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    Home»अजब गजब»दुनिया का वो देश, जहां लिखी जाती है हर एक किताब
    अजब गजब

    दुनिया का वो देश, जहां लिखी जाती है हर एक किताब

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inMay 20, 2026
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    दुनिया में किताबें पढ़ने वाले करोड़ों लोग हैं. हर कोई अपनी पसंदीदा किताब को बार-बार पढ़ता है और नई किताबों का इंतजार करता रहता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सारी किताबें आती कहां से हैं? एक अनोखा और मजेदार जवाब है– ‘बुकलैंड’.

    यह दुनिया का वो देश है जहां हर एक किताब लिखी जाती है. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बुकलैंड किसी भी नक्शे, ग्लोब या गुगल मैप पर मौजूद नहीं है. बुकलैंड एक थियोरिटिकल यानी सैद्धांतिक देश है. यह वास्तविकता में नहीं बल्कि किताब प्रेमियों की कल्पना में बसता है. लेखकों, कवियों और कहानीकारों के अनुसार जब भी कोई नई कहानी, उपन्यास या ज्ञान की किताब लिखी जाती है तो उसका जन्म बुकलैंड में ही होता है. यहां कल्पना की कोई सीमा नहीं है. यहां विज्ञान, रोमांच, रहस्य, इतिहास, फंतासी – हर तरह की किताबें तैयार होती है.

    क्यों बना बुकलैंड?
    दरअसल, दुनिया के हर एक चीज के ऊपर एक बारकोड बना होता हैं. उसके आधार पर पता चलता है कि आइटम किस देश में बना है. हर देश का अपना यूनिक कोड होता है. लेकिन किताब के मामले में उसे एक देश का बताना उचित नहीं था. ऐसे में एक्सपर्ट्स ने एक इमेजिनरी देश बुकलैंड बनाया और उसे एक कोड दे दिया. यही वजह है कि दुनिया की हर किताब के बारकोड में इसी देश का कोड इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में बड़ी समस्या सॉल्व हो गई. लेकिन ये देश असल में मौजूद नहीं है.

    कई लोग मानते हैं नागरिक
    बुकलैंड की अवधारणा कई दशकों पुरानी है. किताब प्रेमी इसे ‘दुनिया का सबसे अमीर देश’ मानते हैं क्योंकि यहां ज्ञान का खजाना भरा पड़ा है. इस देश की राजधानी ‘स्टोरीविले’ है जहां लेखक अपनी कहानियों को आकार देते हैं. यहां की सड़कें शब्दों से बनी हैं, नदियां स्याही की बहती हैं और पहाड़ कागज के बने होते हैं. यह सब कल्पना है लेकिन किताबों के शौकीनों के लिए यह जिंदगी से भी ज्यादा सच्चा लगता है. कई प्रसिद्ध लेखकों ने अपनी किताबों में बुकलैंड का जिक्र किया है. वे कहते हैं कि जब वे लिखते हैं तो उन्हें लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति उन्हें बुकलैंड से गाइड कर रही है. हर नई किताब बुकलैंड से निकलकर दुनिया के अलग-अलग देशों में पहुंचती है. यही वजह है कि चाहे आप भारत में हों, अमेरिका में हों या जापान में, आपकी पसंदीदा किताब कहीं ना कहीं बुकलैंड की देन होती है.

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