Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़-अटल बिहारी वाजपेयी ताप विद्युत गृह मड़वा संयंत्र से सीधे रोशन होगी राजधानी रायपुर
    • विष्णु भैया के उपहार से रक्षाबंधन की खुशियां दोगुनी, महतारी वंदन की 30वीं किस्त से बहनों को मिला संबल
    • मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रभार जिला बलरामपुर की ली समीक्षा बैठक, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने दिए निर्देश
    • आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता- मंत्री श्री टंक राम वर्मा
    • आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता- मंत्री श्री टंक राम वर्मा
    • युवाओं को ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
    • हेमांग जोशी बने BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीजेपी के सामने इतिहास रचने का मौका
    • घर के आंगन से 3 साल के मासूम को उठा ले गया तेंदुआ, इलाज के दौरान मौत
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Friday, August 21
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»संपादकीय»टूटी नाव की हुई तूफान से टक्कर…
    संपादकीय

    टूटी नाव की हुई तूफान से टक्कर…

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inApril 12, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    वसीम बरेलवी का यह शेर ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बाद इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर साझा किया था, जो वर्तमान स्थिति में काफी सटीक है।
    खुद को वैश्विक महाशक्ति समझने वाले अमेरिका को ईरान जैसे एक सामान्य देश ने वैâसे सबक सिखाया, यह पूरी दुनिया खुशी से देख रही है। ईरान का संघर्ष वहां की राष्ट्राभिमानी जनता का विद्रोह था। जब प्रे. ट्रंप ने एक ही रात में ईरान की सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करने की धमकी दी, तब ईरान की लाखों जनता अपनी सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए मानव शृंखला बनाकर सड़कों पर उतर आई। ईरान की डेढ़ करोड़ जनता बलिदान के लिए तैयार है, ऐसा उनके विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा और प्रे. ट्रंप को ‘शांति’ वार्ता के लिए मेज पर घसीट लाए, लेकिन यह ‘मेज’ पाकिस्तान के इस्लामाबाद में है, जो दुनिया में आतंकवादियों का प्रमुख केंद्र है। अमेरिका पर इतिहास का सबसे भयानक आतंकवादी हमला करने वाला ‘लादेन’ पाकिस्तान के आश्रय में था और अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर लादेन को मारा था। भारत में आतंकवादी हमले करने वाले सभी मोहरे पाकिस्तान की शरण में हैं। वही पाकिस्तान अब ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध में ‘शांतिदूत’ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिका ने उसे शांतिदूत के रूप में मान्यता दे दी है। प्रे. ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार की लालसा है, लेकिन युद्धखोर ट्रंप को ऐसा ‘शांति’ पुरस्कार देना ये ‘शांति’ की अवधारणा का अपमान है। क्या पता? शायद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और उनके सेना प्रमुख जनरल मुनीर को एक साथ नोबेल शांति पुरस्कार दे दिया जाए! ऐसी हलचलें शुरू हो गई हैं।
    प्रधानमंत्री क्या करते हैं?
    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति एक भिखारी राष्ट्र जैसी है। पाकिस्तान चीन जैसे देशों से कर्ज लेकर जीने वाला देश है। अमेरिका के पास मदद के लिए कटोरा लेकर हमेशा खड़ा रहने वाला देश पाकिस्तान है। फिर यही पैसा सेना और आतंकवाद को पालने में खर्च किया जाता है। पाक सेना की सारी अय्याशी इसी कर्ज के पैसे पर चलती है। इसी पैसे के दम पर पाकिस्तान भारत में आतंकवादी घुसाकर हमले करवा रहा है। अब क्या कहा जाए? पाकिस्तान कंगाल है, लेकिन ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे उपक्रम उन्होंने नहीं चलाए। पाकिस्तान में शिक्षा, रोजगार की धज्जियां उड़ी हुई हैं। फिर भी वैश्विक युद्ध रोकने का श्रेय अमेरिका ने पाकिस्तान को दे दिया। पाकिस्तान की विदेश नीति भारत से भी सरस साबित हुई! हम पाकिस्तान से हजार गुना आगे हैं, लेकिन इन वैश्विक घटनाओं में भारत ने कोई भूमिका नहीं निभाई। हमारे प्रधानमंत्री करते क्या हैं? क्या इस देश में सच में कोई प्रधानमंत्री है? देश का नेतृत्व करने के लिए अंधभक्तों ने लगातार चुनाव प्रचार में व्यस्त रहने वाला एक संघ प्रचारक चुना। वह संघ प्रचारक खुद को विश्वगुरु मानने लगा। कल के युद्ध की घटनाओं में विश्वगुरु का मुखौटा उतर गया।
    भारत गायब
    जनता के पैसे से लगातार दुनियाभर की यात्रा करना और वैश्विक नेताओं को गले लगाना विदेश नीति नहीं है। श्रीमान मोदी ने पिछले ११ वर्षों में केवल गले मिलने का और वैश्विक नेताओं के गले पड़ने का ही काम किया है। इससे हासिल कुछ नहीं हुआ।
    मोदी ने अब तक दो वैश्विक कार्यक्रम किए।
