रायपुर।
बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई होमस्टे नीति: बस्तर, जो कभी माओवादी गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था, अब विकास और पर्यटन की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार बस्तर में जम्मू-कश्मीर मॉडल पर होम स्टे पॉलिसी लागू करने की तैयारी में है।
सरकार का उद्देश्य बस्तर को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से आर्थिक मदद प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। इस पॉलिसी के तहत आदिवासी गांवों में छोटे-छोटे पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे, जहां ग्रामीणों को उनके घर के अतिरिक्त एक और घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। पर्यटक इन घरों में ठहरेंगे, स्थानीय व्यंजन का स्वाद लेंगे और गांव की सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू होंगे। इससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिलेगा।
होम स्टे विकसित करने में औसतन एक लाख रुपये तक का खर्च आता है, और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल इसकी डिजाइन तैयार करेगा। इससे न केवल ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा, बल्कि प्रदेश के पर्यटन उद्योग को भी एक नया दिशा मिलेगी।
बस्तर, सरगुजा और अन्य जिलों में विस्तार
पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने बताया कि केंद्र से प्रस्ताव की स्वीकृति मिलते ही योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी जाएगी और इच्छुक व्यक्तियों का पंजीयन किया जाएगा, जिनके बाद उन्हें होम स्टे निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
चित्रकोट और धुड़मारास को मिलेगा विकास
बस्तर जिले के चित्रकोट और धुड़मारास गांवों को हाल ही में ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज 2024’ प्रतियोगिता में विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है, जिसे केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदान किया। धुड़मारास अपनी एडवेंचर गतिविधियों के लिए और चित्रकोट जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। अब सरकार ऐसे अन्य गांवों की पहचान कर रही है, जो पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
छोटेबोडाल: बस्तर का पहला मिलिस्टिक विलेज होम स्टे
बस्तर जिले में होम स्टे की शुरुआत सबसे पहले छोटेबोडाल गांव से हुई थी। यह गांव नांगूर के पास स्थित है और बस्तर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। 2007 में शकील रिजवी ने यहां जिले का पहला होम स्टे शुरू किया, जो तीन कमरों वाला एक पारंपरिक मिट्टी का घर है। इस घर में 12 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है, और यहां आने वाले पर्यटक न केवल ग्रामीण जीवन का अनुभव करते हैं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय वनस्पतियों के बारे में भी सीखते हैं।
पर्यटन मंडल कर रहा है विस्तार की तैयारी
बस्तर में वर्तमान में 27 होम स्टे चल रहे हैं, और चित्रकोट के आस-पास के गांवों में भी जिला प्रशासन की मदद से होम स्टे विकसित किए गए हैं। ये होम स्टे ग्रामीणों के लिए आय के नए स्रोत बन रहे हैं।
माओवाद का असर घटा, पर्यटन क्षेत्र सुरक्षित
बस्तर के कोंडागांव और बस्तर जिले अब माओवादी प्रभाव से लगभग पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। हालांकि, सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जिलों में अभी भी कुछ हद तक नक्सली गतिविधियाँ हैं, लेकिन राज्य सरकार की रणनीति और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण स्थिति तेजी से बदल रही है। अब पर्यटन विभाग का ध्यान उन क्षेत्रों पर है, जो अब पूरी तरह से सुरक्षित हो चुके हैं।

