लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने बुधवार को भारत-चीन सीमा पर 16,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित चुमुर में पहले मॉडल सीमावर्ती गांव की आधारशिला रखी। अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में अपनी तरह की यह पहली परियोजना बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार और आजीविका सृजन, हर मौसम में संपर्क सुविधा और नागरिक-रक्षा के बीच बेहतर तालमेल पर केंद्रित होगी।
LG सक्सेना ने बताया कि चुमुर को ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत लद्दाख के पहले ‘मॉडल सीमा गांव’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस प्रोग्राम का मकसद ऊंची-ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में आत्मनिर्भर, जलवायु-अनुकूल, पर्यटन-सक्षम और आर्थिक रूप से समृद्ध सीमा गांव बनाना है।
इस पहल का उद्देश्य इस दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्र में, मुख्य रूप से खानाबदोश जीवन शैली से हटकर एक सुरक्षित और स्थायी बसावट की ओर बदलाव को सुगम बनाना है। चुमुर में 24 परिवार रहते हैं, जिनकी कुल आबादी 91 है। ये सभी लोग पश्मीना ऊन के लिए बकरियां पालने और उसके उत्पादन के काम में लगे हुए हैं।
लद्दाख सरकार के एक बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत इन गांवों के परिवारों को जलवायु-अनुकूल, दक्षिणमुखी ‘पैसिव सोलर’ (सौर ऊर्जा से चलने वाले) घर उपलब्ध कराए जाएंगे। इन घरों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये सौर ताप को अधिकतम मात्रा में ग्रहण कर सकें और कड़ाके की सर्दियों से लोगों की रक्षा कर सकें, जब यहां का तापमान गिरकर -35 डिग्री तक पहुंच जाता है।
हर परिवार को एक आवासीय इकाई मिलेगी, जिसमें एक संलग्न बाथरूम, ‘होमस्टे’ (अतिथि-सत्कार) गतिविधियों के लिए उपयुक्त एक अतिरिक्त कमरा, रसोई-बगीचे के लिए जगह, पशुओं के लिए बाड़ा और चारे के भंडारण के लिए विशेष सुविधा शामिल होगी। मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, इन घरों के इस साल सितंबर तक बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने बताया कि खाद्य सुरक्षा और आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, ‘डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च’ (DIHAR) के सहयोग से 90 x 27 फीट का एक व्यावसायिक ग्रीनहाउस स्थापित किया जाएगा, ताकि साल भर सब्जियों की खेती की जा सके। उन्होंने बताया कि इस ग्रीनहाउस में उत्पादित सब्जियां स्थानीय जरूरतों को पूरा करेंगी और सेना तथा ITBP सहित आस-पास स्थित रक्षा प्रतिष्ठानों को भी आपूर्ति की जाएंगी। इससे गांव वालों के लिए एक स्थायी बाजार तैयार होगा और साथ ही नागरिक-रक्षा सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
एलजी ने कहा कि एक ‘केंद्रीय सेवा केंद्र’ (Central Service Core) स्थापित किया जाएगा, जिसमें एक स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक भवन, पार्क, सामुदायिक कैफे और पर्यटक सूचना केंद्र (TIC) शामिल होंगे। यह केंद्र गांव में आवश्यक सेवाएं प्रदान करेगा और वहां के सामाजिक तथा आर्थिक जीवन को मजबूती प्रदान करेगा।”

