Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • नन्हे दिल को मिली नई धड़कन,’चिरायु योजना’ ने धमतरी के भाव्यांश को दिया नया जीवन
    • सेवा_संकल्प_अभियान”
    • 100 साल बाद खोजी गई बिल्ली की नई प्रजाति, तेंदुए जैसी खाल; वजन घरेलू बिल्ली से भी कम
    • गणपति विसर्जन के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान  हुए भावुक,बप्पा को विदाई देते समय उनकी आंखों से छलक पड़े आंसू…
    • पूर्व सरपंच के घर से 70 तोला सोना और ढाई किलो चांदी उड़ाई, दीवार कूदकर फरार हुए चोर…
    • ‘वाइब’ ने पहले दिन कमाए ₹2.25 करोड़,‘मडगांव एक्सप्रेस’ की ओपनिंग कलेक्शन को पछाड़ा
    • हाईकोर्ट में एक हिंदू और मुस्लिम लड़कियों का समलैंगिक जोड़ा सुरक्षा की मांग लेकर पहुंचा, हाईकोर्ट ने मामले पर कह दी बड़ी बात…
    • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर राजा डी किंग यानी राकेश त्रेहान 22 सितंबर को चंडीगढ़ में आईफोन लंगर का करेंगे आयोजन…
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, September 19
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»अंतर्राष्ट्रीय»सिंधु जल संधि रोकने का असर, पानी को तरसा पाकिस्तान का एक तिहाई हिस्सा
    अंतर्राष्ट्रीय

    सिंधु जल संधि रोकने का असर, पानी को तरसा पाकिस्तान का एक तिहाई हिस्सा

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inJune 13, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

     नई दिल्ली। आतंक को खाद पानी देने वाला पाकिस्तान इन दिनों खेतों में पानी देने के लिए तरस रहा है। भारत के सिंधु जल समझौते को रोक देने के बाद सिंध और बलूचिस्तान में पानी की भारी कमी से खेती वाले इलाकों में आर्थिक तबाही का डर पैदा हो गया है।

    पाकिस्तान के प्रायोजित पहलगाम आतंकी हमले के बाद नई दिल्ली द्वारा दशकों पुरानी संधि को रोक दिए जाने के कुछ महीनों बाद पाकिस्तान पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है। यह संकट अब सिंध और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में खेती, लोगों की आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए खतरा बन गया है।

    सिंध में सबसे ज्यादा असर

    पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर सिंध पर पड़ा है, जहां पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची स्थित है। यहां राजनेता, किसान और जल विशेषज्ञ पानी की घटती सप्लाई और असमान वितरण को लेकर लगातार चिंता जाहिर कर रहे हैं। सिंध और बलूचिस्तान में पानी की भारी कमी के कारण यह संकट पाकिस्तान की लगभग एक-तिहाई आबादी को प्रभावित कर रहा है।

    पहलगाम हमले के बाद भारत रुख सख्त

    पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का रुख सख्त रहा है। हमले पर भारत की प्रतिक्रिया ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई से कहीं आगे तक गई। नई दिल्ली के सबसे अहम कूटनीतिक कदमों में से एक था सिंधु जल संधि को कुछ समय के लिए रोक देना।

    इसी रुख को दोहराते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में साफ किया कि भारत का अपना रुख नरम करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, “पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को रोकते हुए हमने कहा कि जिनकी आंखों के आंसू सूख चुके हैं, उन्हें हमसे पानी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हम सिंधु का पानी आतंकवादियों के संरक्षकों और मानवता के दुश्मनों तक नहीं पहुंचने देंगे।”

    इन बयानों ने नई दिल्ली के इस रुख को और मजबूत किया है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते।

    सिंध में पानी की कितनी कमी?

    पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, सिंधु नदी पर बने सबसे बड़े और अहम सिंचाई ढांचों में से एक सुक्कुर बैराज के आसपास यह संकट तेजी से साफ दिखाई दे रहा है। यह बैराज सिंध और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में लाखों एकड़ खेती की जमीन के लिए पानी का स्रोत है इसलिए यह पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। सिंध के नहर नेटवर्क में पानी की कमी चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई है।

    डॉन के सूत्रों के मुताबिक, नॉर्थ वेस्ट नहर में 64.1 प्रतिशत, राइस नहर में 38 प्रतिशत और दादू नहर में 82 प्रतिशत की भारी कमी देखी जा रही है। ऊपरी इलाकों में पानी की अवैध निकासी और असमान वितरण के आरोपों से स्थिति और भी बिगड़ रही है।

