कोंडागांव। पिछले कुछ दिनों से जिले में मौसम में अचानक बदलाव देखा जा रहा है। सुबह की धूप के बाद दोपहर होते ही अचानक बादल घेर आते हैं और बारिश शुरू हो जाती है। यह सिलसिला लगातार जारी है। मंगलवार को भी नगर में तेज धूप के बाद मौसम ने पलटाव लिया और आसमान में काले बादल छा गए। कुछ ही समय में हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे मौसम ठंडा हो गया और लोगों को गर्मी से राहत मिली। कई लोग इस ठंडक का आनंद लेते नजर आए।
हालांकि, यह हल्की बारिश किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। खासकर मक्का और सब्जी की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि पहले की ओलावृष्टि और अब बारिश से उनकी फसलें खराब हो रही हैं।
सुकमा में भीगा ढाई लाख क्विंटल धान
नईदुनिया सुकमा। अचानक आई बेमौसम बारिश से सुकमा में धान संग्रहण केंद्रों में रखा ढाई लाख क्विंटल धान खराब होने लगा है। इसके अलावा, 25 उपार्जन केंद्रों में भी धान का उठाव पूरी तरह से नहीं हो पाया है, जिससे किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई फसल खराब हो रही है। धान में नमी आ गई है और अब बोरियों में अंकुरित होने लगा है। धान तिरपाल के नीचे रखा गया था, लेकिन तेज हवा और बारिश के कारण तिरपाल उड़ गए और धान पूरी तरह से भीग गया। इस धान की अनुमानित कीमत 57 करोड़ रुपये है।
जिला मुख्यालय स्थित धान संग्रहण केंद्र और 25 उपार्जन केंद्रों में रखा धान बारिश से भीग गया है। तिरपाल से ढके हुए 2 लाख 48 हजार 571 क्विंटल धान का नुकसान हुआ है, जिसका अनुमानित मूल्य 57 करोड़ रुपये है। पिछले एक सप्ताह से जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में शाम होते ही मौसम बदल जाता है और तेज हवाओं के साथ बारिश होती है। इससे संग्रहण केंद्रों में रखा धान खराब हो गया है।
संग्रहण केंद्र प्रभारी दीपेन्द्र ठाकुर का कहना है कि नवंबर और दिसंबर में खरीदा गया धान अंकुरित हो रहा है। तिरपाल से ढका धान नमी और उमस के कारण अंकुरित हो गया है, जिससे फसल का नुकसान हो रहा है। नवंबर 1 से 31 जनवरी तक धान की खरीदी हुई थी, और जिले के 25 उपार्जन केंद्रों में खरीदी गई फसल को 72 घंटे के अंदर उठाना था, लेकिन इसका उठाव नहीं हो सका है।
अव्यवस्था और सुरक्षा की कमी
जिला मुख्यालय स्थित धान संग्रहण केंद्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। यहां संपूर्ण जिले का धान एकत्रित होता है, लेकिन केंद्र में कोई उचित सुरक्षा नहीं है। नईदुनिया की टीम ने जब स्थल का निरीक्षण किया तो वहां अव्यवस्था का माहौल था। धान को तिरपाल से ठीक से नहीं ढका गया था और तेज हवा के कारण कई स्थानों पर तिरपाल फट गए थे। अधिकारियों की लापरवाही के कारण धान का उठाव नहीं हो सका, जिससे करोड़ों रुपये का धान खुले आसमान के नीचे खराब हो गया।

