मास्को : युद्धग्रस्त रूस में इन दिनों एक बेहद खौफनाक और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है जहां ‘ब्लैक विडो’ नाम से जानी जाने वाली महिलाओं का एक गिरोह सक्रिय है। यह गिरोह जंग के मैदान में जाने वाले या अस्पतालों में भर्ती जख्मी सैनिकों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उनसे आनन-फानन में शादी रचाता है। इसके पीछे का मकसद किसी देशभक्ति या प्रेम का नहीं बल्कि सैनिक की मौत के बाद सरकार से मिलने वाले भारी-भरकम मुआवजे को हड़पना है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूरा फ्रॉड रूसी सरकार की उस मुआवजा नीति पर टिका है जिसके तहत युद्ध में मारे गए सैनिक के निकटतम परिजन (पत्नी या परिवार) को कम से कम 50 लाख रूबल (लगभग 54 से 55 लाख रुपये) की सहायता राशि दी जाती है। यह गिरोह ऐसे सैनिकों को निशाना बनाता है जो बेहद गरीब हैं कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं या जिनका दुनिया में कोई आगे-पीछे नहीं है।
सैनिक के मोर्चे पर जाने से ठीक दो-तीन दिन पहले गुप्त रूप से शादी रचा ली जाती है ताकि कानूनी कागजातों में महिला का नाम पत्नी के रूप में दर्ज हो जाए। सैनिक के शहीद होते ही यह महिलाएं सरकारी मुआवजे पर अपना पूरा दावा ठोक देती हैं जबकि सैनिक का असली परिवार पाई-पाई के लिए मोहताज रह जाता है।
बता दें कि इस फ्रॉड का शिकार सेंट पीटर्सबर्ग की रहने वाली 37 वर्षीय मारिया भी हुई हैं। मारिया के 59 वर्षीय पिता रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल हुए थे। जब मोर्चे से उनके पिता की मौत की खबर आई तो मारिया मुआवजा और डेथ सर्टिफिकेट लेने पहुंचीं।
वहां उन्हें पता चला कि उनके पिता ने मोर्चे पर जाने से महज 2 दिन पहले अपने से 22 साल छोटी एक अनजान महिला से चुपचाप शादी कर ली थी। मारिया के अनुसार उन्होंने कभी उस महिला का नाम तक नहीं सुना था लेकिन कानूनन पिता का सारा सरकारी पैसा उस अनजान औरत के खाते में चला गया।
रूसी मीडिया और अदालतों में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक मिलिट्री अस्पताल की नर्स पर बेहद संगीन आरोप लगे। उसने अस्पताल में भर्ती 5 गंभीर रूप से घायल सैनिकों को अपनी बातों में फंसाकर उनसे शादी रचाई। सैनिकों की मौत के बाद उसने तुरंत करोड़ों रुपये के सरकारी मुआवजे पर दावा ठोक दिया। खुलासा होने पर उसे नौकरी से बर्खास्त कर जांच शुरू की गई है।
वहीं जांच एजेंसियों को शक है कि इस रैकेट में सेना के कुछ भ्रष्ट अधिकारी भी शामिल हैं। आरोप है कि ये अफसर अनाथ और असहाय सैनिकों की जानकारी इन महिलाओं को देते थे और सैनिक की मौत के बाद मिलने वाली राशि को आपस में बांट लेते थे। रूसी जांच दल अब इस गिरोह के खिलाफ बड़े पैमाने पर तफ्तीश चला रहा है ताकि शहीद सैनिकों के असली परिवारों को उनका हक दिलाया जा सके।

