गाय के पेशाब को आयुर्वेद में बहुत स्वास्थ्यवर्धक और महत्वपूर्ण बताया गया है। इसे शरीर के लिए संजीवनी की तरह माना गया है। भारत में इस विषय को लेकर काफी मतभेद हैं। लेकिन अमेरिका में गोमूत्र को एक ताकतवर एजेंट के रूप में पेटेंट भी करवा दिया गया है। इसमें शरीर के लिए फायदेमंद कई सारी प्रोपर्टी पाई गई हैं।
गाय के पेशाब को गोमूत्र कहा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे गौमूत्र और कामधेनु अर्क भी कहते हैं। भारत में गाय को पवित्र माना जाता है और प्राचीन मान्यता है कि इसके पेशाब यानी गोमूत्र में शरीर के लिए कई सारे स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं। भारत में यह विवाद का विषय जरूर है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में गोमूत्र का पेटेंट भी हो चुका है। वैज्ञानिकों ने इसके अंदर ऐसे गुण देखे हैं, जो इंसान के शरीर को परेशानियों से दूर रख सकते हैं।
आयुर्वेद में गोमूत्र का महत्व
एनसीबीआई पर मौजूद शोध के मुताबिक, आयुर्वेद में गोमूत्र को कामधेनु अर्क भी कहा गया है। सुश्रुत संहिता, अष्टांग संग्रह जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसके कई सारे औषधीय गुणों के बारे में विस्तार से बताया गया है। गोमूत्र को सभी जानवरों के पेशाब में सर्वोत्तम माना गया है। आयुर्वेद में इसे संजीवनी और अमृत के नाम से भी संबोधित किया गया है।
क्यों और किसने करवाया पेटेंट?
अमेरिका में गोमूत्र का पेटेंट भारत की काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने करवाया है। साल 2002 में यूएस पेटेंट नंबर 64,10,059 और 68,96,907 गाय के पेशाब (काऊ यूरिन डिस्टिल्लेट) की बायो-एन्हांसर और एंटीबायोटिक, एंटीफंगल और एंटी-कैंसर प्रोपर्टीज के लिए दिया गया है।
गाय के पेशाब का फायदा
गाय के पेशाब (काऊ यूरिन डिस्टिल्लेट) में भारत के शोधकर्ता और वैज्ञानिकों ने बायो-एन्हांसर प्रोपर्टीज पाई हैं। मतलब यह एंटीबायोटिक्स, एंटीमाइक्रोबिल, एंटी-इंफेक्टेड और एंटी-कैंसर वाली दवाओं में मिलाने से उनका प्रभाव शरीर में कई गुना बढ़ जाता है और जल्दी आराम मिलता है। इसलिए दवाओं में इसका मिक्सचर मिलाने को लेकर पेटेंट लिया गया है।
क्या होता है काऊ यूरिन डिस्टिल्लेट?
शोध गोमूत्र को कोई विषाक्त पदार्थ नहीं बताता है। इसके अंदर पानी, यूरिया, मिनरल्स, साल्ट, हॉर्मोन और एंजाइम होते हैं। जब इसे डिस्टिलेशन प्रोसेस से भाप बनाकर शुद्ध किया जाता है तो अशुद्धियां निकल जाती है। इसके बाद बचे हुए शुद्ध गोमूत्र को काऊ यूरिन डिस्टिल्लेट कहा जाता है, जो गाय के पेशाब के सामान्य रूप से भी ज्यादा प्रभावशाली होता है।

