अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। अमेरिकी सरकार ने कुछ देशों के नागरिकों के लिए नया Visa Bond नियम लागू किया है। इसके तहत B1/B2 वीजा के कुछ आवेदकों को अमेरिका जाने से पहले बड़ी रकम जमा करनी पड़ सकती है।
यह रकम 10,000, 15,000 या 20,000 अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है। हालांकि, भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए राहत की खबर है। भारत को इस नई सूची में शामिल नहीं किया गया है। यानी फिलहाल भारतीय नागरिकों को सिर्फ इस नियम के कारण 20,000 डॉलर तक का वीजा बॉन्ड (Visa Bond) जमा नहीं करना होगा। वहीं, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश समेत 50 देशों के नागरिक इस नियम के दायरे में हैं।
50 देशों के नागरिकों पर लागू हुआ वीजा बॉन्ड (Visa Bond)
अमेरिकी विदेश विभाग ने वीजा बॉन्ड (Visa Bond) के लिए प्रभावित देशों की संशोधित सूची जारी की है। इसमें उन देशों को शामिल किया गया है, जहां से आने वाले B1/B2 वीजा धारकों के ओवरस्टे से जुड़े आंकड़ों को ध्यान में रखा गया है। बता दें इस नियम के तहत हर एप्लीकेंट को बॉन्ड देना जरूरी नहीं होगा। अगर किसी एप्लीकेंट को बॉन्ड के लिए चुना जाता है, तो कांसुलर अधिकारी इसकी रकम तय करेंगे। रकम 10,000 डॉलर से लेकर 20,000 डॉलर तक हो सकती है। यह नियम टूरिस्ट और बिजनेस विजिट के लिए जारी B1/B2 वीजा पर लागू है। दक्षिण एशिया की बात करें तो नेपाल और बांग्लादेश इस सूची में हैं। भूटान को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।
भारत के लोगों को क्यों मिली राहत?
भारतीय पासपोर्ट धारकों को फिलहाल इस Visa Bond नियम से छूट दी गई है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों को B1/B2 वीजा के लिए सिर्फ इस नियम के आधार पर 10,000 से 20,000 डॉलर तक का बॉन्ड जमा नहीं करना होगा। हालांकि, अन्य अमेरिकी वीजा नियम और पात्रता शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी। बता दें अमेरिकी विदेश विभाग ने आवेदकों को खास सावधानी बरतने को कहा है। बॉन्ड का भुगतान तभी करना है, जब कांसुलर अधिकारी ऐसा निर्देश दें।
कैसे जमा होगा बॉन्ड…? कब मिलेगा पैसा वापस?
जिन आवेदकों पर यह नियम लागू होगा, उन्हें DHS Form I-352 से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद Pay.gov के जरिए बॉन्ड की शर्तों को स्वीकार करना होगा। बॉन्ड आवेदक खुद जमा कर सकता है। इसके अलावा कोई रिश्तेदार, दोस्त या बिजनेस पार्टनर भी उसकी ओर से रकम (पैसा) जमा कर सकता है। अगर बॉन्ड की सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो जमा की गई रकम वापस की जा सकती है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में तय अवधि से ज्यादा रुकने यानी ओवरस्टे को कम करना है। बॉन्ड प्रोग्राम के तहत आने वाले यात्रियों के लिए अमेरिका में प्रवेश और बाहर निकलने के तरीके भी निर्धारित किए गए हैं। उन्हें निर्धारित कमर्शियल एविएशन सुविधाओं का इस्तेमाल करना होगा। कुछ अन्य माध्यमों से यात्रा की अनुमति नहीं होगी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था B1/B2 वीजा ओवरस्टे से जुड़े आंकड़ों और संबंधित नियमों के आधार पर लागू की गई है।

