Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • नन्हे दिल को मिली नई धड़कन,’चिरायु योजना’ ने धमतरी के भाव्यांश को दिया नया जीवन
    • सेवा_संकल्प_अभियान”
    • 100 साल बाद खोजी गई बिल्ली की नई प्रजाति, तेंदुए जैसी खाल; वजन घरेलू बिल्ली से भी कम
    • गणपति विसर्जन के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान  हुए भावुक,बप्पा को विदाई देते समय उनकी आंखों से छलक पड़े आंसू…
    • पूर्व सरपंच के घर से 70 तोला सोना और ढाई किलो चांदी उड़ाई, दीवार कूदकर फरार हुए चोर…
    • ‘वाइब’ ने पहले दिन कमाए ₹2.25 करोड़,‘मडगांव एक्सप्रेस’ की ओपनिंग कलेक्शन को पछाड़ा
    • हाईकोर्ट में एक हिंदू और मुस्लिम लड़कियों का समलैंगिक जोड़ा सुरक्षा की मांग लेकर पहुंचा, हाईकोर्ट ने मामले पर कह दी बड़ी बात…
    • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर राजा डी किंग यानी राकेश त्रेहान 22 सितंबर को चंडीगढ़ में आईफोन लंगर का करेंगे आयोजन…
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Saturday, September 19
    • खानपान-सेहत
    • फीचर
    • राशिफल
    • लेख-आलेख
    • व्यापार
    • बिलासपुर
    • रायपुर
    • भिलाई
    • राजनाँदगाँव
    • कोरबा
    Chhattisgarh RajyaChhattisgarh Rajya
    Home»राष्ट्रीय»भारत के FCRA संशोधन विधेयक पर अमेरिका ने जताया ऐतराज, कहा- “चर्चों और चेरिटी पर सरकारी कब्जे की कोशिश”
    राष्ट्रीय

    भारत के FCRA संशोधन विधेयक पर अमेरिका ने जताया ऐतराज, कहा- “चर्चों और चेरिटी पर सरकारी कब्जे की कोशिश”

    chhattisgarhrajya.inBy chhattisgarhrajya.inAugust 5, 2026
    Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    संसद के मानसून सत्र में पेश एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सियासत गरमा गई है। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने इस बिल को ईसाइयों पर सीधा हमला बताते हुए दावा किया है कि नए नियमों से सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों पर कब्जा करने का अधिकार मिल जाएगा। मूर की इस सख्त टिप्पणी ने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    अमेरिकी सांसद का आरोप: “चर्चों और चेरिटी पर सरकारी कब्जे की कोशिश”

    अमेरिकी कांग्रेस सदस्य (सांसद) राइली मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए भारत सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। भारत में ईसाई धर्म के सदियों पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए मूर ने लिखा:

    “ईसा मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद सेंट थॉमस मालाबार तट (केरल) आए थे। भारत में ईसाइयत का इतिहास बेहद प्राचीन है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय संसद ऐसे संशोधनों पर विचार कर रही है जो सरकार को चर्चों और धार्मिक धर्मार्थ संस्थाओं का अधिग्रहण करने की अनुमति देंगे।”

    मूर ने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ी चिंता का विषय बन सकता है।

    क्या हैं FCRA बिल 2026 के प्रमुख और विवादित प्रस्ताव?

    विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन के लिए लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी दान प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), धार्मिक निकायों और शैक्षणिक संस्थानों पर निगरानी को कड़ा करना है।

    डेजिग्नेटेड अथॉरिटी का गठन: सबसे विवादित प्रस्ताव एक केंद्रीय प्राधिकारी (Designated Authority) की नियुक्ति का है। यदि किसी संस्था का पंजीकरण रद्द होता है, समय सीमा समाप्त होती है या सरेंडर किया जाता है, तो यह अथॉरिटी विदेशी फंडिंग से बनी संपत्ति और फंड का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है।

    रिफंड और न्यूनतम उपयोग की शर्त: पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान Rs 10 लाख से कम विदेशी फंड प्राप्त या उपयोग करने वाली संस्थाओं का पंजीकरण नवीनीकृत नहीं किया जाएगा।

    फंड ट्रांसफर पर सख्ती: विदेशी चंदे को किसी अन्य संस्था में ट्रांसफर करने पर पूरी तरह रोक लगाने और प्रोजेक्ट्स, वेबसाइट्स व सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देना अनिवार्य किया गया है।

    सुरक्षा और पारदर्शिता बनाम विदेशी दबाव

    भारत सरकार का हमेशा से यह स्पष्ट रुख रहा है कि विदेशी धन का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों, अवैध धर्म परिवर्तन या विकास कार्यों में अड़ंगा लगाने के लिए नहीं होना चाहिए।

    पहलूसरकारी/समर्थक पक्षआलोचक/विदेशी संस्थाओं का पक्ष
    पारदर्शिताफंडिंग के पारदर्शी इस्तेमाल से मनी लॉन्ड्रिंग और फंडिंग के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी।अत्यधिक सरकारी नियंत्रण से स्वतंत्र सामाजिक और धार्मिक कार्य प्रभावित होंगे।
    सुरक्षाराष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।सिविल सोसाइटी और एनजीओ की आवाज को दबाने का प्रयास।

    पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

    यह पहली बार नहीं है जब FCRA को लेकर विदेशी मंचों पर हंगामा हुआ हो। इससे पहले भी एमनेस्टी इंटरनेशनल, कॉम्पेसन इंटरनेशनल और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) जैसी कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय संस्थाओं के FCRA लाइसेंस रद्द या निलंबित किए जा चुके हैं। भारत का गृह मंत्रालय साफ कर चुका है कि देश का कानून सभी के लिए समान है और विदेशी नियमों का अनुपालन न करने वाली संस्थाओं पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email
    chhattisgarhrajya.in
    chhattisgarhrajya.in
    • Website

    Related Posts

    हाईकोर्ट में एक हिंदू और मुस्लिम लड़कियों का समलैंगिक जोड़ा सुरक्षा की मांग लेकर पहुंचा, हाईकोर्ट ने मामले पर कह दी बड़ी बात…

    September 19, 2026

    भारत-भूटान के बीच आपसी सहयोग पर हुई चर्चा, इन मुद्दों पर बनी सहमति

    September 19, 2026

    केंद्र सरकार ने की 14 नए जजों की नियुक्ति की घोषणा, दिल्ली को 7 और झारखंड-कर्नाटक को 3-3

    September 19, 2026

    Address - Gayatri Nagar, Near Ashirwad Hospital, Danganiya, Raipur C.G.

    Chandra Bhushan Verma
    Owner & Editor
    Mobile - 9826237000 Email - chhattisgarhrajya.in@gmail.com
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.