लेख-आलेख

  • सहकारिता का नया आयाम भारत टैक्सी…

    भारत टैक्सी रोजगार, मोबिलिटी, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है। यह एक जीता-जागता उदाहरण है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे देश के हित में काम कर सकता है। जैसे यूपीआई ने भुगतान को बदला, वैसे ही भारत टैक्सी जैसे ओएनडीसी पर आधारित प्लेटफॉर्म सेवा और ई-कॉमर्स को बदल देंगे… पांच फरवरी 2026 को, गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह…

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  • हड़ताल श्रमिक अधिकारों को कमजोर करती है-एस. पी. तिवारी

    आर्टिकल- चार नयी श्रम संहिताओं का क्रियान्वयन, भारत की विशाल श्रम शक्ति, विशेष रूप से अनौपचारिक और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए जीवन यापन में आसानी में सुधार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सुधारों का उद्देश्य, बिना जटिल उद्योग वर्गीकरण की बाधाओं के, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देना है।…

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  • विकसित भारत 2047 की ओर स्मार्ट रास्ता – हड़ताल नहीं, बल्कि श्रम संहिता-डॉ. दीपक जायसवाल

    आर्टिकल- पीढ़ियों से, भारत के श्रमिकों ने एक पुरानी और टुकड़ों में बंटी श्रम प्रणाली का बोझ उठाया है, जो अक्सर उनके वेतन, सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा की रक्षा करने में विफल रही है। असंगठित, संविदा और उभरते गिग क्षेत्रों के करोड़ों श्रमिक नीति-परिदृश्य में अदृश्य रहे हैं और बुनियादी सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहे हैं। चार श्रम संहिताएँ…

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  • भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के प्रति प्रतिबद्धता-श्री राजेश अग्रवाल

    ”आर्टिकल ”भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: विश्व के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्र का निर्माण भारत का यूरोप के साथ 250 ईसा पूर्व से एक समृद्ध व्यापारिक संबंध रहा है, जो सिल्क रोड से भी पहले की अवधि है। अगले 2000 वर्षों के अधिकांश हिस्से के दौरान, भारतीय मसलिन, कपास, हस्तशिल्प, मसाले, पन्ना और रत्न अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सबसे पसंदीदा…

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  • यूरोप के साथ मुक्त व्यापार आसान नहीं… 

    इस सप्ताह के अंत तक, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य अतिथि थीं, संभवत: उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगी, जिसे उन्होंने ‘ऐतिहासिक’ बताया है-भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता। ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहे जाने वाले इस मुक्त व्यापार समझौते का परिणाम 2 दशकों से रुकी हुई बातचीत के बाद सामने आया है।…

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  • राष्ट्रीय सुरक्षा, राहुल की राजनीतिक अपरिपक्वता

    यह प्रश्न केवल एक वक्तव्य का नहीं, बल्कि राजनीतिक परिपक्वता, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय हित की समझ का है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक वक्तव्यों में संवेदनशीलता अनिवार्य होती है। सीमाओं से जुड़े तथ्य, सैन्य तैनाती, रणनीतिक आकलन-ये सब ऐसे विषय हैं जिन पर आधे-अधूरे संदर्भ या चयनित उद्धरण अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकते हैं। नीति-निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और…

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  • क्या ट्रम्प विश्व युद्ध के भयंकर परिणामों से परिचित हैं?…

    ट्रम्प की ‘बाडी-लैंग्वेज’ से तो नहीं लगता कि उन्हें युद्ध के भयानक परिणामों का ज्ञान हो। यह तो ठीक है कि अमरीका की ‘राजनीतिक- दादागिरी’ सब देशों पर भारी है लेकिन विश्व के राजनेता उन देशों की लिस्ट तो निकाल कर पढ़ें जिन्हें अमरीका की दादागिरी ने तबाह कर दिया। अमरीका की विस्तारवादी राजनीति आज दुनिया को तृतीय विश्व युद्ध…

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  • तेल के खेल में मोदी के आगे, भारत-वेनेजुएला वार्ता के बाद दुनिया में मची हलचल

    सूत्रों के अनुसार अमेरिका ने भारत को संकेत दिया है कि वह शीघ्र ही वेनेजुएला से तेल खरीद दोबारा शुरू कर सकता है ताकि रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता घटे। यह पहल भारत अमेरिका ऊर्जा संबंधों को नए सांचे में ढालने की अमेरिकी कोशिश का हिस्सा है। भारत और वेनेजुएला के बीच कूटनीति ने अचानक तेज रफ्तार पकड़ ली है।…

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  • पंजाब के लिए भाजपा कैसे कर रही हरियाणा से अपनी रणनीति का पुनर्निर्माण

    पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है लेकिन राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आना शुरू हो गया है। विरोध प्रदर्शनों, कानून व्यवस्था पर बहसों और केंद्र-राज्य की खींचतान के बीच, भारतीय जनता पार्टी एक दूरदर्शी पार्टी के धैर्य के साथ चुपचाप अपनी पंजाब रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रही है। इस पुनर्समायोजन के केंद्र में एक तेजी से…

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  • समता के बहाने असमानता का कानूनी…

    आज ज्यादातर क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का आधार जातीयता है। भाजपा भी यूजीसी कानून के जरिए इसी रास्ते पर चलती दिखाई दे रही है। ऐसे कानूनी उपायों को बढ़ावा देने से जातिगत दलों का वजूद भारतीय लोकतंत्र में और बढ़ेगा। इस्लाम आधारित दल भी मजबूत होंगे। यह स्थिति देश के भविष्य के लिए खतरनाक तो है ही, संविधान की भावना सामाजिक…

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