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    Home»क्राइम»किडनी कांड: बंपर रैकेट चला रहे थे डॉक्टर कपल; सरगना समेत 6 गिरफ्तार, 10 लाख में खरीदी, 60 लाख में बेची
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    किडनी कांड: बंपर रैकेट चला रहे थे डॉक्टर कपल; सरगना समेत 6 गिरफ्तार, 10 लाख में खरीदी, 60 लाख में बेची

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inApril 1, 2026
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    Kanpur News : कानपुर पुलिस ने मंगलवार को कई निजी अस्पतालों के जरिए कथित तौर पर अवैध गुर्दा प्रतिरोपण कराने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए उसके सरगना तथा पांच चिकित्सकों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि ये गिरफ्तारियां सोमवार देर रात कल्याणपुर इलाके में निजी चिकित्सालयों—मेड-लाइफ अस्पताल, आहूजा अस्पताल और प्रिया अस्पताल में एक साथ की गई छापेमारी के बाद हुईं। 

    गिरफ्तार आरोपी और उनके पद
    उन्होंने बताया कि यह छापेमारी स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर की गई थी जिसका नेतृत्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर हरिदत्त नेमी कर रहे थे। लाल ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में डॉक्टर प्रीति आहूजा (50), उसके पति डॉक्टर सुरजीत सिंह आहूजा (54) तथा अर्धचिकित्साकर्मियों– राजेश कुमार (44), राम प्रकाश (40) और नरेंद्र सिंह शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इन लोगों पर अवैध अंग प्रतिरोपण में मदद करने का आरोप है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि इस रैकेट के कथित मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल (32) को भी गिरफ्तार किया गया है जिसने कथित तौर पर खुद को डॉक्टर बताया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच से पता चला है कि बिहार के एमबीए छात्र आयुष से 10 लाख रुपये में एक गुर्दा लेकर उसे मेरठ की मरीज पारुल तोमर को 60 लाख रुपये में बेच दिया गया था। 

    सर्जरी के बाद स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं
    उन्होंने बताया कि कथित तौर पर सर्जरी के बाद पारुल और आयुष की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए लाला लाजपत राय अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस आयुक्त ने बताया कि आयुष मेड-लाइफ अस्पताल में भर्ती था, जबकि गुर्दा लेने वाली मरीज़ को किसी दूसरे अस्पताल में रखा गया था। उन्होंने बताया कि छह आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं– 143 (तस्करी) और 3(5) (किसी एक ही मकसद को पूरा करने के लिए सामूहिक रूप से कोई आपराधिक काम करना) तथा ‘मानव अंग और ऊतक प्रतिरोपण अधिनियम’ की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

    अवैध अंग प्रतिरोपण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
    पुलिस आयुक्त ने बताया कि इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब गुर्दा दानकर्ता ने पुलिस से शिकायत की कि उसे तय रकम के बजाय सिर्फ़ साढ़े तीन लाख रुपये ही मिले। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस सूचना के मिलते ही पुलिस ने तुरंत छापेमारी की और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लाल ने शिवम अग्रवाल को इस गिरोह का कथित मास्टरमाइंड बताते हुए कहा कि वह खुद को डॉक्टर बताकर टेलीग्राम ग्रुप के ज़रिए किडनी देने वालों को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और डायलिसिस कराने वाले गुर्दा रोगियों को अपना निशाना बनाया एवं उन्हें अवैध तरीकों से आपस में जोड़ा। 

    रैकेट की कार्यप्रणाली
    अब तक गैरकानूनी गुर्दा प्रतिरोपण के एक दर्जन से अधिक सुबूत मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के सरगना ने कुबूल किया है कि पिछले दो सालों में कानपुर में ऐसे 50-60 लोगों को गुर्दा प्रतिरोपण किया गया और संदेह है कि इस नेटवर्क के तार लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और यहां तक कि नेपाल से भी जुड़े हों। अवैध रूप से गुर्दा प्रतिरोपण के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस ने चार और संदिग्धों की पहचान की है, जिनमें दो डॉक्टर भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि ये डॉक्टर कई शहरों में फैले इस नेटवर्क की अहम कड़ी हैं। 

    दूसरे राज्यों से जुड़े हैं तार ? 
    पुलिस आयुक्त ने मीडिया को बताया, ”जांच के दौरान चार और लोगों डॉक्टर अफजल, डॉक्टर रोहित उर्फ राहुल तथा अनुराग उर्फ अमित और वैभव नामक दो अन्य के नाम सामने आए हैं। वे सभी फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है।” लाल ने कहा, ”हमारा मानना है कि उनकी गिरफ्तारी से एक बहुत बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है जिसमें और भी डॉक्टर और निजी अस्पताल शामिल हो सकते हैं। हमें शक है कि यह रैकेट शुरुआती जांच में सामने आई बातों से कहीं ज्यादा बड़ा है और इसके तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।” अधिकारियों ने कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों की संलिप्तता की भी बात कही है जिससे प्रतिरोपण के नियमों के उल्लंघन पर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं। 

    तीन अस्पतालों को स्पष्टीकरण नोटिस जारी 
    अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी रमित रस्तोगी ने संवाददाताओं को बताया कि तीन अस्पतालों को नोटिस जारी कर मरीजों को भर्ती करने और अंग प्रतिरोपण की प्रक्रियाओं के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने कहा कि आगे की जांच पूरी होने तक उनके लाइसेंस रद्द किये जा सकते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस ने यह भी खुलासा किया है कि इसी माह तीन मार्च को दक्षिण अफ्रीका की नागरिक अर्बिका का भी गुर्दा प्रतिरोपण किया गया था।

    उन्होंने कहा कि हालांकि खुफिया सूचना ने पहले ही इस मामले की ओर इशारा किया था लेकिन उस जानकारी पर समय रहते कार्रवाई नहीं की जा सकी थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान और छह-सात अस्पतालों की संभावित संलिप्तता के बारे में सुराग मिले हैं। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है। 

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