मुख्य बिंदु:
- भीड़ को आगजनी और पुलिस अधिकारियों की हत्या के लिए उकसाने का आरोप।
- जैतखाम तोड़ने के विवाद के बाद जिले में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की।
- हिंसा के दौरान 200 से अधिक वाहनों को आग के हवाले किया गया।
रायपुर: बलौदाबाजार हिंसा मामले में बड़ा फैसला
बलौदाबाजार जिले में हुई हिंसा के मामले में जिला न्यायाधीश ने बुधवार को भिलाई नगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव समेत आठ लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इन पर कलेक्टोरेट और एसपी कार्यालय में आगजनी करने और उग्र भाषण देकर भीड़ को भड़काने का आरोप है। अब सभी के खिलाफ मुकदमा चलेगा। देवेंद्र यादव इस मामले में छह महीने तक जेल में रहे और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद फरवरी में रिहा हुए।
जैतखाम तोड़ने को लेकर हुए विवाद के बाद जिले में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा ने मोहन बंजारे और अन्य आरोपितों के मामले में सुनवाई के बाद आरोप तय किए।

कोर्ट के अनुसार, 10 जून 2024 की सुबह 11 बजे या उससे पहले दशहरा मैदान में सतनामी समाज के आंदोलन के दौरान विधायक देवेंद्र यादव, मोहन बंजारे और अन्य आरोपितों ने आक्रामक और भड़काऊ भाषण देकर लोगों को दंगे के लिए उकसाया था।
इस मामले में किशोर कुमार नवरंगे, दिनेश कुमार चतुर्वेदी, राजकुमार सतनामी, नितेश उर्फ निक्कू टंडन, ओमप्रकाश बंजारे और दीपक घृतलहरे भी आरोपित हैं। हिंसा के दौरान 200 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिससे करीब 12 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

