भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के सांसद जगदंबिका पाल ने बुधवार को कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक अब संसद से पारित हो चुका है और इस पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की जा चुकी है। फिर भी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआइएमपीएलबी) लगातार लोगों को भड़काने का काम क्यों कर रहा है, इस पर उन्होंने सवाल उठाए।
उन्होंने बंगाल सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह विधेयक मुसलमानों के लाभ के लिए लाया गया था, लेकिन मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब हिंदू समुदाय वहां से पलायन करने को मजबूर है। पाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन समस्याओं की अनदेखी कर इमामों से मुलाकात कर रही हैं।
राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर उन्होंने चिंता जताई और कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि वहां राष्ट्रपति शासन लगाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बंगाल में हिंदू समुदाय डर के साये में जी रहा है, क्योंकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस हिंसा को रोकने में नाकाम रही है और विपक्षी दल भी चुप हैं। शिवसेना प्रवक्ता नरेश म्हास्के ने भी इस हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि यह घटनाएं राज्य सरकार और पुलिस की नाक के नीचे हो रही हैं, इसलिए राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में भी हिंसा पर चिंता जताई गई थी, जिसमें सीजेआई और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रदर्शनकारियों की हिंसा से संबंधित चिंता व्यक्त की। हालांकि, मुस्लिम याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल ने इस पर विरोध किया।
बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ हिंसा के बाद हिंदुओं का बड़ी संख्या में पलायन हुआ है, और भानगढ़ क्षेत्र से भी हिंसा की खबरें आई हैं।

