टॉयलेट में खून दिखने पर ज्यादातर लोग इसे बवासीर समझ लेते हैं. बवासीर खून आने की एक आम वजह जरूर है, लेकिन इसके अलावा कब्ज, सख्त मल, गुदा में दरार, आंतों में सूजन और पॉलीप जैसी कई स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं. कुछ मामलों में मल में खून आना कोलन या मलाशय के कैंसर का लक्षण भी होता है. इसलिए बार-बार खून आने पर इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.
बवासीर के अलावा इन वजहों से भी आता है खून
टॉयलेट में चमकीले लाल रंग का खून दिखना बवासीर का सामान्य लक्षण माना जाता है. खासकर मल त्याग करते समय जोर लगाने या कब्ज की स्थिति में बवासीर से खून आ सकता है. गुदा में छोटी सी दरार यानी एनल फिशर भी खून आने की आम वजह है. इसमें मल त्याग करते समय दर्द या जलन भी महसूस हो सकती है. इसके अलावा लंबे समय तक रहने वाली कब्ज, सख्त मल, आंतों में सूजन, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, पॉलीप और आंतों से जुड़ी दूसरी समस्याओं के कारण भी ब्लीडिंग हो सकती है. इसलिए सिर्फ खून के रंग या मात्रा को देखकर खुद से बीमारी तय करना सही नहीं है.
इन लक्षणों के साथ खून आए तो रहें सावधान
कानपुर के स्वरूप नगर में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉ. श्रॉफ के मुताबिक, मल में खून के साथ अगर लंबे समय तक कब्ज या दस्त रहते हैं, मल का आकार या आदत बदल जाती है, पेट में दर्द या ऐंठन होती है, वजन बिना कोशिश के कम होने लगता है या लगातार थकान महसूस होती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. कोलन और मलाशय के कैंसर में मल में खून या मलाशय से ब्लीडिंग के अलावा मल त्याग की आदत में बदलाव, पेट की परेशानी, वजन कम होना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर ही है. यही लक्षण कई दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं.सही कारण की जानकारी जांच के बाद ही मिलती है.
ज्यादा खून आए तो तुरंत लें मेडिकल मदद
अगर टॉयलेट में लगातार खून आ रहा है, खून की मात्रा ज्यादा है, टॉयलेट का पानी लाल हो रहा है या बड़े-बड़े खून के थक्के दिखाई दे रहे हैं, तो इसे सामान्य मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है. चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस होना भी ज्यादा ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है. मल का रंग बहुत गहरा या काला होना और उसके साथ खून आना भी डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने की वजह है. बार-बार या बिना स्पष्ट वजह के होने वाली ब्लीडिंग की जांच जरूरी होती है. डॉक्टर लक्षणों के आधार पर शारीरिक जांच, ब्लड टेस्ट, स्टूल टेस्ट या जरूरत पड़ने पर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं.
डिसक्लेमर : इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

