Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ‘मैं अब पूरी तरह थक चुका हूं’, पत्नी की प्रताड़ना से परेशान इंजीनियर ने फांसी लगाकर दी जान
    • थोक में महंगाई की मार
    • ट्रंप का बड़ा दावा, अमेरिका और नाइजीरिया की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ISIS आतंकी अबू-बिलाल अल-मिनुकी की मौत
    • LSG ने CSK को 7 विकेट से हराया, 188 रन का लक्ष्य आसानी से किया हासिल
    • पाकिस्तान में रिलीज़ होते ही धुरंधर-2 नंबर 1 पर कर रहा ट्रेंड, OTT प्लेटफॉर्म हुआ क्रैश
    • “कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं”, सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान की सख्त टिप्पणी
    • काम पर जा रहे मजदूरों को डंपर ने मारी टक्कर, 4 महिलाओं की हुई मौत
    • आम लोगों को मिली राहत, भारत-नेपाल सीमा से कस्टम ड्यूटी नियम पर  नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, May 16
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»धर्म आस्था»नवरात्रि की सप्तमी पर कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा? जानें पूरी विधि, मंत्र और कथा
    धर्म आस्था

    नवरात्रि की सप्तमी पर कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा? जानें पूरी विधि, मंत्र और कथा

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inSeptember 28, 2025
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    सनातन परंपरा में नवरात्रि की साधना का ​सातवां दिन बेहद खास माना गया है क्योंकि इस दिन देवी के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा होती हैं. मां भगवती का यह स्वरूप घनघोर अंधकार के समान काला है. इसी कारण से देवी के भक्त इन्हें कालरात्रि बुलाते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार देवी दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा करने से साधक के जीवन की सारी बाधाएं और भय दूर होते हैं. आइए मां कालरात्रि की पूजा करने की विधि, मंत्र, नियम और धार्मिक महत्व को जानते हैं.

    मां कालरात्रि की कैसे करें पूजा?

    मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए साधक को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए. इसके बाद साफ कपड़े पहनकर देवी के व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद घर के ईशान कोण में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां कालरात्रि का चित्र या मूर्ति रखना चाहिए. इसके बाद उसे गंगाजल से पवित्र करने के बाद देवी को लाल चंदन या रोली का तिलक लगाना चाहिए.

    इसके बाद फल-फूल, धूप-दीप, आदि से देवी की पूजा करें. नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि को गुड़हल का फूल और गुड़ का भोग जरूर अर्पित करना चाहिए. इसके बाद माता के मंत्र, श्लोक या स्तोत्र आदि का पाठ करें फिर पूजा के अंत मां कालरात्रि की पूरे श्रद्धा भाव से आरती करें.

    मां कालरात्रि की पूजा का मंत्र

    नवरात्रि की शक्ति साधना में देवी मंत्र का जप करना बेहद शुभ और मंगलदायी माना गया है. मान्यता है कि मंत्र का जाप करने पर देवी दुर्गा शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. आइए मां कालरात्रि का मंत्र जपते हैं –

    ॐ ऐं ह्रीं क्रीं कालरात्रै नमः.

    या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:.

    मां कालरात्रि के श्लोक का करें पाठ

    एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता.

    लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी.

    वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा.

    वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी.

    मां कालरात्रि की कथा

    पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार जब देवता और मनुष्य रक्तबीज नाम के राक्षस से परेशान होकर महादेव की शरण में पहुंचे तो महादेव ने मां पार्वती को उसका वध करने को कहा. इसके बाद मां पार्वती ने कालरात्रि का रूप लेकर रक्तबीज के साथ युद्ध किया. रक्तबीज की खासियत थी कि जब भी उसके शरीर से एक भी बूंध खून धरती पर गिरता था तो उसके जैसा एक और राक्षस पैदा हो जाता था, लेकिन मां कालरात्रि ने जब उसका वध किया तो उसके रक्त को पृथ्वी पर गिरने से पहले ही अपने मुंह में भर लिया. इस तरह मां कालरात्रि ने रक्तबीज का वध करके देवता और मनुष्यों का अभय प्रदान किया.

    मां कालरात्रि की पूजा का धार्मिक महत्व

    हिंदू मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि की पूजा करने से साधक के जीवन से जुड़ी सभी बाधाएं दूर होती हैं. मां कालरात्रि की कृपा से व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है. उसका शत्रुभय दूर होता है और वह निर्भय होकर जीवन जीता है. हिंदू मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि की साधना करने वाला साधक हमेशा बुरी शक्तियों से बचा रहता है और उसे प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है.

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    शुक्र-गुरु युति: इन राशि वालों के लिए करियर, धन और रिश्तों में बड़े बदलाव के संकेत

    May 15, 2026

    अधिक मास 17 मई से शुरू, इन कामों से करें परहेज

    May 13, 2026

    निर्जला एकादशी कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    May 12, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.