मुंबई: महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहज़ाद भट्टी से जुड़े संदिग्ध लोगों के खिलाफ राज्यभर में बड़े स्तर पर जांच अभियान शुरू किया है। एजेंसी के अनुसार, शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि भट्टी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय युवाओं तक पहुंच बनाकर उन्हें देश-विरोधी गतिविधियों के लिए प्रभावित करने और अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। इसी इनपुट के आधार पर एटीएस ने 102 ऐसे लोगों को चिन्हित किया है, जिनकी गतिविधियां जांच के दायरे में हैं।
जांच में सामने आई ये बात
एटीएसी ने यह भी आशंका जताई है कि आर्थिक रूप से कमजोर और बेरोजगार युवाओं को आसान कमाई का लालच देकर अपने जाल में फंसाने की कोशिश की जाती है। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इन लोगों का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर ‘स्लीपर सेल’ तैयार करने, संवेदनशील सूचनाएं जुटाने, मादक पदार्थों की तस्करी या अवैध हथियारों की आवाजाही जैसी गतिविधियों के लिए तो नहीं किया जा रहा।
58 टीमें शामिल की गई
एटीएस के इस विशेष अभियान में महाराष्ट्र की 14 क्षेत्रीय यूनिटों की 58 टीमें शामिल की गई हैं। अधिकारी इन संदिग्ध लोगों के ठिकानों, संपर्कों और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर रहे हैं। एजेंसी का कहना है कि जांच का उद्देश्य किसी भी संभावित देश-विरोधी नेटवर्क का समय रहते पता लगाना और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाली गतिविधियों को रोकना है।
भारतीय युवाओं को ऐसा जाल में फंसा रहे
जांच एजेंसियों के मुताबिक, शहजाद भट्टी के साथ आबिद जाट उर्फ आबिद छाल, अजमल गुर्जर, हम्माद मेमन, राणा हुनैन और अशरफ बशीर आलम जैसे सहयोगियों के नाम भी सामने आए हैं। आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय युवाओं से संपर्क स्थापित करता है। इसके बाद सामाजिक और धार्मिक मुद्दों से जुड़े भड़काऊ कंटेंट के जरिए उन्हें प्रभावित करने और कट्टरपंथ की ओर धकेलने का प्रयास किया जाता है।
युवाओं को सतर्क रहने की सलाह
जांच के साथ-साथ ATS ने आम नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। एजेंसी ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति से संपर्क करने या आकर्षक नौकरी और कमाई के झूठे प्रस्तावों पर भरोसा करने से बचें। ऐसे प्रस्ताव किसी बड़े आपराधिक या आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। माता-पिता से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उनके व्यवहार में किसी भी असामान्य बदलाव को गंभीरता से लें।

