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पुलिस का कारनामा: जिसने बलात्कार किया, नाबालिग को थाने में रातभर उसी के साथ रखा

इंदौर, नाबालिग लड़की के अपहरण से जुड़े एक मामले में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। पुलिस ने नाबालिग को जब्त करने के बाद रातभर उसे उसी व्यक्ति के साथ थाने में रखा, जिस पर उसके साथ बलात्कार का आरोप है। मामले में हाईकोर्ट ने संवेदनशीलता दिखाई है। युगलपीठ ने इंदौर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) को मामले की जांच करने को कहा है।

पीडि़ता को आरोपियों के साथ एक ही कमरे में रखा

अधिवक्ता प्रिया शर्मा और अभिषेक पांचाल ने बताया, सांवेर के चंद्रावतीगंज थाना में 1 मार्च को नाबालिग लड़की के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसके बाद उसे रतलाम से बरामद किया था। 9 मार्च को उसे इंदौर लाने के बाद पुलिस ने पीडि़ता को उसके अभिभावकों को सौंपने के बजाय पूरी रात थाने में ही बैठाया। इतना ही नहीं, उसे आरोपियों के साथ एक ही कमरे में रखा, जिससे वह भयभीत और मानसिक रूप से आहत हो गई। अगले दिन उसे डरी-सहमी हालत में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और बयान दर्ज कराया गया।

मेडिकल परीक्षण सही तरीके से नहीं करने का भी आरोप

यह भी आरोप है कि उसका मेडिकल परीक्षण सही तरीके से नहीं किया गया। उसी दिन देर शाम उसे पिता को सौंप दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम से आहत होकर पिता ने हाईकोर्ट(High Court) में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।

बयान व मेडिकल रिपोर्ट से हो आगे की कार्रवाई

याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने पीडि़ता से अलग से बातचीत की, जिसमें उसने अपने साथ हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि पीडि़ता का बयान इंदौर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने एक बार फिर से दर्ज कराए जाएं। उसके बाद एमवाय अस्पताल ले जाकर उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाए।

दोषी पुलिस के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने से इनकार

वहीं पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मामले की निष्पक्ष और सही तरीके से जांच हो। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करने से इनकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि पीडि़ता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए।

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