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    Home»छत्तीसगढ़»श्री राजीव लोचन का जन्मोत्सव, भक्तों ने किया दिव्य रूप का दर्शन
    छत्तीसगढ़

    श्री राजीव लोचन का जन्मोत्सव, भक्तों ने किया दिव्य रूप का दर्शन

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inFebruary 13, 2025
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    गरियाबंद 12 फरवरी 2025/ माघ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान श्री राजीव लोचन का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर का पट खोला गया। मंदिर के सर्वकार चंद्रभान सिंह ठाकुर ने बताया कि भगवान राजीव लोचन के जन्मोत्सव के अवसर पर राजिम में सदियो से मेला लगते आ रहा है। यह मेला 15 दिनों तक चलता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जगन्नाथपुरी से भगवान जगन्नाथ राजीव लोचन मंदिर दर्शन करने आते है। इस कारण आज के दिन पुरी के मंदिर का पट बंद रहता है। आज राजीव लोचन की प्रतिमा का श्रृंगार पीताम्बरी, चंदन, काछनी से किया गया। ब्रममूहूर्त में भगवान के बाल रूप की आरती की जाती है। भगवान को अनरसा, सूखा मेवा, पिडिया और मिष्ठान का भोग लगाया जाता है। श्री ठाकुर ने बताया कि दोपहर तक भगवान का रूप बाल अवस्था में रहता हैं। 1 बजे के बाद भगवान राजीव लोचन को मुकुट के स्थान पर पगड़ी धारण कर वस्त्र पहनाया जाता है। इस समय वे युवा अवस्था में रहते है। दोपहर 12 बजे के बाद शिखर पर नया ध्वज चढ़ाया गया। आज पंचामृत से अभिषेक कर भगवान राजीव लोचन का सर्वांग स्नान कराया गया। श्रृंगार होने के बाद भगवान श्री राजीव लोचन अत्यंत ही मनमोहक नजर आ रहे हैं। मंदिर का पट प्रातः तीन बजे से रात्रि 8.30 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। उसके बाद आरती होती है। जिसे गौरी आरती कहते है। 15-20 मिनट के लिए पट बंद होता है, जिसमें श्रृंगार उतार दिया जाता है। जिसके बाद भगवान के वृद्धावस्था रूप का दर्शन होता है। भगवान राजीव लोचन शंख, चक्र, पदम, गदा से अलंकृत होते है। साथ में लक्ष्मी और माया उनके साथ होती है।
    तीन क्विंटल फूलों से सजाया मंदिर का गर्भगृह – भगवान श्री राजीवलोचन का गर्भगृह और मंदिर के महामण्डप को तीन क्विंटल से अधिक गेंदा फूलों से खंभे एवं दीवाल को आकर्षक ढंग से सजाया गया हैं, जो कि बहुत ही आकर्षक दिखाई दे रहा है। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु इसकी भव्यता और सुन्दरता को देखकर अति प्रसन्न हो रहें है। मंदिरो में रही अच्छी भीड़ इस बार माघ पूर्णिमा से ही श्रध्दालुओं की भीड़ देखने को मिली। श्री कुलेश्वर नाथ मंदिर में कतारबध्द होकर अपने बारी का इंतजार करते रहें। संगम में हर-हर गंगे, हर-हर महादेव, जय राजीव लोचन शब्द से जयकारा होती रही। नारियल धूप अगरबत्ती फूल आदि चढ़ाकर श्रध्दा सुमन अर्पित करते रहें। राजिम कुंभ कल्प के पहले दिन भीड़ अच्छी दिखाई दी।

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