पीएम नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) फ्रांस (France) में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए एवियन में हैं। मंगलवार को इस शिखर सम्मेलन के दौरान करीब 16 महीने बाद पीएम मोदी की मुलाकात अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने ट्रंप को गले नहीं लगाया, बल्कि सिर्फ हाथ मिलाया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आखिरी बार पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात फरवरी 2025 में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में हुई थी।
आज होगी द्विपक्षीय मीटिंग
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच आज, बुधवार, 17 जून को द्विपक्षीय मीटिंग होगी। इस दौरान ईरान युद्ध (Iran War), मिडिल ईस्ट संकट (Middle East Crisis), रणनीतिक तौर पर अहम होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz), अमेरिका से ऊर्जा आयात और दोनों देशों के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) पर चर्चा हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश लंबे समय की ऊर्जा पार्टनरशिप पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को मज़बूत करने पर मुख्य रूप से बातचीत होगी। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील भी अंतिम चरण में है और आने वाले कुछ हफ्तों में इस पर मुहर लग सकती है, जिसके विषय में पीएम मोदी और ट्रंप बातचीत कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक साल की बातचीत के बाद इसी साल फरवरी की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। व्हाइट हाउस की तरफ से भी जानकारी दी गई कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच होने वाली द्विपक्षीय मीटिंग में दोनों देशों के बीच होने वाले ट्रेड डील बातचीत के मुख्य विषयों में से एक रहेगा, जिसका इंतज़ार भारत और अमेरिका दोनों को ही है।
पीएम मोदी ने उठाया भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा
मंगलवार को G7 शिखर सम्मेलन में संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री ने मिडिल ईस्ट में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत किया। इस युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में भारत के मित्र देशों में हुए जान-माल के नुकसान पर पीएम मोदी ने चिंता व्यक्त की। होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले समुद्री व्यापार में रुकावटों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव पर भी पीएम मोदी ने बात की और साथ ही कई भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समुद्री रास्ते से होने वाले वैश्विक व्यापार के ज़रिए देशों को जोड़ने वाले समुद्री-कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है और इसलिए सभी को यह ध्यान रखना होगा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और समुद्री-कर्मी बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।