    – अपने पहले शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को विशेष रूप से आमंत्रित किया। उसका खूब ढिंढोरा पीटा गया।
    – उसी नवाज शरीफ की बेटी की शादी और शरीफ के जन्मदिन के अवसर पर मोदी विशेष रूप से केक खाने इस्लामाबाद गए। उस ‘मास्टरस्ट्रोक’ का तो शंखनाद ही किया गया।
    इन कारनामों को छोड़ दें तो मोदी ने वैश्विक स्तर पर कोई भी चमक नहीं दिखाई है। विदेश में ‘मोदी मोदी’ करने वाले किराए के अंधभक्तों को लाना और भारतीय मीडिया में उनका बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन दिखाना-इसके अलावा मोदी ने कुछ अलग किया हो, ऐसा दिखाई नहीं देता। मोदी के कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। असल में वे ऐसी कोई नीति ही बना नहीं पाए।
    जब पूरा ‘मध्य पूर्व’ (मिडिल ईस्ट) जल रहा था, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया था, दुनियाभर में तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब मोदी का भारत क्या कर रहा था?
    जब इजरायल ‘गाजा’ पर निर्दयी हमले कर छोटे बच्चों का कत्लेआम कर रहा था, तब मोदी का भारत क्या कर रहा था?
    जब तेहरान में लड़कियों के स्कूल पर इजरायल ने बमबारी कर २०० मासूम लड़कियों की जान ले ली, तब मोदी का भारत कहां था?
    अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संवाद में भारत की कोई भूमिका नहीं थी। इस वैश्विक संकट में भारत पूरी तरह से गायब था।
    ये गायब मोदी फिलहाल पांच राज्यों के चुनाव प्रचार में राजनीतिक विरोधियों पर रोज कीचड़ उछाल रहे हैं!
    जहाज भटक गया!
    ईरान-इजरायल, अमेरिका के झगड़े में भारत क्यों पड़े? उनका वो देख लेंगे, ऐसा तर्क जब मोदीभक्त देते हैं तब भारत के वैश्विक अस्तित्व को लेकर चिंता होने लगती है। अगर ऐसा ही है तो ‘विश्वगुरु’ जैसी स्वघोषित उपाधि की होली जला देनी चाहिए। ठीक है, फिर अमेरिका के चुनावी प्रचार का बिगुल भारत में फूंककर ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसा प्रचारी कार्यक्रम आयोजित करने का काम इन्होंने क्यों किया?
    भारत के पास वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और युद्ध के समय ‘शांतिदूत’ के रूप में काम करने का लंबा अनुभव है।
    विदेश नीति के मौजूदा अधकचरों को अगर आजादी के बाद का इतिहास खंगालने की फुर्सत मिले तो उन्हें ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे। भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद विश्व शांति के लिए बड़े काम किए हैं। कई देशों में युद्धविराम (cease fire) और शांति स्थापना में भारत ने निर्णायक भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन (UN Peace keeping) के माध्यम से भी भारत ने महान कार्य किए हैं।
    – कोरिया (१९५३): भारत ने दो कोरियाई देशों के बीच शुरू युद्ध की समाप्ति के लिए जो ‘आर्मिस्टिस समझौता’ (Armistice Agreement) हुआ, उसमें उल्लेखनीय भूमिका निभाई। भारत ‘न्यूट्रल नेशंस रिपैटिएशन कमीशन (NNRC) का अध्यक्ष था। युद्धबंदी की प्रक्रिया को आसान बनाने की जिम्मेदारी इस कमीशन के पास थी।
    -वियतनाम, लाओस, कंबोडिया (१९५४): चीन युद्ध के बाद की स्थिति को संभालने वाली अंतर्राष्ट्रीय समिति का नेतृत्व भारत के पास था।
    – स्वेज कैनाल संकट के समय जब ब्रिटेन, फ्रांस और इजरायल ने मिस्र पर हमला किया, तब भारत ने युद्धविराम के लिए कड़े कदम उठाए और चारों देशों के बीच शांति स्थापित करने की पहल की।
    – कांगो का संकट: १९६०-६४ के दौरान वहां के गृहयुद्ध को रोककर शांति स्थापित करने के लिए भारत ने वहां अपनी सेना भेजी। संयुक्त राष्ट्र के सफल अभियानों में ‘कांगो’ मिशन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
    – भारत ने १९५५ में तत्कालीन सोवियत संघ और ऑस्ट्रिया के बीच समझौता कराया, जिसके अनुसार सोवियत सेना की वापसी हुई और ऑस्ट्रिया ने तटस्थता की नीति अपनाई।
    -लेबनान, सूडान, दक्षिण सूडान, साइप्रस, लाइबेरिया, सोमालिया और रवांडा जैसे देशों में ‘शांति मिशन’ के माध्यम से भारत ने युद्धविराम कराया।
    भारत ने हमेशा अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर अपना स्वतंत्र मत और स्थान बनाए रखा, लेकिन मोदी इस मामले में विफल रहे।
    ‘ऑपरेशन सिंदूर’, पहलगाम हमले के निमित्त मोदी ने चुनिंदा सर्वदलीय सांसदों को वैश्विक मिशन पर भेजकर कई देशों को बताया कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है।
    ईरान-इजरायल, अमेरिका के बीच युद्धविराम में पाकिस्तान को ‘शांतिदूत’ का सम्मान मिलने से मोदी की विफलता उजागर हो गई।
    ईरान ने अमेरिका को झुका दिया। एक छोटी सी नाव ने तूफान से मुकाबला किया, लेकिन मोदी का जहाज उस तूफान में भटक गया और गायब हो गया।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    ईरान बनेगा ‘जापान’!

    August 21, 2026

    देश भर में ‘विरोध’, झुकीं व्यवस्थाएं

    August 20, 2026

    देशद्रोही हैं ‘दिमागी नक्सल’

    August 19, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.