चेन्नई: बीजेपी छोड़ने वाले नेता के. अन्नामलाई के तमिलनाडु में नए आंदोलन ‘वी, द लीडर्स’ (We, the Leaders) के 19 लाख समर्थक हो चुके हैं। तमिलनाडु बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने पार्टी से इस्तीफा देकर उनके अभियान को जॉइन किया है। जब अन्नामलाई ने बीजेपी से त्यागपत्र दिया तब उनके राजनीतिक भविष्य पर कई सवाल खड़े किए गए। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने अपनी प्लानिंग और फैसलों पर बात की। अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि वह पक्के राष्ट्रवादी हैं। उनके मोदी और अमित शाह के साथ संबंध सभ्य बने रहेंगे, लेकिन दोस्ताना नहीं होंगे। उन्होंने थलपति विजय से प्रेरित होकर अलग राजनीतिक पार्टी बनाने और उपचुनाव लड़ने जैसे चर्चाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने डीएमके और एआईडीएमके की हार पर अपनी राय रखी।
बीजेपी में नजरिये का फर्क
अन्नामलाई ने कहा कि बीजेपी में मिली जिम्मेदारियों ने उन्हें बेहतर इंसान बनाने में मदद की, इसके लिए वह पार्टी के शुक्रगुजार रहेंगे। हालांकि बीजेपी के साथ सोच और नज़रिए में कुछ फ़र्क था। वह चाहते थे कि बीजेपी को तमिलनाडु में अपने दम पर खड़ा होना चाहिए। साथ ही, ज़मीनी स्तर के नेता तैयार करने चाहिए और तमिलनाडु को प्राथमिकता देनी चाहिए। तमिलनाडु के लोगों को लगता है कि फैसले दिल्ली से लिए जाते हैं। यह प्रदेश के हिसाब से सही नहीं है। वह चाहते थे कि तमिलनाडु में क्षेत्रीय जमीनी नेता होने चाहिए। इन सब कारणों से बंधा हुआ महसूस कर रहे थे। अन्नामलाई ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद से ही अलग होना चाहते थे, दिसंबर 2025 में उन्होंने पार्टी के नेताओं को अपने विचार से अवगत करा दिया था। फिर एक जून को उन्होंने खुद को बीजेपी से अलग कर लिया।
विजय की तारीफ की मगर
वी, द लीडर्स अभियान के प्रमुख अन्नामलाई ने कहा कि वह कभी भी तमिलनाडु में AIADMK के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं रहे। बीजेपी उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ाना चाहती थी, मगर उनके लिए एक सीट नहीं चुन सकी। विजय की पार्टी TVK की सफलता पर उन्होंने कहा कि पैसों की ताकत और जातिगत समीकरण तोड़ने के लिए करिश्माई छवि वाले नेता की जरूरत होती है। थलपति विजय ने अपने करिश्मे से इसे हासिल किया। DMK के ख़िलाफ़ एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) बहुत मज़बूत थी, जो विजय की जीत की एक वजह थी। उन्होंने कहा कि करिश्माई राजनीति को एक हद तक ही आगे ले जा सकता है। तमिलनाडु को ऐसे नेताओं की ज़रूरत है जो गवर्नेंस पर ध्यान दें, सबूतों के आधार पर काम करें, चुनाव लड़ें और लोगों के सामने जाएं। अन्नामलाई ने माना कि उन्हें लगता था कि विजय अच्छा करेंगे, हालांकि इतने बड़े वोट शेयर की उम्मीद नहीं थी।