    पंजाब को मिल रहा हक से ज्यादा पानी

    सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि पंजाब अपने तय हिस्से (44,000 क्यूसेक) के मुकाबले 53,394 क्यूसेक पानी ले रहा है, जो उसके हक से 21 प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह, कहा जा रहा है कि टौंसा बैराज अपने मंजूरशुदा हिस्से (24,000 क्यूसेक) के मुकाबले 25,694 क्यूसेक पानी ले रहा है, जो लगभग 9.3 प्रतिशत ज्यादा है।

    वहीं दूसरी ओर चश्मा बैराज में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे पता चलता है कि ऊपरी इलाकों में पानी जमा हो रहा है, जबकि निचले इलाकों में पानी की भारी कमी हो रही है।

    राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

    इस बिगड़ते संकट ने पाकिस्तान में तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की अगुवाई वाली सिंध सरकार पर आरोप लगाया है कि वह सालों तक सत्ता में रहने के बावजूद कराची में पानी की पुरानी किल्लत को दूर करने में नाकाम रही है।

    पीपीपी सिंध के अध्यक्ष निसार अहमद खुहरो ने बार-बार चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के सबसे ज्यादा कृषि उत्पादन वाले इलाकों में से एक होने के बावजूद सिंध को पानी का उसका वाजिब हिस्सा नहीं मिल रहा है।

    उन्होंने बताया कि सिंध हर साल लगभग 55 लाख टन चावल का उत्पादन करता है और चावल के निर्यात से लगभग 1.4 अरब डॉलर कमाता है। आर्थिक नतीजों के बारे में चेतावनी देते हुए खुहरो ने सिंध के खरीफ सीजन के पानी के आवंटन में कटौती को प्रांत का आर्थिक नरसंहार बताया।

    खुहरो ने कहा, “सिंध देश के कुल कृषि उत्पादन का 67 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है, फिर भी उसे पानी का उसका वाजिब हिस्सा नहीं मिल रहा है। नहरें सूखने से किसान परेशान। जमीनी स्तर पर संकट का असर दिखने लगा है।”

    डॉन के अनुसार, सुक्कुर बैराज सिस्टम की राइट बैंक नहरों में पानी की भारी कमी है। ये नहरें लरकाना, कंबर-शहदादकोट, दादू, शिकारपुर और बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों में सिंचाई करती हैं।

    सिंध आबादगार बोर्ड के कंबर-शहदादकोट चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष इशाक मुघेरी ने बताया कि नॉर्थ वेस्टर्न कैनाल में 64.1 प्रतिशत, राइस कैनाल में 38 प्रतिशत और दादू कैनाल में 82 प्रतिशत पानी की कमी है।

    आंकड़े दिखा रहे समस्या का दायरा

    दादू नहर, जिसके लिए 4,995 क्यूसेक पानी तय किया गया था, उसे अभी सिर्फ 860 क्यूसेक पानी मिल रहा है।

    नॉर्थ वेस्टर्न नहर को 6,260 क्यूसेक के तय हिस्से के मुकाबले 2,100 क्यूसेक पानी मिल रहा है।

    जबकि राइस नहर को 8,700 क्यूसेक के मंजूर हिस्से के मुकाबले 5,300 क्यूसेक पानी मिल रहा है।

    सालों से बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में देरी और सिंचाई नहरों का काम अधूरा रहने से स्थिति और खराब हो गई है, जिससे किसान मौसमी खेती शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

    पाकिस्तान के लिए एक बढ़ती चुनौती

    सिंधु नदी प्रणाली पर पाकिस्तान की निर्भरता ने लंबे समय से पानी की सुरक्षा को एक रणनीतिक मुद्दा बना दिया है। जैसे-जैसे पानी की कमी बढ़ रही है और पानी के बंटवारे को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो रहे हैं। यह संकट देश के सिंचाई प्रबंधन और कृषि बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को और ज्यादा उजागर कर रहा है।

    भारत के सिंधु जल समझौते पर कड़ा रुख बनाए रखने और बंटवारे को लेकर अंदरूनी विवादों के बढ़ने के साथ आने वाले महीनों में पाकिस्तान के सामने पानी की चुनौती और भी मुश्किल होती दिख रही है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    पाकिस्तान में जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद के पास धमाका, 15 की मौत; 50 से ज्यादा घायल

    September 18, 2026

    जंग के बीच अमेरिका जाएंगे पेजेश्कियान और अराघची, UN महासभा में होंगे शामिल

    September 18, 2026

    ‘ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों से समझौता नहीं’, अमेरिकी 100 प्रतिशत टैरिफ बिल पर भारत का जवाब

    September 17, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.