंदिता ठाकुर, आचार्य स्वामी मंगल साहेब,धर्माधिकारी श्री सत्येंद्र साहेब, डॉक्टर भागीरथी साहेब, सुश्री साध्वी सुमेधा साहेब संत श्री राम रतन स्वरूप साहेब,श्री लेख चंद्र साहेब सहित अन्य गणमान्य नागरिक गण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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